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# रोघाट-दल्लीराजहरा नई ट्रेन अबूझमाड़ के दूरदराज़ गांवों को रायपुर से जोड़ती है
- URL: https://newsanek.com/hindi/chhattisgarh-abujhmad-railway-tracks-progress-kanker/
- Published: 2026-11-07T13:10:46.000Z
- Updated: 2026-11-07T15:50:19.000Z
- Description: ट्रेन रोघाट से दल्लीराजहरा तक जाती है, जो लगभग 100 किलोमीटर दूर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब सफ़र कुछ घंटों में पूरा हो जाता है और इलाज तक पहुंच आसान हुई है।
- Author: Kumar Ujjwal
- Tags: देश, छत्तीसगढ़, समझिए, #state-chhattisgarh, #state-desk, #region-central

सुबह करीब 6.30 बजे कांकेर जिले के रोघाट स्टेशन से एक ट्रेन करीब 30 यात्रियों के साथ रवाना होती है।

इसकी मंज़िल दल्लीराजहरा है, जो लगभग 100 किलोमीटर दूर है।

यह जानकारी हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में दी गई है। रास्ते में ट्रेन तडोकी, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर और केवटी में और यात्री चढ़ाती है।

### एक नज़र में

- नई यात्री ट्रेन रोघाट से दल्लीराजहरा के बीच चलती है, जो लगभग 100 किलोमीटर दूर है।
- स्थानीय लोगों का कहना है कि रायपुर का जो सफ़र पहले पूरे दिन का था, वह अब कुछ घंटों में हो जाता है।
- इस लाइन का काम 2015 में शुरू हुआ और 20 अक्टूबर 2026 को इसका उद्घाटन हुआ।
- इलाके में सात महीने से कोई माओवादी हिंसा दर्ज नहीं हुई है।

## सफ़र ज़मीन पर कैसा दिखता है?

घने जंगल के बीच ट्रेन चलती है, तो सुबह की धूप पेड़ों से छनकर अंदर आती है। रास्ते में पहाड़ियां, नदी-नाले और छोटी बस्तियां दिखती हैं।

नारायणपुर के रहने वाले अनिल पोताई और अंजनी पोताई भाई-बहन हैं। दोनों रायपुर के स्वामी आत्मानंद कॉलेज में पढ़ते हैं।

अंजनी के मुताबिक लगभग हर किलोमीटर पर नदी-नाला दिखता है। वह अपने फ़ोन में यह नज़ारा रिकॉर्ड करती है।

तडोकी पर पांच सुरक्षाकर्मी ट्रेन में चढ़ते हैं।

अंतागढ़ पर करीब 50 और लोग चढ़ते हैं, जिनमें से ज़्यादातर बालोद जिले के खदान वाले कस्बे दल्ली राजहरा जा रहे हैं।

## तो इस ट्रेन से रोज़मर्रा की ज़िंदगी कैसे बदल रही है?

अनिल बताते हैं कि पहले रायपुर पहुंचने में पूरा दिन लग जाता था। अब वे कुछ घंटों में वहां पहुंच सकते हैं।

उनका मानना है कि अब बहुत से आदिवासी युवा रायपुर में पढ़ाई करेंगे।

किसान कौशल बघेल केवटी से इसी सुविधा के लिए ट्रेन पकड़ते हैं, ताकि अस्पताल पहुंच सकें।

बघेल के मुताबिक पहले बस से यह सफ़र आठ से दस घंटे का होता था। अब वे घुटने की जांच के लिए रायपुर जा सकते हैं।

अंतागढ़ के यात्री पुनेम का कहना है कि यह ट्रेन दूसरे विकल्पों से सस्ती और तेज़ है। वे वापसी भी इसी ट्रेन से करने की सोच रहे हैं।

दिवाली पर बिहार अपने गांव जा रहे एक सुरक्षाकर्मी का कहना है कि हालात काफ़ी बेहतर हुए हैं। फिर भी उनके मुताबिक इलाके में डर अब भी है।

## इस रेल लाइन का पूरा इतिहास क्या है?

दल्लीराजहरा से रोघाट तक की इस लाइन का निर्माण 2015 में शुरू हुआ था। इसका 75 किलोमीटर का हिस्सा तडोकी तक 2023 में पूरा हुआ।

उसी साल यात्री सेवा भी शुरू हो गई।

बाकी हिस्सा अगले तीन साल में बनाया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 20 अक्टूबर 2026 को इसका उद्घाटन किया।

रोघाट-दल्लीराजहरा रेल लाइन का सफ़र

1. **2015**दल्लीराजहरा से रोघाट तक की लाइन का निर्माण शुरू हुआ
2. **2023**75 किलोमीटर का हिस्सा तडोकी तक पूरा हुआ
3. **2023**उसी साल यात्री सेवा शुरू हो गई
4. **अगले तीन साल**लाइन का बाकी हिस्सा बनाया गया
5. **20 अक्टूबर 2026**मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और अश्विनी वैष्णव ने उद्घाटन किया

ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से

रोघाट कभी माओवादियों का गढ़ था।

यहां के प्लेटफ़ॉर्म की सुरक्षा अब भी सुरक्षा कैंप करते हैं, हालांकि सात महीने से कोई माओवादी हिंसा दर्ज नहीं हुई है।

केंद्र सरकार ने दावा किया है कि उसने 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से माओवाद खत्म कर दिया।

रिपोर्ट में जनवरी 2024 से मुठभेड़ों में मारे गए और आत्मसमर्पण करने वालों के आंकड़े भी दिए गए हैं।

रिपोर्ट में यात्रा की दूरी लगभग 100 किलोमीटर बताई गई है, जबकि लाइन की लंबाई 95 किलोमीटर बताई गई है।

रिपोर्ट में इस अंतर को पूरी तरह साफ़ नहीं किया गया है।

समझिए

### पहले क्या हुआ

- इस रेल लाइन का निर्माण 2015 में शुरू हुआ था।
- 75 किलोमीटर का हिस्सा तडोकी तक 2023 में पूरा हुआ और उसी साल यात्री सेवा शुरू हुई।
- 20 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका उद्घाटन किया।

### यह क्यों अहम है

यह ट्रेन दूरदराज़ आदिवासी गांवों को रायपुर से जोड़ती है, जहां के लोगों के मुताबिक पहले इस सफ़र में पूरा दिन लगता था।

### आगे क्या

- रोघाट के प्लेटफ़ॉर्म पर सुरक्षा कैंप अब भी हैं, हालांकि सात महीने से इलाके में माओवादी हिंसा दर्ज नहीं हुई है।

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### स्रोत

- [Hindustan Times: As tracks pierce isolated red region, Chhattisgarh’s Abujhmad finds a route to progress](https://www.hindustantimes.com/india-news/as-tracks-pierce-isolated-red-region-chhattisgarh-s-abujhmad-finds-a-route-to-progress-101794030623822.html?ref=newsanek.com)