> ## Content Index
> Fetch the complete content index at: https://newsanek.com/hindi/llms.txt
> Use this file to discover other available public pages before exploring further.

# झारखंड के कई एकलव्य स्कूल तैयार, पर छात्र और शिक्षक नदारद
- URL: https://newsanek.com/hindi/jharkhand-eklavya-schools-empty-tribal-children-wait/
- Published: 2026-11-03T12:17:56.000Z
- Updated: 2026-11-03T12:17:56.000Z
- Description: द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक रांची के चानहो में एकलव्य स्कूल की इमारत तैयार है, लेकिन उद्घाटन के करीब एक साल बाद भी पढ़ाई शुरू नहीं हुई है।
- Author: Kumar Ujjwal
- Tags: झारखंड, #state-jharkhand, #starter

झारखंड में आदिवासी बच्चों के लिए बने कई एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल (EMRS) अब भी खाली पड़े हैं। द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक रांची जिले के चानहो ब्लॉक का स्कूल इसकी एक मिसाल है। यहां इमारत तैयार है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन के करीब एक साल बाद भी एक भी छात्र कक्षा में नहीं पहुंचा है।

### एक नज़र में

- चानहो के एकलव्य स्कूल में क्लासरूम, हॉस्टल और लैब हैं, पर छात्र और शिक्षक नहीं हैं।
- झारखंड में 91 एकलव्य स्कूल मंज़ूर हैं, जनवरी 2026 तक सिर्फ 51 चालू थे।
- मार्च तक चालू स्कूलों में कुल 8,380 बच्चों का नामांकन हुआ।
- शिक्षकों और स्टाफ की भर्ती NESTS के ज़रिये प्रक्रिया में है।

## चानहो कैंपस की हालत

चानहो का स्कूल 15 एकड़ में फैला है। यहां बड़े क्लासरूम, हॉस्टल और प्रयोगशालाएं बनी हैं। फिर भी बेंचों पर धूल जमी है, खिड़कियों के शीशे टूटे हैं और वॉशरूम के शीशों में दरारें आ गई हैं। उद्घाटन के समय लाए गए फूल इमारत के अंदर ही सूख चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार स्कूल को अब तक पानी और बिजली का कनेक्शन भी नहीं मिला है।

दो महीने पहले ही प्रिंसिपल बने सत्यम ओझा काम पूरा कराने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि वे एडमिशन करा रहे हैं और ज़िला प्रशासन से शिक्षकों की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक स्कूल जल्द शुरू किया जाएगा। जिन बच्चों को दाखिला मिल चुका है, वे पहली क्लास का इंतज़ार कर रहे हैं। रिपोर्ट में 12 साल की एक बच्ची का ज़िक्र है, जिसे चानहो स्कूल में सीट मिल गई है, पर पढ़ाई अभी शुरू नहीं हुई।

## योजना और उसकी चुनौतियां

एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल 1997-98 में दूरदराज़ इलाकों के अनुसूचित जनजाति के बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए शुरू किए गए थे। 2018-19 में योजना का विस्तार हुआ और हर उस ब्लॉक में स्कूल खोलने का लक्ष्य रखा गया, जहां आदिवासी आबादी 50 प्रतिशत से ज़्यादा है। हर स्कूल में कक्षा 6 से 12 तक 480 बच्चों के पढ़ने की व्यवस्था है और सुविधाएं जवाहर नवोदय विद्यालयों के बराबर रखने की बात कही गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में इस योजना को बंद पड़े कैंपस, स्टाफ की कमी, निर्माण में देरी और केंद्र-राज्य के बीच प्रशासनिक विवादों से दिक्कत हो रही है। झारखंड में नए बने कैंपस निर्माण और तैयारी के अलग-अलग चरणों में हैं।

## स्टाफ की भर्ती पर क्या कहता है प्रशासन

जनजातीय कल्याण आयुक्त कुलदीप चौधरी के अनुसार स्कूल खोलने में सबसे बड़ी चुनौती स्टाफ की है। उन्होंने बताया कि टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्ती नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS) के ज़रिये चल रही है। भर्ती पूरी होने तक एड-हॉक आधार पर स्टाफ और गेस्ट टीचर रखे गए हैं।

आदिवासी गांवों के बच्चों के लिए यह देरी मायने रखती है। इन स्कूलों से उन्हें उच्च शिक्षा और ऐसे करियर की तैयारी का मौका मिल सकता है, जो अब तक उनकी पहुंच से बाहर रहे हैं। स्कूल न खुलने पर वे अपने गांवों में सीमित शिक्षा विकल्पों पर निर्भर रहते हैं।

---

### स्रोत

- [The Print: Why are many of Jharkhand’s Eklavya schools empty? Tribal children wait for their first class](https://theprint.in/ground-reports/jharkhand-eklavya-model-residential-schools-empty-tribal-children-education/3089105/?ref=newsanek.com)