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दुनिया

अब्दुल एल-सैयद अमेरिकी सीनेट में चुने गए पहले मुस्लिम नेता

डेमोक्रेटिक पार्टी के अब्दुल एल-सैयद ने मिशिगन में माइक रोजर्स को हराया। उनका प्रचार स्वास्थ्य सेवा और खर्च के मुद्दों पर केंद्रित था।

US Capitol 1814c
प्रतीकात्मक फोटो: US Capitol 1814c. Photo: George Munger / Wikimedia Commons, Public domain

अब्दुल एल-सैयद अमेरिकी सीनेट में चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बन गए हैं। अमेरिकी टीवी चैनलों ने बुधवार तड़के मिशिगन की दौड़ का नतीजा घोषित किया।

यह जानकारी माथृभूमि इंग्लिश ने दी।

एल-सैयद डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व सांसद माइक रोजर्स को हराया।

वह डेमोक्रेट गैरी पीटर्स की खाली होने वाली सीट संभालेंगे, जो अब चुनाव नहीं लड़ रहे।

एक नज़र में

  • अब्दुल एल-सैयद, डेमोक्रेटिक पार्टी से, अमेरिकी सीनेट में चुने गए पहले मुस्लिम हैं।
  • उन्होंने मिशिगन की सीनेट सीट पर रिपब्लिकन माइक रोजर्स को हराया।
  • उनका प्रचार स्वास्थ्य सेवा, खर्च और राजनीति में पैसे के असर पर केंद्रित था।
  • प्रचार के दौरान उन्हें हमलों और उनके अरबी नाम पर मज़ाक का सामना करना पड़ा।

तो यह जीत इतनी चर्चा में क्यों है?

समर्थकों ने इस चुनाव को अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व के लिए एक अहम पल माना।

द इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, एल-सैयद को 51 प्रतिशत वोट मिले।

माथृभूमि इंग्लिश ने लिखा कि नतीजा घोषित होने के समय उनकी बढ़त लगभग छह प्रतिशत अंकों की थी। दोनों रिपोर्टों में आंकड़े अलग तरह से दिए गए हैं।

चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की सदस्य हेली स्टीवंस ने सार्वजनिक रूप से रोजर्स का समर्थन किया।

इसके बावजूद एल-सैयद अपने समर्थन पर टिके रहे और जीत गए।

प्रचार में उन्होंने मतदाताओं से क्या वादा किया?

एल-सैयद ने स्वास्थ्य सुधार और इलाज को सस्ता बनाने पर ज़ोर दिया। उन्होंने सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा की दिशा में काम करने का वादा किया।

उन्होंने मतदाताओं से कहा कि लोगों को भारी बिल के बिना डॉक्टर से मिलने की सुविधा मिलनी चाहिए।

उन्होंने देश की महंगी और मुनाफ़े पर आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था की आलोचना की।

आगे क्या होगा, और उन पर हमलों का क्या?

माथृभूमि इंग्लिश के मुताबिक, प्रचार के दौरान रिपब्लिकन नेताओं ने उन्हें आतंकवादी और कम्युनिस्ट बताया।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उनके अरबी नाम का मज़ाक उड़ाया।

द इकोनॉमिक टाइम्स की हेडलाइन में कहा गया है कि ट्रंप ने उन्हें आतंकवादी कहा। लेकिन लेख के अंदर यह बात नहीं लिखी है।

उसमें केवल आम तौर पर हमलों का ज़िक्र है।

अपने भाषण में एल-सैयद ने वेंस से कहा कि संविधान के तहत उन्हें जनवरी में शपथ दिलानी होगी।

एजुकेशन टाइम्स ने लिखा कि उनकी पृष्ठभूमि पर भी सवाल उठे हैं।

पॉलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने खुद को चिकित्सक बताया, जबकि वह लाइसेंस प्राप्त डॉक्टर नहीं हैं।


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