5 नवंबर 2026 देश की खबरें 1 मिनट में। साफ़, जांची-परखी, स्रोत के साथ। 👤 साइन इन मेरी फीड टूल्स English Instagram Facebook X
दुनिया

इज़राइल के राष्ट्रपति ने चुनाव नतीजे स्वीकार किए, सरकार बनाने की बातचीत शुरू

नेतन्याहू और गादी आइज़नकोट, दोनों के गठबंधन 61 सीटों के बहुमत से पीछे रहे। अरब नेतृत्व वाले दलों की 19 सीटें अब अहम हो गई हैं। राष्ट्रपति कुछ दिनों में उम्मीदवार का फ़ैसला करेंगे।

Jerusalem Knesset Building (2543665854)
प्रतीकात्मक फोटो: Jerusalem Knesset Building (2543665854). Photo: Chris Yunker from St. Louis, United States / Wikimedia Commons, CC BY-SA 2.0

इज़राइल के राष्ट्रपति आइज़ैक हर्ज़ोग ने पिछले हफ़्ते हुए संसदीय चुनाव के प्रमाणित नतीजे स्वीकार कर लिए हैं।

उन्होंने अगली सरकार पर फ़ैसला करने के लिए पार्टी नेताओं से बातचीत भी शुरू कर दी है।

यह जानकारी अल जज़ीरा ने बुधवार को दी।

इस कदम को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए झटका माना जा रहा है, जो चुनाव की साख पर सवाल उठाने की कोशिश कर रहे थे।

मतदान 27 अक्टूबर को हुआ था। 120 सदस्यों वाली संसद में किसी भी पक्ष को सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 61 सीटें नहीं मिलीं।

एक नज़र में

  • नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, और गादी आइज़नकोट के गुट को 48।
  • अरब नेतृत्व वाले दलों ने मिलकर रिकॉर्ड 19 सीटें जीतीं।
  • राष्ट्रपति एक उम्मीदवार चुनेंगे, जो शायद नेतन्याहू या आइज़नकोट होंगे।
  • सरकार न बनी तो अगले साल की शुरुआत में फिर चुनाव हो सकते हैं।

सीटों का गणित कैसा है?

नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलीं। आइज़नकोट के गुट को 48 सीटें मिलीं।

अरब नेतृत्व वाले दल Ra'am और Joint List ने मिलकर रिकॉर्ड 19 सीटें जीतीं।

इससे दो रास्ते खुलते हैं। नेतन्याहू और आइज़नकोट मिलकर गठबंधन बना सकते हैं। या आइज़नकोट अरब नेतृत्व वाले दलों के साथ आ सकते हैं।

नेतन्याहू और उनके समर्थकों ने बार-बार बिना सबूत के दावा किया कि अरब नेतृत्व वाले दलों ने चुनाव "चुरा" लिया, शायद विदेशी मदद से।

चुनाव आयोग ने कहा कि उसने धांधली के सभी आरोपों की जांच की। उसे ऐसी कोई गड़बड़ी नहीं मिली जिससे नतीजे प्रभावित हुए हों।

तो यह क्यों ज़रूरी है? इससे तय होगा कि इज़राइल की अगली सरकार कौन चलाएगा। सूत्रों में यह नहीं बताया गया कि इसका भारत पर क्या असर होगा।

किसका समर्थन किस तरफ़ है?

नेतन्याहू के करीबी तीन गुटों ने सिफ़ारिश की कि उन्हें गठबंधन बनाने का मौका दिया जाए।

एक चौथे गुट ने, जो कभी उनका सहयोगी था पर अब विरोधी है, आइज़नकोट का समर्थन किया।

Ra'am ने कहा कि वह आइज़नकोट की सिफ़ारिश करेगा।

इज़राइली समाचार साइट Ynet के अनुसार उनका अनुमानित समर्थन 56 सांसदों तक पहुँच गया है, जो अब भी बहुमत से कम है।

संयुक्त सूची ने अपना रुख अभी घोषित नहीं किया है। Channel 12 की रिपोर्ट के अनुसार वह आइज़नकोट का समर्थन कर सकती है।

उसकी 11 सीटें उन्हें 61 के पार ले जा सकती हैं।

अति-रूढ़िवादी गुट डेगल हातोरा ने दोनों में से किसी की सिफ़ारिश न करने की बात कही है।

यह गुट नेतन्याहू से अलग हुआ, क्योंकि उनका गठबंधन सैन्य सेवा से छूट देने वाला कानून पास नहीं करा सका। यह जानकारी द टाइम्स ऑफ़ इज़राइल ने दी।

आगे क्या होगा?

बातचीत गुरुवार को जारी रहेगी। आठ और दल राष्ट्रपति से मिलेंगे। आइज़नकोट की Yashar पार्टी और नेतन्याहू की Likud सबसे आख़िर में मिलेंगी।

बातचीत के बाद हर्ज़ोग उस उम्मीदवार को चुनेंगे जो गठबंधन बनाने में सबसे सक्षम लगे। यह लगभग तय है कि वह नेतन्याहू या आइज़नकोट होंगे।

चुने गए उम्मीदवार के पास सरकार बनाने के लिए 28 दिन होंगे। इसे 14 दिन और बढ़ाया जा सकता है।

फ्री प्रेस कश्मीर की रिपोर्ट के अनुसार, हर्ज़ोग ने नेताओं से समझौता करने की अपील की है ताकि फिर से चुनाव न कराने पड़ें।


स्रोत

दुनिया

हम कैसे रिपोर्ट करते हैं। News Anek की हर खबर कम से कम दो भरोसेमंद स्रोतों से जांची जाती है, और हम उन स्रोतों के नाम देते हैं। कोई गलती दिखी? contact@newsanek.com पर लिखें, और हमारी सुधार नीति व संपादकीय नीति पढ़ें।