भारत के चुनाव आयोग ने अपने कामकाज में कई बदलाव किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव ऑनलाइन फ़ॉर्म से जुड़ा है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision या SIR) की घोषणा को मुख्य फ़ॉर्म से हटा दिया गया है।
अब यह एक अलग घोषणा है। यह बदलाव उन राज्यों में भी लागू है, जहाँ SIR की प्रक्रिया अभी चल रही है।
इंडिया टुडे ने यह जानकारी 5 नवंबर 2026 को दो अलग रिपोर्ट में दी।
एक नज़र में
- SIR की घोषणा ऑनलाइन फ़ॉर्म से हटाकर अलग कर दी गई है।
- बैठकों के एजेंडा पहले भेजने होंगे और कार्यवाही का रिकॉर्ड जारी होगा।
- IT में प्रस्तावित बदलावों की जाँच पहले एक समिति करेगी।
- चुनाव आयोग के अफ़सरों को विदेश यात्रा के लिए मंज़ूरी लेनी होगी।
यह घोषणा किस बारे में है?
एक इंडिया टुडे रिपोर्ट के मुताबिक, इस घोषणा में पूछा जाता है कि कोई नागरिक या उसके माता-पिता 2002 या 2003 में मैप किए गए थे या नहीं।
फ़ॉर्म में यह बदलाव इस सवाल को बाकी फ़ॉर्म से अलग रखने के लिए किया गया है।
तो ये बदलाव क्यों किए जा रहे हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक, ये बदलाव कुछ विवादों और अदालत की जाँच के बाद किए गए हैं। इनसे आयोग के कुछ सदस्यों के बीच पहले के मतभेद भी सुलझे हैं।
मकसद आयोग के कामकाज को ज़्यादा पारदर्शी बनाना है। यह मतदाताओं के लिए भी मायने रखता है, क्योंकि इनसे आयोग के काम करने का तरीका तय होता है।
बैठकों और अफ़सरों पर कौन से नए नियम लागू होंगे?
अब बैठकों के एजेंडा पहले से भेजने होंगे। सभी उच्च स्तरीय आंतरिक चर्चाओं की कार्यवाही का रिकॉर्ड भी जारी करना ज़रूरी होगा।
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग पर भी अब ज़्यादा निगरानी रहेगी। प्रस्तावित IT मॉड्यूल बदलाव और सर्वर की समस्याओं के हल पहले एक समिति जाँचेगी।
उसके बाद ही ये प्रस्ताव मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों तक पहुँचेंगे। अफ़सरों को विदेश यात्राओं के लिए भी मंज़ूरी लेनी होगी।
रिपोर्ट में आगे की कार्रवाई के बारे में कुछ नहीं कहा गया है।