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सेबी ने विदेशी निवेशकों के लिए KYC नियम आसान किए, 3 दिसंबर से लागू

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने NRI, OCI और कुछ विदेशी नागरिकों के लिए डिजिटल KYC की अनुमति दी है। KYC रिकॉर्ड अब अलग-अलग वित्तीय संस्थाओं के बीच भी इस्तेमाल हो सकेंगे।

Shore of the East River with Headquarters of the United Nations, New York City, 20231005 1132 2230
प्रतीकात्मक फोटो: Shore of the East River with Headquarters of the United Nations, New York City, 20231005 1132 2230. Photo: Jakub Hałun / Wikimedia Commons, CC BY 4.0

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने विदेशी निवेशकों के लिए Know Your Customer (KYC) यानी ग्राहक पहचान के नियमों में ढील दी है।

नए ढांचे के तहत पात्र निवेशक भारत आए बिना डिजिटल तरीके से अपनी प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

ये नियम अनिवासी भारतीयों (NRI), भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (OCI) और विदेशी नागरिकों पर लागू होंगे।

शर्त यह है कि वे ऐसे देशों में रहते हों जो फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के मानकों का पालन करते हैं।

Sarkaritel.com की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। ये बदलाव 3 दिसंबर से लागू होंगे।

जो निवेशक FATF मानकों का पालन न करने वाले देशों में रहते हैं, उन पर मौजूदा KYC नियम ही लागू रहेंगे।

एक नज़र में

  • पात्र विदेशी निवेशक भारत आए बिना डिजिटल KYC कर सकेंगे।
  • ये बदलाव 3 दिसंबर से लागू होंगे।
  • KYC रिकॉर्ड अलग-अलग वित्तीय संस्थाओं के बीच इस्तेमाल हो सकेंगे।
  • डिजिटल जांच के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय तय किए गए हैं।

तो निवेशकों को व्यवहार में क्या बदलेगा?

बाज़ार की संस्थाएं अब KYC की जानकारी और दस्तावेज़ डिजिटल माध्यम से ले सकेंगी। निवेशक फॉर्म ऑनलाइन या कागज़ पर, दोनों तरह से जमा कर सकेंगे।

विदेशी निवेशकों को पासपोर्ट की कॉपी जमा करनी होगी। जहां लागू हो, वहां OCI कार्ड भी देना होगा।

विदेश के रिहायशी पते को पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा सकता है।

एक और बड़ा बदलाव KYC रिकॉर्ड की पोर्टेबिलिटी है।

किसी एक संस्था में मौजूद रिकॉर्ड दूसरी संस्था में भी इस्तेमाल हो सकेगा, भले ही उसकी हर जानकारी की पुष्टि न हुई हो।

संस्थाएं किसी दूसरी SEBI-पंजीकृत संस्था या किसी दूसरे वित्तीय क्षेत्र के नियामक की जांच पर भी भरोसा कर सकेंगी।

यह जांच KYC रजिस्ट्रेशन एजेंसी (KRA) या सेंट्रल KYC रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री में मौजूद रिकॉर्ड से होगी।

डिजिटल जांच में कौन से सुरक्षा उपाय हैं?

वीडियो जांच के दौरान एक अधिकृत अधिकारी का मौजूद रहना ज़रूरी होगा। इस प्रक्रिया की समवर्ती ऑडिट भी होगी।

इलेक्ट्रॉनिक तरीके से दिए गए हस्ताक्षरों की जांच वीडियो इन-पर्सन वेरिफिकेशन (IPV) में होगी।

ग्राहक की जांच की पूरी ज़िम्मेदारी संस्थाओं की ही रहेगी। उन्हें हर निवेशक के जोखिम स्तर के आधार पर ज़्यादा सख़्त जांच करनी होगी।

पूरे हो चुके KYC रिकॉर्ड तीन कार्यदिवस के भीतर KRA पर अपलोड करने होंगे।

संशोधित प्रावधान FATF मानक वाले देशों में रहने वाले मौजूदा ग्राहकों के री-KYC पर भी लागू होंगे।

तो इससे भारत के बाज़ार पर क्या असर पड़ सकता है?

SEBI को उम्मीद है कि इस नए ढांचे से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय पूंजी बाज़ार तक पहुंच आसान होगी।

कागज़ी काम और भौतिक चरण कम होने से उनकी परेशानियां घटने की उम्मीद है।

पोर्टेबल KYC और मज़बूत जांच, दोनों एक साथ रखे गए हैं। मकसद सुविधा बढ़ाना है, और नियमों का पालन भी बना रहे।


स्रोत

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