सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश की बिजली हिस्सेदारी से जुड़ा लंबा विवाद खत्म कर दिया है।
यह बिजली भाखड़ा-नंगल और ब्यास जलविद्युत परियोजनाओं से मिलती है।

तीन जजों की पीठ ने एक समझौता फॉर्मूला मंज़ूर किया है। पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे।
इस फॉर्मूले पर बातचीत अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि की मदद से हुई। इसमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा ने हिस्सा लिया।
इन्डिया लीगल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश को पंजाब और हरियाणा से 20 साल में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी।
एक नज़र में
- हिमाचल प्रदेश को 20 साल में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी।
- बांध निर्माण के खर्च के लिए 420 करोड़ रुपये का समायोजन किया गया है।
- राज्यों के बीच पैसे का लेन-देन नहीं होगा। समायोजन बिजली आवंटन से होगा।
- यह विवाद कई दशकों से अनसुलझा था।
अंतिम हिस्सा पहले के अनुमान से कम क्यों है?
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने पहले हिमाचल का हक 13,066 मिलियन यूनिट आंका था। अंतिम समझौते में 420 करोड़ रुपये का समायोजन किया गया है।
यह समायोजन बांध बनाने में हुए पुराने पूंजी खर्च से जुड़ा है। इस समझौते में अंतर-राज्यीय पैसे का लेन-देन नहीं होता।
राज्यों में समय सीमा पर मतभेद क्यों था?
बिजली कितने समय में मिले, यह सबसे बड़ा मतभेद था। हिमाचल प्रदेश चाहता था कि पूरा हिस्सा 10 साल में मिले। पंजाब ने 30 साल की समय सीमा मांगी।
अटॉर्नी जनरल ने 15 साल का सुझाव दिया था। सभी पक्षों पर विचार के बाद अदालत ने 20 साल की योजना चुनी।
साल
ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से
तो इस फैसले का आम लोगों पर क्या असर है?
यह फैसला 2011 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने का ढांचा देता है। इससे कई दशकों से खुला विवाद अब बंद होने की ओर है।
आम लोगों के लिए इसका मतलब है कि इन तीन राज्यों के बीच बिजली बंटवारा अब इसी तय योजना से होगा।
समझिए
पहले क्या हुआ
- भाखड़ा-नंगल और ब्यास परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश की बिजली हिस्सेदारी का विवाद कई दशकों से चल रहा था।
- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने पहले हिमाचल का हक 13,066 MU आंका था।
- सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में एक आदेश दिया था, और यह समझौता उसी को लागू करने का ढांचा देता है।
यह क्यों अहम है
यह फैसला तीन राज्यों के बीच 20 साल तक बिजली बंटवारे का तरीका तय करता है। इसमें राज्यों के बीच पैसे का लेन-देन नहीं होता।
आगे क्या
- समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश को 20 साल में बिजली मिलेगी। स्रोतों में शुरुआत की तारीख नहीं दी गई है।
एग्ज़ाम कॉर्नर
UPSC जीएस पेपर 2 · राजव्यवस्था: सुप्रीम कोर्ट और अंतर-राज्यीय विवाद
क्या है खबर
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के बीच लंबे समय से चल रहे बिजली हिस्सेदारी विवाद को सुलझा दिया है। यह समझौता भाखड़ा-नंगल और ब्यास परियोजनाओं की बिजली से जुड़ा है।
पृष्ठभूमि
- सुप्रीम कोर्ट का 2011 का आदेश है, जिसे इस नए समझौते से लागू किया जा रहा है।
- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने पहले हिमाचल का हक 13,066 MU आंका था।
- अंतिम समझौते में बांध निर्माण के खर्च के लिए 420 करोड़ रुपये का समायोजन किया गया है और राज्यों के बीच पैसे का लेन-देन नहीं होगा।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- भाखड़ा-नंगल और ब्यास जलविद्युत परियोजनाएं हैं
- हिमाचल प्रदेश को 20 साल में 11,973 MU बिजली मिलेगी
- अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने बातचीत में मदद की
मेन्स के लिए सामग्री
- महत्व: तीन राज्यों के बीच कई दशकों से अनसुलझा विवाद अब खत्म हुआ है।
- मुख्य मुद्दा: हर राज्य के हिस्से, समय सीमा और पुराने बांध खर्च के बीच संतुलन बनाना।
- चुनौतियां: राज्यों की मांगें अलग थीं, 10 साल से लेकर 30 साल तक।
- आगे का रास्ता: इस फैसले में पैसे के बजाय बिजली आवंटन के जरिए समायोजन किया गया है।
अभ्यास प्रश्न: प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े अंतर-राज्यीय विवादों को सुलझाने में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर चर्चा कीजिए। भाखड़ा-नंगल मामले को उदाहरण के रूप में लीजिए।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
Q1. हिमाचल प्रदेश के बिजली विवाद से जुड़ी दो मुख्य जलविद्युत परियोजनाएं कौन सी हैं?
- भाखड़ा-नंगल और ब्यास
- हीराकुंड और टिहरी
- सरदार सरोवर और इंदिरा सागर
- कोयना और इडुक्की
उत्तर देखें
उत्तर: A. लेख में भाखड़ा-नंगल और ब्यास परियोजनाओं का नाम विवाद के स्रोत के रूप में दिया गया है।
Q2. हिमाचल प्रदेश को तय बिजली कितने साल में मिलेगी?
- 10 साल
- 15 साल
- 20 साल
- 30 साल
उत्तर देखें
उत्तर: C. सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग पक्षों पर विचार के बाद 20 साल की योजना चुनी।
मुख्य शब्द
- अंतर-राज्यीय विवाद: दो या अधिक राज्यों के बीच का मतभेद, जिसे अदालत या किसी प्राधिकरण द्वारा सुलझाया जाता है।
- जलविद्युत परियोजना: बहते पानी की ऊर्जा से बिजली बनाने वाला बिजलीघर।
- कैशलेस समझौता: ऐसा समझौता जिसमें पैसे का भुगतान न हो और हिसाब दूसरे तरीके से समायोजित हो।
परीक्षा की तैयारी के लिए और खबरें: UPSC Today
ये बातें इस खबर की रिपोर्ट से ली गई हैं। परीक्षा से पहले NCERT किताबों और PIB जैसे मानक स्रोतों से ज़रूर मिलाएं।