हैदराबाद की स्पेस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप कॉसमोसर्व स्पेस ने बेस 1 नाम की नई सुविधा शुरू की है।
यह भारत की पहली निजी सुविधा है जो स्पेस विज़न इफेक्ट्स और माइक्रोग्रेविटी सिमुलेशन के लिए बनी है।
यह दुनिया के सिर्फ़ छह ऐसे केंद्रों में से एक है। यह जानकारी India.com की रिपोर्ट में दी गई है।
इसका उद्घाटन गुरुवार को तेलंगाना के आईटी और उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने किया।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से हिस्सा लिया।
कॉसमोसर्व स्पेस के संस्थापक और सीईओ डॉ चिरंजीवी फणींद्र और तेलंगाना के आईटी सलाहकार साई कृष्णा भी मौजूद थे।
एक नज़र में
- बेस 1 में अंतरिक्ष मलबा हटाने और सैटेलाइट सर्विसिंग का काम एक ही छत के नीचे होता है।
- इस केंद्र में परीक्षण, रोबोटिक्स, असेंबली और मिशन कंट्रोल की चार मुख्य सुविधाएँ हैं।
- कंपनी अपने लगभग 60% पुर्जे भारतीय सप्लायरों से लेती है।
- तेलंगाना के मंत्री के अनुसार हैदराबाद में 30 से ज़्यादा स्पेसटेक कंपनियाँ हैं।
बेस 1 असल में क्या करेगा?
बेस 1 में डिज़ाइन, विनिर्माण और संचालन से जुड़ा काम एक ही जगह होगा।
यह भारत का पहला निजी केंद्र है जो सक्रिय अंतरिक्ष मलबा हटाने और सैटेलाइट सर्विसिंग के लिए यह सब एक साथ लाता है।
ऑर्बिटल रेंडेज़वस एंड कैप्चर लैब में इंजीनियर परखेंगे कि एक यान अंतरिक्ष में दूसरी वस्तु के पास कैसे पहुँचकर उसे पकड़ सकता है।
इससे पृथ्वी की कक्षा से बेकार सैटेलाइट हटाने में मदद मिल सकती है।
स्पेस रोबोटिक्स इनोवेशन लैब अंतरिक्ष में वस्तुओं को पकड़ने और संभालने वाले रोबोटिक सिस्टम पर काम करेगी।
एक ISO क्लास 8 क्लीन रूम में नियंत्रित हालात में सैटेलाइट और दूसरे उपकरण जोड़े जाएंगे।
मिशन सिमुलेशन और कंट्रोल सेंटर आगे के मिशन की योजना और प्रबंधन में मदद करेगा।
भारत के लिए यह क्यों मायने रखता है?
बेस 1 सैटेलाइट की मरम्मत और कक्षा में रीफ़्यूलिंग जैसे रखरखाव के काम में भी मदद करेगा। ऐसे काम से सैटेलाइट की कार्यकारी उम्र बढ़ सकती है।
इससे सैटेलाइट बदलने की ज़रूरत कम हो सकती है। यह देश के निजी स्पेस उद्योग के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
तेलंगाना के मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने कहा कि हैदराबाद देश में स्पेस इनोवेशन में आगे है।
उन्होंने यहाँ के एयरोस्पेस और डिफ़ेंस सेक्टर, 52 राष्ट्रीय लैब और 1.5 मिलियन इंजीनियरों के टैलेंट पूल का ज़िक्र किया।
ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से
कंपनी आगे क्या करने की योजना बना रही है?
कॉसमोसर्व स्पेस बेस 1 का इस्तेमाल भारत में और उन्नत तकनीक बनाने के लिए करना चाहती है।
कंपनी स्थानीय विनिर्माण मज़बूत करना और आयातित पुर्जों पर निर्भरता कम करना चाहती है।
इनमें ऑप्टिक्स, एवियोनिक्स और स्पेस-ग्रेड इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम जैसे अहम पुर्जे शामिल हैं।
कंपनी अभी लगभग 60% पुर्जे भारतीय सप्लायरों से लेती है और इस हिस्से को बढ़ाना चाहती है।
संस्थापक और सीईओ डॉ चिरंजीवी फणींद्र ने कहा कि कंपनी ने पहले साल में कई पड़ाव पार किए।
उनके मुताबिक़ कंपनी ने भारतीय रॉकेट पर अपना पहला पेलोड उड़ाया और सीड राउंड में पैसा जुटाया।
कहानी बिज़नेस की
अब तक की कहानी
- शुरुआत: कॉसमोसर्व स्पेस हैदराबाद की एक स्पेस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप है।
- पहला साल: कंपनी का कहना है कि उसने भारतीय रॉकेट पर अपना पहला पेलोड उड़ाया और सीड राउंड में पैसा जुटाया।
- अब: उसने बेस 1 शुरू किया है, जहाँ डिज़ाइन, विनिर्माण और संचालन एक ही जगह होते हैं।
एक सीख
स्थानीय स्तर पर अहम पुर्जे बनाना और सप्लाई चेन की योजना जल्दी बनाना एक नई स्पेस कंपनी को आगे बढ़ने में मदद कर सकता है, क्योंकि यह कंपनी अपने लगभग 60% पुर्जे भारत से लेती है।
आंकड़े
| भारतीय सप्लायरों से लिए गए पुर्जे | लगभग 60% (स्रोत: India.com) |
|---|---|
| हैदराबाद की स्पेसटेक कंपनियाँ | 30 से ज़्यादा (स्रोत: India.com) |
| इंजीनियरों का टैलेंट पूल | 1.5 मिलियन (स्रोत: India.com) |
यह खबरों पर आधारित सामान्य जानकारी है, वित्तीय या निवेश सलाह नहीं।
एग्ज़ाम कॉर्नर
UPSC जीएस पेपर 3 · विज्ञान और तकनीक: अंतरिक्ष क्षेत्र
क्या है खबर
हैदराबाद की स्टार्टअप कॉसमोसर्व स्पेस ने बेस 1 शुरू किया, जो अंतरिक्ष मलबा हटाने और सैटेलाइट सर्विसिंग की निजी सुविधा है। तेलंगाना के मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने इसका उद्घाटन गुरुवार को किया।
पृष्ठभूमि
- अंतरिक्ष मलबा का मतलब है पृथ्वी की कक्षा में छूटे हुए बेकार सैटेलाइट और दूसरी अवांछित वस्तुएँ।
- लेख के मुताबिक़ बेस 1 दुनिया के सिर्फ़ छह ऐसे केंद्रों में शामिल है।
- सैटेलाइट सर्विसिंग में कक्षा में मरम्मत और रीफ़्यूलिंग आती है, जिससे सैटेलाइट की उम्र बढ़ सकती है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- बेस 1 में ISO क्लास 8 क्लीन रूम है, जहाँ सैटेलाइट और अंतरिक्ष उपकरण जोड़े जाते हैं।
- कॉसमोसर्व स्पेस अपने मिशन के लगभग 60% पुर्जे भारतीय सप्लायरों से लेती है।
- तेलंगाना के मंत्री के अनुसार हैदराबाद में 30 से ज़्यादा स्पेसटेक कंपनियाँ हैं।
मेन्स के लिए सामग्री
- महत्व: बेकार सैटेलाइट हटाने की तकनीक कक्षा को सुरक्षित और सैटेलाइट की उम्र बढ़ा सकती है।
- मुख्य मुद्दा: आयातित ऑप्टिक्स, एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों पर निर्भरता कम करनी होगी।
- चुनौतियाँ: अंतरिक्ष में वस्तुओं को पकड़ने और संभालने के लिए सटीक रोबोटिक तकनीक चाहिए।
- आगे का रास्ता: स्थानीय विनिर्माण और अंदरूनी तकनीकी विकास से निजी स्पेस उद्योग मज़बूत हो सकता है।
अभ्यास प्रश्न: भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका पर चर्चा कीजिए, अंतरिक्ष मलबा हटाने और सैटेलाइट सर्विसिंग के संदर्भ में।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
Q1. लेख के अनुसार बेस 1 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- यात्री विमान बनाना
- अंतरिक्ष मलबा हटाना और सैटेलाइट सर्विसिंग करना
- राष्ट्रीय बैंक चलाना
- चंद्रमा से खनिज निकालना
उत्तर देखें
उत्तर: B. लेख में बताया गया है कि बेस 1 में अंतरिक्ष मलबा हटाने और सैटेलाइट सर्विसिंग से जुड़ा काम एक जगह होता है।
Q2. लेख के अनुसार बेस 1 दुनिया में ऐसे कितने केंद्रों में से एक है?
- चार
- दस
- छह
- तीस
उत्तर देखें
उत्तर: C. लेख में कहा गया है कि बेस 1 दुनिया के सिर्फ़ छह ऐसे केंद्रों में शामिल है।
मुख्य शब्द
- अंतरिक्ष मलबा: पृथ्वी की कक्षा में छूटे हुए बेकार सैटेलाइट और दूसरी अवांछित वस्तुएँ।
- सैटेलाइट सर्विसिंग: सैटेलाइट की मरम्मत और रीफ़्यूलिंग जैसे काम, जो कभी कक्षा में भी होते हैं।
- क्लीन रूम: नियंत्रित स्थान, जहाँ धूल और प्रदूषण लगभग न के बराबर रखकर उपकरण बनाए जाते हैं।
परीक्षा की तैयारी के लिए और खबरें: UPSC Today
ये बातें इस खबर की रिपोर्ट से ली गई हैं। परीक्षा से पहले NCERT किताबों और PIB जैसे मानक स्रोतों से ज़रूर मिलाएं।