अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) ने सोमवार को प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) को रद्द करने की मांग की। पार्टी ने सियांग नदी पर बनने वाले इस बांध का विरोध करने पर गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को तुरंत छोड़ने की भी मांग की है। The Sentinel की रिपोर्ट के मुताबिक, कमेटी ने यह बात इटानगर से जारी एक बयान में कही।
एक नज़र में
- APCC ने 11,200 मेगावाट की प्रस्तावित सियांग परियोजना रद्द करने की मांग की।
- पार्टी ने गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की तुरंत रिहाई की मांग रखी।
- सरकारी कर्मचारियों के निलंबन और गांव बूराओं के खिलाफ कार्रवाई पर चिंता जताई गई।
- "Stop SUMP, Save Siang" के नारे के साथ संगठनों से एकजुट होने की अपील की गई।
कांग्रेस ने क्या कहा
अपने बयान में APCC ने कहा कि कोई भी विकास परियोजना स्थानीय मूल समुदायों की पुश्तैनी ज़मीन, पहचान, संस्कृति और आजीविका की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। पार्टी के अनुसार, जिन लोगों पर परियोजना का असर पड़ सकता है, उनकी सहमति बहुत ज़रूरी है।
कांग्रेस ने आदिवासी और स्थानीय संगठनों, छात्र संघों, युवा समूहों, सिविल सोसाइटी संगठनों और पारंपरिक संस्थाओं से अपील की कि वे इस परियोजना के खिलाफ एकजुट हों। इसके लिए पार्टी ने "Stop SUMP, Save Siang" का नारा दिया है।
गिरफ्तारी, निलंबन और केस पर आपत्ति
पार्टी ने परियोजना का विरोध करने वालों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर भी चिंता जताई। उसने प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी, सरकारी कर्मचारियों के निलंबन और गांव बूराओं (गांव के मुखिया) के खिलाफ की गई कार्रवाई का ज़िक्र किया।
APCC ने अपनी मांगें इस तरह रखीं:
- सभी गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए।
- अरुणाचल प्रदेश अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत दर्ज मामले वापस लिए जाएं।
- सरकारी कर्मचारियों के निलंबन के आदेश रद्द किए जाएं।
- गांव बूराओं के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएं।
क्यों अहम है यह मामला
सियांग परियोजना को लेकर विरोध और उस पर हो रही कार्रवाई राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है। कांग्रेस के बयान से साफ है कि वह इसे स्थानीय समुदायों के अधिकारों और सहमति का सवाल मान रही है। रिपोर्ट में सरकार की ओर से इन मांगों पर किसी प्रतिक्रिया या आगे की कार्रवाई का ज़िक्र नहीं है।