तेलंगाना की कांग्रेस सरकार को 30,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित सूखा राहत पैकेज पर केंद्र से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल पाया है। Telangana Today की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और उनके आधे से ज़्यादा मंत्रिमंडल ने तीन दिन दिल्ली में बिताए, लेकिन राज्य की मांग औपचारिक ज्ञापन तक ही सीमित रही।
एक नज़र में
- मुख्यमंत्री और मंत्रियों के तीन दिन के दिल्ली दौरे में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री या संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात नहीं हो सकी।
- तेलंगाना ने 27 अक्टूबर को 365 मंडलों को सूखा प्रभावित घोषित किया, जबकि आंध्र प्रदेश ने 1 अक्टूबर को 388 मंडल घोषित कर दिए थे।
- आंध्र प्रदेश में केंद्रीय टीम इसी सप्ताह आने वाली है, तेलंगाना में अभी कोई टीम नहीं भेजी गई।
- राज्य ने 28 अक्टूबर को केंद्र को सूखे की रिपोर्ट सौंपी, पर ठोस जवाब नहीं मिला।
दिल्ली दौरे में क्या हुआ
रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप मांगने की बात कही थी। लेकिन दोनों में से किसी से भी मुलाकात तय नहीं हो सकी। दिल्ली में मुख्यमंत्री और मंत्री कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए, जबकि सूखा राहत की मांग सिर्फ़ सरकारी चैनलों के ज़रिये आगे बढ़ती रही। रिपोर्ट का कहना है कि इससे सरकार की राजनीतिक छवि और असल उपलब्धि के बीच अंतर दिखता है।
आंध्र प्रदेश से तुलना और राज्य की मांगें
रिपोर्ट में तेलंगाना की तुलना पड़ोसी आंध्र प्रदेश से की गई है। वहां बारिश की कमी ज़्यादा रही और उसने 31 अक्टूबर की समय सीमा से काफ़ी पहले, 1 अक्टूबर को ही 388 मंडलों को सूखा प्रभावित घोषित कर दिया। वहां आकलन के लिए केंद्रीय टीम भेजी गई है और उसका दौरा इसी सप्ताह है।
तेलंगाना ने 365 मंडल 27 अक्टूबर को घोषित किए और अब तक कोई केंद्रीय टीम नहीं आई है। सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी तेलंगाना के 17 प्रतिशत से ज़्यादा रही, जिससे विशेष मदद के दावे पर सवाल उठते हैं।
विधानसभा ने 18 सितंबर को प्रस्ताव पास कर 20,000 करोड़ रुपये की विशेष सहायता, केंद्रीय आकलन टीम और NDRF व SDRF के तहत राहत की मांग की थी। बाद में यह मांग बढ़ाकर 30,000 करोड़ रुपये कर दी गई। राज्य ने 2026-27 के लिए FRBM ढांचे के तहत उधार सीमा GSDP के 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत करने की भी मांग की है।
किसानों के लिए क्या मायने और आगे की स्थिति
सूखे के कारण किसान फसल नुकसान झेल रहे हैं, इसलिए केंद्रीय आकलन और राहत में देरी का सीधा असर उन पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 28 अक्टूबर को उप मुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक हुई। उसमें भरोसा दिया गया कि विपक्ष के सुझावों पर विचार होगा और कार्ययोजना बनेगी। दिल्ली जाने वाला प्रस्तावित सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल फिलहाल सिर्फ़ घोषणा है।
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सरकार का रुख राजनीतिक संदेश पर ज़्यादा और राहत पर कम रहा है, और दिल्ली की मुहिम अभी केंद्र की ठोस प्रतिबद्धता या किसानों के लिए प्रभावी मदद में नहीं बदली है।