सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली के बाज़ारों में पारंपरिक और बिना अनुमति वाले पटाखों की खुली बिक्री पर चिंता जताई। अदालत ने एक दिन पहले ही दिल्ली-NCR में केवल ग्रीन पटाखों की अनुमति दी थी। इसके बावजूद दुकानों पर हर तरह के पटाखे मिलने की बात सामने आई है। कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस से उल्लंघन रोकने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाने को कहा।
एक नज़र में
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पारंपरिक और अनधिकृत पटाखों की खुली बिक्री पर चिंता जताई।
- ग्रीन पटाखे 7 और 8 नवंबर को तय समय में ही चलाए जा सकेंगे।
- अस्पताल, स्कूल जैसी जगहों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाना मना है।
- 9 नवंबर से पटाखों की बिक्री पर पूरी तरह रोक रहेगी।
अदालत ने क्या कहा
जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने Hindustan Times की 3 नवंबर की एक रिपोर्ट का ज़िक्र किया। रिपोर्ट में बताया गया था कि कई बाज़ारों में पटाखे खुलेआम सजाकर बेचे जा रहे हैं। रिपोर्ट में यह आरोप भी था कि मांग पर पारंपरिक पटाखे उपलब्ध कराए जा रहे हैं और संदिग्ध QR कोड वाले पटाखों को ग्रीन पटाखा बताकर बेचा जा रहा है।
पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा, जो केंद्र, दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ओर से पेश हुईं, कि अख़बार में छपी तस्वीर देखी जाए। पीठ के मुताबिक रिपोर्ट में कहा गया है कि बाज़ार में लाइसेंस वाले, बिना लाइसेंस वाले, QR कोड वाले और बिना QR कोड वाले, हर तरह के पटाखे मिल रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इस पर ध्यान दिया जाए और ज़रूरी कदम उठाए जाएं।
ग्रीन पटाखों के लिए क्या हैं नियम
सोमवार, 2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में 7 और 8 नवंबर को तय समय के लिए ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति दी थी। अदालत ने कहा था कि दिवाली का धार्मिक, सामाजिक और भावनात्मक महत्व है, लेकिन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने से त्योहार का मकसद ही कमज़ोर होगा।
- दोनों दिन सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ग्रीन पटाखे चलाए जा सकेंगे।
- अस्पताल, नर्सिंग होम, स्कूल, वृद्धाश्रम और साइलेंस ज़ोन के 300 मीटर के भीतर पटाखे नहीं चलाए जा सकेंगे।
- 9 नवंबर से पटाखों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित होगी।
आगे क्या
कोर्ट ने कहा है कि पटाखे प्रदूषण बढ़ाते हैं और रोक के बावजूद पारंपरिक पटाखे अवैध रूप से बिकते रहे हैं। उसके अनुसार पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय ग्रीन पटाखों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल को नियमों में बांधना बेहतर रास्ता है। ताज़ा टिप्पणी से साफ है कि अदालत का ज़ोर अब नियमों को ज़मीन पर लागू कराने पर है। दिल्ली के लोगों को दिवाली से पहले तय समय और जगहों के नियमों का ध्यान रखना होगा।