कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने सोमवार को आरोप लगाया कि मणिपुर और उत्तराखंड की भाजपा सरकारों में कुशासन, भ्रष्टाचार, जमीन कब्जाने और प्रशासनिक नाकामी बड़े स्तर पर फैली है। The Statesman की रिपोर्ट के मुताबिक उनका दावा है कि दोनों राज्यों में सत्ताधारी पार्टी के प्रति लोगों की नाराजगी साफ दिख रही है।
एक नज़र में
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने दिल्ली में मणिपुर और उत्तराखंड के नेताओं के साथ बैठक की।
- वेणुगोपाल ने भाजपा के शासन मॉडल को "ट्रबल इंजन मॉडल" बताया।
- उत्तराखंड में मंदिरों के नाम पर "चंदा चोरी" का आरोप लगाया गया।
- मणिपुर में हिंसा जारी रहने और भाजपा से लोगों का भरोसा टूटने का दावा किया गया।
दिल्ली में हुई बैठक
वेणुगोपाल के अनुसार, खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नई दिल्ली में दोनों राज्यों के AICC प्रभारियों, प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों और कांग्रेस विधायक दल के नेताओं से मुलाकात की। बैठक में राज्यों की राजनीतिक स्थिति और पार्टी की संगठनात्मक तैयारियों पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वेणुगोपाल ने लिखा कि रविवार को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की "वोट बचाओ, देश बचाओ" रैली में जो गुस्सा दिखा, वह भाजपा शासित राज्यों में फैली सत्ता-विरोधी भावना की सिर्फ एक झलक है। उन्होंने आरोप लगाया कि नफरत, भ्रष्टाचार, जमीन कब्जा और प्रशासनिक कुप्रबंधन इस सरकार की पहचान बन गए हैं।
उत्तराखंड पर क्या कहा गया
उत्तराखंड को लेकर वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राज्य के धार्मिक और प्राकृतिक संसाधनों का फायदा उठा रही है, जबकि आम लोगों के हित की अनदेखी हो रही है। उन्होंने राज्य की पहचान देवभूमि के रूप में बताते हुए कहा कि यहां के पूजनीय मंदिर भी "चंदा चोरी" से अछूते नहीं रहे। उनका आरोप है कि धार्मिक संस्थाओं और जनता के दान का दुरुपयोग किया गया।
उन्होंने इसकी तुलना अयोध्या और अन्य जगहों पर मंदिर से जुड़े चंदे को लेकर लगे आरोपों से भी की। ये सभी बातें कांग्रेस नेता के आरोप हैं। रिपोर्ट में भाजपा की ओर से जवाब का जिक्र नहीं है।
मणिपुर की स्थिति
मणिपुर पर वेणुगोपाल ने खास तौर पर सख्त टिप्पणी की। उनका आरोप है कि सत्ता में बैठे लोगों ने संघर्ष को चलने दिया और अब राज्य के लोगों को शांति बहाल करने की भाजपा की क्षमता पर भरोसा नहीं रहा। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में मणिपुर में भाजपा को लगे झटके का भी जिक्र किया और इसे जनता की नाराजगी का नतीजा बताया।
रिपोर्ट के मुताबिक, मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय हिंसा 3 मई 2023 को शुरू हुई थी। इसमें 300 से ज्यादा लोगों की जान गई है और 60,000 से ज्यादा लोग बेघर हुए हैं। फरवरी 2026 में राष्ट्रपति शासन हटने के बाद मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में भाजपा की नई सरकार बनी, फिर भी हालात अस्थिर बताए गए हैं।
मणिपुर विधानसभा में रखे गए आंकड़ों के अनुसार 31 अगस्त 2026 तक 306 लोग मारे गए थे और 49 लापता थे। रिपोर्ट के अनुसार, बीते सप्ताहांत दो अलग-अलग घटनाओं में पांच कुकी पुरुषों की हत्या की खबर भी आई।