भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाओं का संयुक्त सैन्य अभ्यास AUSTRAHIND 2026 केरल के तिरुवनंतपुरम में पूरा हो गया। Indian Masterminds की रिपोर्ट के मुताबिक, 14 दिन के प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन 30 और 31 अक्टूबर 2026 को हुए 36 घंटे के Joint Validation Exercise के साथ हुआ।
एक नज़र में
- AUSTRAHIND का यह पांचवां संस्करण 19 अक्टूबर से 1 नवंबर तक तिरुवनंतपुरम के Foreign Training Node में हुआ।
- दोनों सेनाओं के लगभग 120-120 जवान इसमें शामिल थे।
- अंतिम अभ्यास जंगल, द्वीप और तटीय माहौल में किया गया।
- पहली बार न्यूज़ीलैंड का पर्यवेक्षक दल भी अभ्यास में मौजूद रहा।
अभ्यास में कौन शामिल था
भारतीय दल में गढ़वाल राइफल्स के जवान और अन्य आर्म्स व सर्विसेज के सैनिक थे। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से उसकी 13 Brigade के जवान शामिल हुए। अभ्यास का मुख्य मकसद दोनों सेनाओं के बीच तालमेल बेहतर करना, साझा सैन्य रणनीति विकसित करना और मुश्किल हालात में साथ मिलकर काम करने की क्षमता बढ़ाना था।
रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम 36 घंटे के अभ्यास में दोनों सेनाओं की संयुक्त ऑपरेशन क्षमता परखी गई। इसमें जंगल, द्वीप और तटीय क्षेत्रों में कई समन्वित गतिविधियां की गईं, जिनसे यह देखा गया कि दोनों सेनाएं कठिन परिस्थितियों में मिशन की योजना बनाकर उसे कितनी अच्छी तरह पूरा कर सकती हैं।
नागरिक एजेंसियों और अन्य बलों की भूमिका
इस अभ्यास में सेना के साथ नागरिक एजेंसियों का सहयोग भी दिखा। भारतीय सेना और ऑस्ट्रेलियन डिफेंस फोर्स ने यह संयुक्त अभ्यास Indian Navy, Indian Air Force, Vizhinjam International Port Authority और Kerala Fire and Rescue Services की मदद से किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इससे थल, जल और वायु अभियानों के बीच तालमेल का उदाहरण सामने आया। साथ ही सुरक्षा अभियानों और आपदा की स्थिति में रक्षा बलों और आपातकालीन सेवाओं के आपसी सहयोग का महत्व भी दिखा।
न्यूज़ीलैंड की पहली भागीदारी और इसका महत्व
अंतिम अभ्यास को भारत और ऑस्ट्रेलिया के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ न्यूज़ीलैंड के एक रक्षा प्रतिनिधि ने भी देखा। पहली बार न्यूज़ीलैंड के पर्यवेक्षक दल की मौजूदगी से अभ्यास को क्षेत्रीय स्तर पर अतिरिक्त पहचान मिली। यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य सहयोग और संचालन में तालमेल को लेकर बढ़ती दिलचस्पी को भी दिखाता है।
रक्षा क्षेत्र पर नज़र रखने वाले पाठकों के लिए यह अभ्यास इसलिए अहम है कि इसमें दोनों देशों के सैनिकों को पेशेवर जानकारी, ऑपरेशनल अनुभव और सैन्य तौर-तरीकों के आदान-प्रदान का मौका मिला। रिपोर्ट के अनुसार, इसका केंद्र भारत-ऑस्ट्रेलिया की interoperability और संयुक्त ऑपरेशनल तैयारी को मजबूत करना था।