हाल के दिनों में बैंकों से पैसे और ग्राहक डेटा गायब होने की कई खबरें आई हैं। Moneylife की रिपोर्ट के मुताबिक इनसे जमाकर्ताओं में बेचैनी है। ग्रेटर नोएडा की एक Punjab National Bank (PNB) शाखा पर किसानों की बचत और FD गायब होने का आरोप है, जबकि SBI और AU Small Finance Bank ने ग्राहकों का डेटा लीक होने की जांच की पुष्टि की है।
एक नज़र में
- PNB की ग्रेटर नोएडा शाखा में एक ऑफिस असिस्टेंट पर 6 अधिकारियों की लॉगिन ID से तीन साल तक पैसे निकालने का आरोप है।
- PNB का अनुमान 10.24 करोड़ रुपये के नुकसान का है, जबकि ग्राहक करीब 35 करोड़ रुपये का दावा कर रहे हैं।
- SBI ने बताया कि 3,897 ग्राहकों के रिकॉर्ड डार्क वेब पर मिले।
- IDFC First Bank ने हरियाणा सरकार के खातों की गड़बड़ी में जांच पूरी होने से पहले ही 583 करोड़ रुपये चुकाए।
PNB शाखा का मामला
बैंक की शिकायत पर CBI ने 29 अक्टूबर को केस दर्ज किया। आरोप है कि बिना अधिकार वाले एक ऑफिस असिस्टेंट ने शाखा अधिकारियों की छह लॉगिन ID इस्तेमाल कर तीन साल तक ग्राहकों के खातों से पैसे निकाले। रिपोर्ट के मुताबिक अलर्ट बंद कर दिए गए, अनजान लोगों को जॉइंट होल्डर बनाया गया, FD समय से पहले तोड़ी गईं और चुकौती का ब्योरा बदला गया। पैसे बैंक से बाहर भेजे गए। विवादित लेन-देन के वाउचर गायब हैं और आरोपी कर्मचारी ने उन्हें नष्ट करना स्वीकार किया है।
बैंक ने तीन दावे निपटाए हैं, जिनकी रकम 43 लाख रुपये है। उसका कहना है कि वह असली दावों का भुगतान करेगा। मामला तब सामने आया जब एक ग्राहक ने पासबुक अपडेट कराई और उसमें ऐसे लेन-देन दिखे जिनकी उसने कभी मंजूरी नहीं दी थी।
डेटा लीक और दूसरे मामले
अक्टूबर में SBI ने स्टॉक एक्सचेंजों को बताया कि शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड डार्क वेब पर मिले, जिनमें पहचान से जुड़ी जानकारी थी। ग्राहकों को यह मीडिया रिपोर्ट से पता चला। Moneylife के अनुसार लीक हुई जानकारी से ठगों की कॉल ज्यादा भरोसेमंद लग सकती है और लोग OTP बता सकते हैं। जुलाई में Bank of Baroda को भी डेटा को लेकर आशंका का सामना करना पड़ा था।
Central Bank of India ने RBI में अपने सेटलमेंट खाते से 13.97 करोड़ रुपये निकाले जाने की जानकारी दी। AU Bank एक थर्ड-पार्टी Salesforce प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध डेटा लीक की जांच कर रहा है, जिसमें वाहन-लोन ग्राहकों की सीमित जानकारी थी। बैंक का कहना है कि उसके अपने सिस्टम प्रभावित नहीं हैं।
IDFC First Bank के मामले में चंडीगढ़ शाखा में हरियाणा सरकार के जमा में गड़बड़ी मिली। बैंक ने 583 करोड़ रुपये (मूलधन और ब्याज) चुकाए, जो मिलान के बाद 645 करोड़ रुपये हो गए। CBI ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है और आरोप-पत्र दाखिल किए हैं। जांचकर्ताओं का आरोप है कि बैंक कर्मचारियों और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से अनधिकृत खातों, फर्जी FD और शेल कंपनियों के जरिए सार्वजनिक पैसा घुमाया गया।
ग्राहकों के लिए क्या मायने
अब ज्यादातर ग्राहक इलेक्ट्रॉनिक स्टेटमेंट पर निर्भर हैं और पासबुक या कागजी रिकॉर्ड कम रखते हैं। ऐसे में अगर एंट्री बदली जा सकती हैं और अलर्ट बंद किए जा सकते हैं, तो ग्राहक कैसे जाने कि बैलेंस सही है? Moneylife का तर्क है कि सिस्टम, रिकॉर्ड और ऑडिट ट्रेल बैंक के पास होते हैं, इसलिए विवादित लेन-देन के सही होने का सबूत देने की जिम्मेदारी भी बैंक की होनी चाहिए। उसके मुताबिक बैंक को ग्राहकों का पैसा जल्दी लौटाना चाहिए, न कि उन्हें लंबी लड़ाई में उलझाना चाहिए।
Hello Banker की रिपोर्ट के अनुसार औचक निरीक्षण में PNB की कुछ शाखाओं में रिकवरी एजेंट, बीमा कर्मचारी और बिजनेस कcorrespondent जैसे बाहरी लोग कैश सेक्शन और शाखा के कंप्यूटर पर काम करते मिले। इसके बाद बैंक ने करीब 20 शाखा प्रमुखों को निलंबित किया। कुछ प्रमुखों ने स्टाफ की भारी कमी का हवाला दिया है।