बिहार में जलाशयों से निकाली गई गाद का उपयोग अब राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने में किया जाएगा। इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और बिहार सरकार ने मंगलवार को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, यह समझौता नई दिल्ली में हुआ।
एक नज़र में
- NHAI और बिहार सरकार के बीच गाद के उपयोग को लेकर MoU हुआ।
- केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में हस्ताक्षर हुए।
- बिहार की राजमार्ग परियोजनाओं के लिए करीब 243 लाख घन मीटर गाद की जरूरत बताई गई है।
- सड़क निर्माण विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
समझौते का उद्देश्य क्या है
बयान के मुताबिक, जलाशयों में गाद जमा होने से पानी इकट्ठा होने की क्षमता और जलप्रवाह की क्षमता कम हो जाती है। इस पहल का मकसद इस कमी को दूर करना है। साथ ही राजमार्ग निर्माण के लिए उपयुक्त मिट्टी और भराव सामग्री की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी। इससे इन परियोजनाओं के लिए खेती की जमीन की मिट्टी पर निर्भरता घटेगी।
गाद कैसे निकाली जाएगी
बताया गया है कि पहले जलाशयों का तकनीकी आकलन किया जाएगा, उसके बाद वैज्ञानिक तरीके से गाद निकाली जाएगी। गाद केवल स्वीकृत स्थानों से और तय तकनीकी सीमाओं के भीतर ही निकाली जा सकेगी। यह भी देखा जाएगा कि इस काम से पारिस्थितिक संतुलन, नदी के तट, तटबंधों, पुलों और दूसरी संरचनाओं को नुकसान न पहुंचे।
समझौते के तहत बिहार सरकार के सड़क निर्माण विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसके अलावा एक राज्यस्तरीय समन्वय समिति परियोजना प्रस्तावों, मंजूरी, क्रियान्वयन और अन्य मुद्दों की समीक्षा करेगी।
परियोजनाओं का दायरा
NHAI के अनुसार, बिहार में जारी और प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए करीब 243 लाख घन मीटर गाद की जरूरत है। राज्य में अभी करीब 58,340 करोड़ रुपये की लागत से 1,561 किलोमीटर लंबाई वाली 39 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
इसके अलावा करीब 1,85,200 करोड़ रुपये के निवेश वाली 1,982 किलोमीटर लंबी 11 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इन सभी परियोजनाओं में मिट्टी और भराव सामग्री की बड़ी जरूरत होती है, जिसमें जलाशयों की गाद का उपयोग किया जा सकेगा।
आम लोगों के लिहाज से देखें तो इस पहल से एक ओर जलाशयों की क्षमता बहाल करने में मदद मिल सकती है, दूसरी ओर सड़क निर्माण के लिए खेतों की मिट्टी पर दबाव कम हो सकता है। अब आगे की प्रक्रिया नोडल एजेंसी और समन्वय समिति की निगरानी में होगी।