चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में समग्र शिक्षा योजना के तहत काम कर रहे शिक्षकों को पिछले दो महीने से वेतन नहीं मिला है। दिवाली का त्योहार इसी सप्ताहांत है और शिक्षकों का कहना है कि जेब खाली होने से घर चलाना मुश्किल हो गया है। Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षकों ने अब आंदोलन की चेतावनी दी है।
एक नज़र में
- समग्र शिक्षा के तहत काम करने वाले 1,000 से ज़्यादा JBT और TGT शिक्षकों को सितंबर और अक्टूबर का वेतन नहीं मिला।
- चंडीगढ़ टीचर्स एसोसिएशन खाली दीयों के साथ शिक्षा सचिव के दफ़्तर तक मार्च निकालेगी।
- 2021 से 2023 के DA के बकाये का भुगतान भी नहीं हुआ है।
- इस साल जनवरी से देय DA भी जारी नहीं हुआ, जबकि नियमित शिक्षकों को मिल चुका है।
क्या है पूरा मामला
चंडीगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के सदस्यों के अनुसार, समग्र शिक्षा के तहत काम कर रहे जूनियर बेसिक टीचर (JBT) और ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (TGT) मिलाकर 1,000 से अधिक हैं। रिपोर्ट में इन शिक्षकों को सितंबर और अक्टूबर 2026 के महीनों का वेतन न मिलने की बात कही गई है। त्योहार के समय वेतन रुकने से इन परिवारों पर खर्च का दबाव बढ़ गया है।
शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि उनके साथ लगातार असंवेदनशील व्यवहार हो रहा है। इसी के विरोध में एसोसिएशन ने खाली दीयों के साथ शिक्षा सचिव के कार्यालय तक मार्च निकालने का फ़ैसला किया है।
DA को लेकर भी नाराज़गी
वेतन के अलावा शिक्षकों का महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी विवाद है। एसोसिएशन का कहना है कि 2021 से 2023 तक के DA का बकाया अब तक नहीं दिया गया, जबकि इस बारे में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का आदेश है।
शिक्षकों का यह भी आरोप है कि इस साल जनवरी से देय DA भी उन्हें जारी नहीं किया गया। उनके मुताबिक यही भत्ता शिक्षा विभाग के नियमित शिक्षकों को दे दिया गया है। इससे समग्र शिक्षा के शिक्षक खुद को अलग नज़र से देखे जाने की शिकायत कर रहे हैं।
अधिकारियों को दी गई जानकारी
एसोसिएशन के पदाधिकारियों में अध्यक्ष सतनाम सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरविंद राणा और महासचिव अजय शर्मा शामिल हैं। उन्होंने बताया कि समग्र शिक्षा और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से कई बार जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला।
रिपोर्ट में मार्च की तारीख या अधिकारियों की ओर से किसी जवाब का ज़िक्र नहीं है। फ़िलहाल शिक्षक वेतन और DA बकाये के भुगतान का इंतज़ार कर रहे हैं, और मांगें न मानी गईं तो उनका विरोध आगे बढ़ सकता है।