महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने उस नियम का प्रस्ताव नहीं दिया था, जिसकी वजह से सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) की कामकाजी प्रक्रिया करीब छह महीने से ठप है। Mint की रिपोर्ट के मुताबिक, सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत मिले जवाब में कमिश्नर कार्यालय ने यह बात कही है। SRTT, टाटा संस की दूसरी सबसे बड़ी शेयरधारक है।
एक नज़र में
- चैरिटी कमिश्नर कार्यालय ने RTI जवाब में कहा कि उसने राज्य के विधि एवं न्याय विभाग को कोई प्रस्ताव नहीं भेजा।
- महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स (संशोधन) अध्यादेश, 2025 एक सितंबर 2025 को जारी हुआ।
- इस नियम के कारण SRTT की बोर्ड कार्यवाही रुकी और टाटा संस में गतिरोध बढ़ा।
- विधि एवं न्याय विभाग ने अध्यादेश के मसौदे की जानकारी देने से फिलहाल इनकार किया।
RTI जवाब में क्या कहा गया
Mint ने RTI के तहत पूछा था कि अध्यादेश को लेकर कमिश्नर की ओर से क्या प्रस्ताव गया। 15 अक्टूबर को मराठी में दिए जवाब में कार्यालय ने कहा कि राज्य के विधि एवं न्याय विभाग को कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया, इसलिए इस बारे में रिकॉर्ड उसके पास नहीं है। सोमवार को ईमेल से भी कार्यालय ने यही बात दोहराई। उसने यह भी जोड़ा कि विचार-विमर्श विधि एवं न्याय विभाग में हुआ था।
अध्यादेश के तहत, जहां ट्रस्ट डीड में स्थायी ट्रस्टियों की नियुक्ति का साफ प्रावधान नहीं है, वहां उनकी संख्या बोर्ड की कुल संख्या के एक-चौथाई तक सीमित कर दी गई। पहले के कानून में ऐसी कोई संख्या तय नहीं थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस नियम को कमिश्नर ने इस साल 15 मई को लागू किया। राज्य विधानमंडल ने दिसंबर 2025 में इसे महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 2025 के रूप में मंजूरी दी।
विशेषज्ञ और सरकार की प्रतिक्रिया
विशेषज्ञों का कहना है कि जिस संस्था को कानून लागू करना होता है, उसके प्रस्ताव के बिना कानून बदलना असामान्य है। Forefront Legal Consulting LLP के पार्टनर गौरव पिंगले के मुताबिक, आमतौर पर किसी कानून या उसके संशोधन में संबंधित नियामक से सलाह ली जाती है, क्योंकि प्रभावी अमल की जिम्मेदारी उसी की होती है। उन्होंने कहा कि संशोधनों में रिपोर्टिंग या खुलासे की शर्तें भी हो सकती हैं, जिनमें नियामक की भूमिका रहती है।
हालांकि रिपोर्ट के अनुसार, चैरिटी कमिश्नर का कार्यालय खुद राज्य के विधि एवं न्याय विभाग के अधीन काम करता है। यह RBI या SEBI जैसे केंद्रीय नियामकों से अलग ढांचा है, जिनके कार्यालय सरकारी मंत्रालयों से बाहर हैं।
अध्यादेश जारी करने वाले विधि एवं न्याय विभाग ने इसके मसौदे से जुड़ी जानकारी देने से मना कर दिया। कैबिनेट प्रस्ताव, हितधारकों के पक्ष और विभागों के बीच पत्राचार मांगे जाने पर विभाग ने कहा कि फाइल पर काम "सरकारी स्तर पर जारी" है और जानकारी "फिलहाल" नहीं दी जा सकती। टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।
टाटा संस पर असर
रिपोर्ट के मुताबिक, इस संशोधन से SRTT की बोर्ड कार्यवाही रुक गई है। इसका असर टाटा संस में गतिरोध के रूप में दिखा है और कंपनी की सालाना आम बैठक (AGM) भी अटक गई है, जिससे नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद का हल मुश्किल हुआ है। 28 अप्रैल को टाटा ट्रस्ट्स के उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन की चैरिटी कमिश्नर से की गई शिकायत के बाद यह संशोधन विवाद के केंद्र में आ गया।