आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट पर ज़्यादातर लोग सो रहे थे जब चक्रवात मुरासु (Murasu) पहुंचा। मंगलवार, 3 नवंबर को रात करीब 1 बजे तूफान ने प्रकाशम ज़िले में ओंगोल के पास तट पार करना शुरू किया। अगले कई घंटों तक नेल्लोर से बापटला तक गांवों, मछुआरा बस्तियों और खेतों पर तेज़ हवा और बारिश की मार पड़ती रही।
एक नज़र में
- चक्रवात मुरासु 3 नवंबर को रात करीब 1 बजे ओंगोल के पास तट से टकराया।
- IMD के मुताबिक हवा की रफ्तार 100 से 110 किमी प्रति घंटा रही, झोंके 120 किमी प्रति घंटा तक।
- शुरुआती घंटों में किसी की मौत की खबर नहीं। करीब 2,000 लोगों को निकाला गया, 30,000 को हटाने की तैयारी।
- बुधवार तक आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा में भारी बारिश की आशंका।
रात में क्या हुआ
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि तूफान रात करीब 1 बजे ओंगोल के पास ज़मीन से टकराया। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में झोंके इससे तेज़ बताए गए, लेकिन आधिकारिक आंकड़े IMD के ही हैं। एक हफ्ते से भी कम समय में आंध्र प्रदेश पर यह दूसरा तूफान है। ज़मीन पहले से गीली थी, नदी-नाले पहले से भरे थे, और जिन परिवारों ने अभी-अभी सफाई की थी, उन पर फिर से मार पड़ी।
अब तक का नुकसान
पेड़, बिजली के खंभे और घर
सबसे ज़्यादा नुकसान प्रकाशम और बापटला ज़िलों में बताया गया है। हज़ारों पेड़ उखड़ गए और सैकड़ों बिजली के खंभे गिर गए, जिससे बड़े इलाके में बिजली गुल है। ओंगोल में कई कच्चे घर ढह गए।
किसान और मछुआरे
किसानों के लिए यह समय बहुत बुरा है। बापटला और प्रकाशम में खड़ी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। तट पर मछली पकड़ने वाली कई नावें भी टूट गईं। यहां कई परिवारों के लिए नाव ही रोज़ी-रोटी का इकलौता साधन है, और उसकी मरम्मत में महीनों लग सकते हैं।
लोगों को कैसे बचाया गया
राज्य सरकार ने पहले से तैयारी की। तूफान आने से पहले निचले और तटीय इलाकों से करीब 2,000 लोगों को निकाला गया, और करीब 30,000 लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने की योजना बनी। कई तटीय ज़िलों में 3 नवंबर को स्कूल-कॉलेज बंद रहे। विजयवाड़ा, तिरुपति और विशाखापत्तनम एयरपोर्ट पर कम से कम 19 घरेलू उड़ानें रद्द हुईं और कई ट्रेनें भी प्रभावित हुईं। इस हफ्ते तटीय आंध्र में सफर करना हो तो घर से निकलने से पहले फ्लाइट या ट्रेन का स्टेटस ज़रूर देखें।
आगे क्या
IMD के अनुमान के मुताबिक तूफान मंगलवार दोपहर तक कमज़ोर होगा और आधी रात तक डीप डिप्रेशन में बदल जाएगा। लेकिन कमज़ोर होने का मतलब खतरा खत्म होना नहीं है। हवा थमने के बाद अक्सर बाढ़ बढ़ती है, जब पहाड़ों का पानी मैदानों की ओर उतरता है।
अगर आप प्रभावित इलाके में हैं
- गिरे हुए बिजली के तारों से दूर रहें, बिजली न भी हो तब भी खंभे न छुएं।
- बहते पानी में पैदल या गाड़ी से न जाएं। घुटने भर पानी भी इंसान को बहा सकता है।
- कुछ दिन उबला या साफ किया हुआ पानी ही पिएं।
- फॉरवर्ड मैसेज नहीं, IMD और ज़िला प्रशासन की जानकारी पर भरोसा करें।
यह तट बार-बार क्यों चपेट में आता है
बंगाल की खाड़ी में अरब सागर से ज़्यादा चक्रवात बनते हैं, और अक्टूबर से दिसंबर इसका सबसे व्यस्त मौसम है। आंध्र प्रदेश ने सालों में चक्रवात शेल्टर और चेतावनी सिस्टम बनाए हैं, इसी वजह से अब ऐसे तूफानों में 1970 और 1990 के दशक जैसी जान की हानि नहीं होती। असली परीक्षा यह होगी कि बिजली कितनी जल्दी लौटती है और मुआवज़ा किसानों और मछुआरा परिवारों तक कितनी ईमानदारी से पहुंचता है।
नुकसान और राहत के आधिकारिक आंकड़े आने पर News Anek यह खबर अपडेट करेगा।