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राजनीति

चुनाव आयोग ने IT विभाग के लिए नया कार्य आवंटन आदेश जारी किया

नया आदेश वह निगरानी फिर से लागू करता है, जिसे पिछला आदेश हटा चुका था। आयोग का कहना है कि पिछला आदेश कभी लागू नहीं हुआ। दो आयुक्तों ने उस पर आपत्ति जताई थी।

New Parliament Building
प्रतीकात्मक फोटो: New Parliament Building. Photo: Narendra Modi / Wikimedia Commons, CC BY 3.0

भारत के चुनाव आयोग ने अपने IT विभाग के लिए नया कार्य आवंटन आदेश जारी किया है।

इसके तहत महानिदेशक (IT) सीमा खन्ना को अपनी फ़ाइलें वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त पवन कुमार शर्मा के ज़रिए भेजनी होंगी।

यह जानकारी द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दी गई है।

एबीपी न्यूज़ के मुताबिक यह आदेश 4 नवंबर की तारीख का है और तुरंत लागू होता है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने कहा कि यह आदेश बुधवार को जारी हुआ।

नया आदेश निगरानी की एक परत फिर से लागू करता है। इससे पहले 28 जुलाई की तारीख वाले आदेश ने इसे हटा दिया था।

उस आदेश में उप चुनाव आयुक्त संजय कुमार से IT का प्रभार लिया गया था, और सीमा खन्ना सीधे पैनल को रिपोर्ट कर सकती थीं।

आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस पर आपत्ति जताई थी।

उनकी आपत्ति के बाद 28 जुलाई वाला आदेश रोक दिया गया, ऐसा द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने बताया।

चुनाव आयोग के IT विभाग के आदेशों की समयरेखा
  1. 28 जुलाईIT का प्रभार संजय कुमार से लिया गया; बाद में दो आयुक्तों की आपत्ति पर इसे रोका गया
  2. 29 जुलाईसंधू और जोशी ने कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखे
  3. 30 जुलाईदोनों आयुक्तों का संयुक्त निर्देश, जिसका आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे में हवाला दिया
  4. 23 सितंबर 2025कार्यालय आदेश, जिसके तहत आंतरिक काम चलता रहा
  5. 4 नवंबरनया आदेश जारी हुआ, जो निगरानी की एक परत फिर से लागू करता है

ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से

एक नज़र में

  • आयोग ने सीमा खन्ना को फ़ाइलें पवन कुमार शर्मा के ज़रिए भेजने का नया आदेश दिया है।
  • नया आदेश 28 जुलाई के आदेश से हटाई गई निगरानी को फिर से लागू करता है।
  • दो आयुक्तों ने आपत्ति जताई, और आयोग कहता है कि 28 जुलाई का आदेश कभी लागू नहीं हुआ।
  • इन फ़ैसलों के सर्वसम्मति से होने पर रिपोर्टों की बातें अलग हैं।

दो आयुक्तों ने आपत्ति क्यों जताई?

संधू और जोशी ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखे।

उनका कहना था कि वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग ने ये आदेश आयोग की मंज़ूरी के बिना जारी किए।

आयोग का पक्ष अलग है। उसका कहना है कि यह पत्र किसी नीति से जुड़ा नहीं था। यह आयोग में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के काम से जुड़ा था।

फ़ैसले कैसे लिए गए, इस पर भी बातें अलग हैं।

एबीपी न्यूज़ के मुताबिक एक आयोग अधिकारी ने NDTV से कहा कि आदेश सर्वसम्मति से लिए गए फ़ैसलों पर आधारित हैं।

आयोग अब क्या कह रहा है?

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में आयोग ने कहा कि 28 जुलाई वाला आदेश कभी लागू नहीं हुआ।

उसने दोनों आयुक्तों के 30 जुलाई के संयुक्त निर्देश का हवाला दिया।

आयोग ने यह भी कहा कि आंतरिक काम 23 सितंबर 2025 के कार्यालय आदेश के तहत चलता रहा।

प्रेस नोट में कहा गया कि IT विभाग पर उप चुनाव आयुक्त की निगरानी कभी वापस नहीं ली गई।

तो इसका असर किस पर पड़ेगा? मामला उस संस्था से जुड़ा है जो देश में चुनाव कराती है। यह विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के सामने है।

समझिए

पहले क्या हुआ

  • 28 जुलाई की तारीख वाले आदेश ने उप चुनाव आयुक्त संजय कुमार से IT का प्रभार वापस ले लिया और DG (IT) को सीधे पैनल को रिपोर्ट करने दिया।
  • 29 जुलाई को सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव को लिखा कि आदेश आयोग की मंज़ूरी के बिना जारी हुए।

यह क्यों अहम है

विवाद इस पर है कि चुनाव आयोग के IT विभाग पर नियंत्रण किसके पास हो, और यह संस्था देश में चुनाव कराती है।

आगे क्या

  • आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 28 जुलाई वाला आदेश कभी लागू नहीं हुआ।
  • स्रोतों में यह नहीं बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर कब फ़ैसला करेगा।

एग्ज़ाम कॉर्नर

UPSC जीएस पेपर 2 · राजनीति: चुनाव आयोग

क्या है खबर

चुनाव आयोग ने IT विभाग पर नया कार्य आवंटन आदेश जारी किया है। इसके तहत IT प्रमुख सीमा खन्ना को फ़ाइलें वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त पवन कुमार शर्मा के ज़रिए भेजनी होंगी।

पृष्ठभूमि

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा आयोग में दो अन्य चुनाव आयुक्त हैं।
  • 28 जुलाई के आदेश ने IT प्रमुख को सीधे पैनल को रिपोर्ट करने दिया था, पर दो आयुक्तों ने आपत्ति जताई।
  • यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है, जहाँ आयोग ने हलफनामा दाखिल किया है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • ज्ञानेश कुमार भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं।
  • चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एक पहले के आदेश पर आपत्ति जताई।
  • आयोग के हलफनामे में दोनों आयुक्तों के 30 जुलाई 2026 के संयुक्त निर्देश का ज़िक्र है।

मेन्स के लिए सामग्री

  1. महत्व: दिखाता है कि एक संवैधानिक संस्था के भीतर नियंत्रण का सवाल सार्वजनिक विवाद बन सकता है।
  2. मुख्य मुद्दा: आयुक्तों के बीच इस पर असहमति कि IT विभाग की निगरानी किसके पास हो।
  3. चुनौतियाँ: आंतरिक विवाद स्वतंत्र चुनाव संस्था की कार्यप्रणाली पर जनता के भरोसे को प्रभावित कर सकते हैं।
  4. आगे की राह: साफ़ और दर्ज नियम, तथा विवाद सुलझाने की उचित संस्थागत प्रक्रिया।

अभ्यास प्रश्न: चुनाव आयोग ऑफ़ इंडिया में स्पष्ट आंतरिक कार्य आवंटन और जवाबदेही की ज़रूरत पर चर्चा कीजिए, हाल के विवाद के संदर्भ में।

प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न

Q1. हाल के विवाद के संदर्भ में किसे मुख्य चुनाव आयुक्त बताया गया है?

  1. पवन कुमार शर्मा
  2. ज्ञानेश कुमार
  3. मनीष गर्ग
  4. संजय कुमार
उत्तर देखें

उत्तर: B. लेख के अनुसार ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जबकि बाकी दो आयुक्त अलग हैं।

Q2. आयुक्त संधू और जोशी ने 29 जुलाई को किसे पत्र लिखा?

  1. सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को
  2. वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त को
  3. कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन को
  4. चुनाव आयोग के प्रेस कार्यालय को
उत्तर देखें

उत्तर: C. लेख में बताया गया है कि दोनों आयुक्तों ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखे।

मुख्य शब्द

  • कार्य आवंटन आदेश: वह आंतरिक आदेश जो तय करता है कि कौन अधिकारी किस काम और फ़ाइल को देखेगा।
  • उप चुनाव आयुक्त: चुनाव आयोग का वरिष्ठ अधिकारी जो उसके विभागों की देखरेख करता है।
  • हलफनामा: शपथ पर लिखा गया लिखित बयान, जिसे अदालत में दाखिल किया जाता है।

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ये बातें इस खबर की रिपोर्ट से ली गई हैं। परीक्षा से पहले NCERT किताबों और PIB जैसे मानक स्रोतों से ज़रूर मिलाएं।


स्रोत