1997 में भारत का टेक्नोलॉजी उद्योग अपने शुरुआती कदम उठा रहा था। अभिषेक रुंगटा के पास एक विचार था और थोड़ी सी रकम।
उन्होंने कोलकाता में सिर्फ ₹50 के शुरुआती निवेश से एक वेब सेवा कारोबार शुरू किया।
लगभग तीन दशक बाद वह छोटी शुरुआत इंडस नेट टेक्नोलॉजीज लिमिटेड, यानी INT., बन चुकी है। आज यह एक टेक्नोलॉजी और डिजिटल कंसल्टिंग कंपनी है।
कंपनी का कहना है कि यह सालाना 150 करोड़ रुपये का राजस्व कमाती है।
ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से
एक नज़र में
- 1997 में कोलकाता में ₹50 के निवेश से शुरुआत हुई।
- वेब डिज़ाइन और सस्ती वेब होस्टिंग से काम शुरू हुआ।
- धीरे-धीरे कई क्षेत्रों की बड़ी कंपनियों के लिए टेक्नोलॉजी का काम होने लगा।
- कंपनी का कहना है कि अब यह सालाना 150 करोड़ रुपये कमाती है।
तो शुरुआत कहां से हुई?
जब रुंगटा ने INT. शुरू की, तब नए उद्यमियों के लिए देश में संसाधन बहुत कम थे। पैसा जुटाना मुश्किल था, और कारोबारी नेटवर्क भी सीमित था।
छोटे टेक्नोलॉजी कारोबार के लिए ग्राहकों का भरोसा जीतना आसान नहीं था।
INT. एक बूटस्ट्रैप्ड कारोबार के रूप में शुरू हुई। कंपनी वेब डिज़ाइन और इंटरनेट से जुड़ी सेवाएं देती थी।
सस्ती वेब होस्टिंग के एक शुरुआती मौके ने कंपनी को मजबूत आधार बनाने में मदद की।
सफर का सबसे कठिन हिस्सा कौन सा था?

शुरुआती पूंजी बहुत कम थी, इसलिए कंपनी को मेहनत पर भरोसा करना पड़ा। ग्राहकों के साथ रिश्ते बनाना और वादे पूरे करना ही आगे की नींव बना।
शुरुआती सालों ने रुंगटा को एक जरूरी सबक भी सिखाया। टेक्नोलॉजी अपने आप में लक्ष्य नहीं थी।
असली ध्यान इस पर था कि ग्राहकों को क्या चाहिए और उसी के हिसाब से सेवाएं बनाई जाएं।
कारोबार में असली बदलाव कब आया?

मांग बढ़ने के साथ INT. धीरे-धीरे ज्यादा जटिल प्रोजेक्ट लेने लगी।
जो शुरुआत वेब सेवाओं से हुई थी, वह बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा, स्वास्थ्य और खुदरा कंपनियों के लिए काम करने वाला कारोबार बन गई।
जैसे-जैसे संगठन सिर्फ ऑनलाइन मौजूदगी से आगे बढ़कर अपने काम को डिजिटल करने लगे, उनकी जरूरतें और जटिल होती गईं।
कंपनी ने एंटरप्राइज़ इंजीनियरिंग और डिजिटल काम में अपनी क्षमता बढ़ाकर इस बदलाव का साथ दिया।
आज कंपनी कहां खड़ी है?

आज कंपनी ने 150 करोड़ रुपये का सालाना राजस्व हासिल कर लिया है।
यह आंकड़ा कोलकाता के एक छोटे कारोबार से एक स्थापित टेक्नोलॉजी उद्यम बनने के लंबे सफर को दिखाता है।
रुंगटा ने कंपनी को इंटरनेट के दौर, एंटरप्राइज़ सॉफ्टवेयर, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक ले जाने में मार्गदर्शन दिया है।
इसकी कहानी आज भी ग्राहक संबंधों, अनुशासित काम और ज़रूरत पड़ने पर बदलने के साहस पर टिकी है।
यह कहानी सबसे पहले तेलंगाना टुडे ने बताई।
कहानी बिज़नेस की
इस सफ़र से 3 सीख
- छोटी शुरुआत करें और पहले ग्राहकों से सीखकर आगे बढ़ें।
- ग्राहकों से मजबूत रिश्ते रखें, क्योंकि भरोसा दोहराए जाने वाले काम और विकास लाता है।
- तकनीक और बाज़ार बदलने पर अपने कारोबार का मॉडल बदलने के लिए तैयार रहें।