गोवा सरकार इसी हफ्ते सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने की तैयारी में है। मकसद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए राजनीतिक आरक्षण का रास्ता साफ करना है। India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने मंगलवार, 3 नवंबर को समाचार एजेंसी PTI को यह जानकारी दी।
एक नज़र में
- गोवा सरकार बॉम्बे हाई कोर्ट के अंतरिम स्टे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करेगी।
- हाई कोर्ट ने जनगणना आयुक्त को ST आबादी का अनुमान अधिसूचित करने से रोका है।
- चार विधानसभा सीटों को ST के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव अनिश्चित हो गया है।
हाई कोर्ट का आदेश क्या है
बॉम्बे हाई कोर्ट की पणजी पीठ ने राज्य में आदिवासी आबादी की पहचान की प्रक्रिया रोक दी है। अदालत ने कहा कि आबादी के आंकड़े 2026 के बाद होने वाली पहली आधिकारिक जनगणना के अलावा किसी और आधार पर तय नहीं किए जा सकते।
जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित एस जमसांदेकर की खंडपीठ ने यह अंतरिम स्टे दिया। पीठ एक याचिका सुन रही थी, जिसमें Readjustment of Representation of Scheduled Tribes in Assembly Constituencies of the State of Goa Act, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। संसद ने यह कानून अगस्त 2025 में पारित किया था और यह अगस्त 2026 में लागू हुआ। इसमें गोवा की ST आबादी तय करने और विधानसभा क्षेत्रों का नए सिरे से निर्धारण करने का प्रावधान है।
अदालत ने किन बातों पर सवाल उठाया
अदालत ने जनगणना आयुक्त के उस फैसले पर सवाल उठाया, जिसमें 2001 की जनगणना के आधार पर माना गया कि गोवा की आबादी में ST का हिस्सा 9.9 प्रतिशत है। आयुक्त ने खुद भी माना था कि उपलब्ध आंकड़ों से मौजूदा आबादी का सही आकलन संभव नहीं है।
पीठ ने यह भी कहा कि कुनबी, गावड़ा और वेलिप समुदायों को जनवरी 2003 में ST सूची में जोड़ा गया था, जबकि 2001 की जनगणना में पूरे गोवा में केवल 566 आदिवासी दर्ज हुए थे।
सरकार की तैयारी और आगे क्या
गोवा के NRI आयुक्त नरेंद्र सावईकर ने PTI को बताया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट से स्टे हटाने का अनुरोध करेगी। SLP बुधवार तक दायर की जाएगी। सावईकर राज्य के उस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे, जो सोमवार को कानूनी विकल्प तलाशने दिल्ली गया था। इसमें विधानसभा अध्यक्ष गणेश गावकर और कला एवं संस्कृति मंत्री रमेश तवडकर भी थे। यह दौरा इस आशंका के बाद हुआ कि हाई कोर्ट का आदेश विधानसभा सीटों के आरक्षण की प्रक्रिया रोक सकता है।
PTI के मुताबिक, गोवा में आदिवासी संगठन और समुदाय के नेता लंबे समय से विधानसभा में राजनीतिक आरक्षण और प्रतिनिधित्व की मांग करते रहे हैं। अब सबकी नज़र सुप्रीम कोर्ट पर है, जिसके फैसले से तय होगा कि 2027 के चुनाव से पहले चार सीटें आरक्षित हो पाएंगी या नहीं।