GST काउंसिल ने टैक्स से जुड़े अपराधों और कार्रवाई के नियमों में बदलाव की सिफारिश की है। बिजनेस टुडे बाज़ार की 2 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, काउंसिल की 57वीं बैठक में सेंट्रल GST एक्ट का सेक्शन 69 हटाने का सुझाव दिया गया। इससे GST कानून के तहत गिरफ्तारी का अधिकार खत्म हो जाएगा। उद्योग संगठन CII ने इन प्रस्तावों का स्वागत किया है।
एक नज़र में
- सेंट्रल GST एक्ट का सेक्शन 69 हटाने की सिफारिश, जिससे गिरफ्तारी का अधिकार खत्म होगा।
- आपराधिक मुकदमा चलाने की रकम सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का प्रस्ताव।
- CII ने फैसलों को अहम संस्थागत सुधार बताया है।
- बदलाव लागू करने के लिए कानून में संशोधन होना बाकी है।
काउंसिल ने क्या सुझाया
सबसे बड़ा प्रस्ताव सेक्शन 69 को हटाने का है। इसके अलावा आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए तय रकम की सीमा को पांच गुना बढ़ाने की सिफारिश की गई है। अभी यह सीमा ₹1 करोड़ है और प्रस्ताव इसे ₹5 करोड़ करने का है।
काउंसिल ने सेक्शन 132 के तहत आने वाले कुछ अपराधों का दायरा सीमित करने की भी बात कही है। साथ ही सजा तय करने में अदालतों को ज्यादा अधिकार देने का सुझाव है। रिपोर्ट के अनुसार ये बदलाव अभी सिफारिश के स्तर पर हैं और इन्हें लागू करने के लिए कानून में जरूरी संशोधन होने बाकी हैं।
CII की प्रतिक्रिया
कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के डायरेक्टर जनरल चंद्रजीत बनर्जी ने इन फैसलों को अहम संस्थागत सुधार बताया। उन्होंने केंद्र सरकार की लीडरशिप और राज्यों के बीच बनी सहमति की सराहना की। उनके मुताबिक, इससे कारोबारियों को नियमों पर ज्यादा स्पष्टता मिलेगी और टैक्स कार्रवाई में उनके अधिकारों का बेहतर ध्यान रखा जा सकेगा। CII ने इसे भरोसे पर आधारित टैक्स सिस्टम की ओर बड़ा कदम कहा है।
CII का कहना है कि इसका मतलब टैक्स चोरी या धोखाधड़ी करने वालों को छूट देना नहीं है। गंभीर मामलों में सख्त आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान बना रहेगा। संगठन के अनुसार, छोटी प्रक्रियागत गलतियों, कारोबार के असली विवादों और जानबूझकर की गई धोखाधड़ी के बीच फर्क करना आसान होगा।
बनर्जी ने यह भी कहा कि भरोसे पर आधारित सिस्टम का मतलब कार्रवाई को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसे ज्यादा सटीक, निष्पक्ष और असरदार बनाना है। उन्होंने कंपनियों से नियमों का पालन करने, सही डॉक्यूमेंटेशन रखने और इंटरनल कंट्रोल मजबूत करने की अपील की।
कारोबारियों पर असर
इन बदलावों से खासकर MSME और पहली बार बिजनेस शुरू करने वाले उद्यमियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। कानूनी खर्च कम हो सकता है। मुकदमों और जांच की वजह से कामकाज में आने वाली रुकावटें और अनिश्चितता भी घट सकती है।
हालांकि CII का मानना है कि सुधारों का पूरा फायदा तभी मिलेगा, जब सभी राज्यों में नए नियम एक समान और सही तरीके से लागू किए जाएं। कारोबारियों को अब कानून में संशोधन की प्रक्रिया पर नज़र रखनी होगी, क्योंकि उसके बाद ही ये बदलाव असल में लागू होंगे।