हरियाणा हाईकोर्ट ने तकनीकी शिक्षा विभाग के फोरमैन इंस्ट्रक्टरों की तबादला सूची पर उठी आपत्तियों के मामले में राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों ने ऑनलाइन तबादला नीति के तहत बनी प्रक्रिया को चुनौती दी थी। अदालत ने उनके मांगपत्र पर चार सप्ताह के भीतर कारण सहित आदेश पारित करने को कहा है।
एक नज़र में
- जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने सरकार को मांगपत्र पर चार सप्ताह में कारण सहित आदेश देने को कहा।
- आदेश से पहले कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका देना होगा।
- कर्मचारियों के मुताबिक फोरमैन इंस्ट्रक्टरों के कुल स्वीकृत पद 66 हैं, जबकि सीमा 80 की है।
- अदालत ने तबादला नीति रद नहीं की और याचिका का निपटारा कर दिया।
क्या है कर्मचारियों की आपत्ति
याचिकाकर्ता वर्कशॉप इंस्ट्रक्टर से पदोन्नत होकर फोरमैन इंस्ट्रक्टर बने हैं। विकास कुमार और अन्य याचिकाकर्ताओं के अनुसार, वे वेल्डर और इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में वर्कशॉप इंस्ट्रक्टर थे और 14 जुलाई 2026 को पदोन्नति के बाद फोरमैन इंस्ट्रक्टर बनाए गए।
उनका कहना है कि तबादला नीति के दिशा-निर्देशों में किसी ट्रेड या विषय के संवर्ग को प्रक्रिया में शामिल करने के लिए 80 से अधिक स्वीकृत पद होना जरूरी है। वर्कशॉप इंस्ट्रक्टरों को पदों की संख्या कम होने के कारण प्रक्रिया से बाहर रखा गया था, लेकिन फोरमैन इंस्ट्रक्टरों के अलग-अलग ट्रेड को मिलाकर तबादला सूची में शामिल किया गया।
आरटीआई से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कर्मचारियों ने कहा कि सभी ट्रेड मिलाकर भी फोरमैन इंस्ट्रक्टरों के स्वीकृत पद 66 ही हैं। उनका आरोप है कि विभाग की अस्थायी सूची में केवल 50 कर्मचारियों के नाम हैं, जबकि समान स्थिति वाले कुछ कर्मचारी सूची से बाहर हैं। कुछ कर्मचारियों की सेवा अवधि की गणना में गड़बड़ी का दावा भी किया गया।
2025 का पुराना मामला
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि 2025 में भी सरकार ने अलग-अलग ट्रेड के वर्कशॉप इंस्ट्रक्टरों को मिलाकर तबादला प्रक्रिया में शामिल करने की कोशिश की थी। जयबीर सिंह एवं अन्य बनाम हरियाणा सरकार मामले में इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इसके बाद सरकार ने 25 फरवरी और 31 मार्च 2025 को निर्णय लेकर वर्कशॉप इंस्ट्रक्टरों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया था।
अदालत ने क्या कहा और आगे क्या
कर्मचारियों ने 15 सितंबर 2026 को विभाग को मांगपत्र दिया था, लेकिन उस पर निर्णय नहीं हुआ और तबादला प्रक्रिया आगे बढ़ती रही। सुनवाई में सरकार के वकील ने समयबद्ध निर्णय की मांग पर आपत्ति नहीं जताई।
हाईकोर्ट ने कहा कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद चार सप्ताह की समयसीमा लागू होगी। अगर कर्मचारी मांगी गई राहत के हकदार पाए जाते हैं, तो उन्हें इसका लाभ तत्काल दिया जाए। इसी निर्देश के साथ याचिका का निपटारा कर दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने तबादला नीति को रद नहीं किया है। उसने सरकार से सिर्फ इतना कहा है कि कर्मचारियों की आपत्तियों पर नियमों के मुताबिक फैसला लिया जाए। अब सबकी नजर सरकार के आदेश पर रहेगी।