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कहानी बिज़नेस की

कश्मीर की एक टीचर ने अपने घर की रसोई से कैटरिंग का कारोबार कैसे खड़ा किया

48 की उम्र में रुक्साना बेगम ने उन्नीस साल का टीचिंग करियर छोड़कर टिफिन सर्विस शुरू की। उनका घर का बना खाना अब अस्पतालों, बैंकों, दफ्तरों और स्कूलों तक पहुंच गया है।

A small home kitchen in Kashmir at dawn, steel tiffin boxes stacked on a wooden shelf, steam rising from a copper pot, soft morning light through a window, a woman seen from behind stirring
AI चित्रण

कश्मीर में लगभग उन्नीस साल तक रुक्साना बेगम ने पढ़ाया। फिर 48 की उम्र में उन्होंने ऐसा फैसला लिया, जिससे उनके आसपास के कई लोग हैरान रह गए।

उन्होंने खाना बनाकर कमाने का रास्ता चुना।

उनकी कहानी हिम्मत, धैर्य और एक घर की रसोई की है, जो आगे चलकर कुछ बड़ा बन गई।

एक नज़र में

  • रुक्साना ने 2019 में 48 की उम्र में घर बत्ती फूड सर्विस शुरू की।
  • टिफिन सर्विस शुरू करने से पहले उन्होंने लगभग 19 साल टीचिंग की।
  • आज वह हर महीने करीब 10 से 12 इवेंट में खाना बनाती हैं।
  • उनके ग्राहकों में अब अस्पताल, बैंक, दफ्तर और स्कूल शामिल हैं।

तो शुरुआत कहां से हुई?

रुक्साना ने 2019 में यह काम शुरू किया, और इसके लिए उन्हें उनके बच्चों ने प्रोत्साहित किया। उन्होंने इसका नाम घर बत्ती रखा।

"घर" का मतलब होता है घर, और "बत्ती" कश्मीरी में चावल को कहते हैं। वह चाहती थीं कि घर का बना खाना इस कारोबार के केंद्र में रहे।

उन्हें किराए की दुकान या बड़े कर्ज़ की ज़रूरत नहीं पड़ी। उनका गैस चूल्हा, उनके मसाले और उनके घंटों की मेहनत ही उनका पहला निवेश बने।

सफर का सबसे मुश्किल हिस्सा कौन सा था?

A quiet Kashmir kitchen late at night, gas burner glowing, bags of spices and ingredients on a counter, a woman's hands visible at work over a pot, tired but focused atmosphere.
AI चित्रण

शुरू में लगभग सब कुछ वह खुद संभालती थीं, और उनके पिता उनकी मदद करते थे। जैसे-जैसे ऑर्डर बढ़े, पूरा परिवार साथ आ गया।

टिफिन का मॉडल थकाने वाला था। हर सुबह और शाम डिलीवरी में काफी समय लगता था, और मुनाफा कम था।

अलग-अलग ऑर्डर की कीमत 100 रुपये से कम से लेकर 2,000 रुपये तक थी।

बड़े फैसले के बाद क्या बदला?

A busy catering setup in a Kashmiri courtyard, rows of covered serving dishes on long tables, family members carrying food trays in the background seen from a distance, warm afternoon light.
AI चित्रण

लगभग एक साल टिफिन सर्विस चलाने के बाद वह कैटरिंग की ओर बढ़ीं। रोज़ की डिलीवरी की जगह उन्होंने इवेंट और बड़े आयोजनों के ऑर्डर लेना शुरू किया।

जिन लोगों ने पहले उनका खाना चखा था, उन्होंने उनसे बड़े मौकों के लिए खाना बनाने को कहा।

उसी भरोसे ने वह रास्ता खोला, जिस पर आज उनका कारोबार चल रहा है।

आज वह कहां खड़ी हैं?

A bright event hall in Kashmir with a neat buffet of traditional dishes, guests seen from behind at a distance, decorated trays and copper vessels, a calm, proud feeling.
AI चित्रण

घर बत्ती अब हर महीने करीब 10 से 12 इवेंट में खाना देता है।

घर बत्ती का सफर: टिफिन से कैटरिंग तक
  1. 2019रुक्साना ने घर बत्ती नाम से टिफिन सर्विस शुरू की
  2. लगभग एक साल बादटिफिन से कैटरिंग की ओर बढ़ीं और इवेंट के ऑर्डर लेने लगीं
  3. आजघर बत्ती हर महीने करीब 10 से 12 इवेंट में खाना देता है

ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से

इसके मेन्यू में रोगन जोश, दम पोलाव और मिर्च कोरमा जैसे कश्मीरी पकवान हैं, और पालक पनीर व चिकन 65 जैसे व्यंजन भी।

रुक्साना कहती हैं कि जब धैर्य आपके काम का मार्गदर्शन करता है, तो उम्र सिर्फ एक संख्या है।

उनकी यात्रा बताती है कि एक नई शुरुआत घर की रसोई से भी हो सकती है।

यह कहानी सबसे पहले द डेली जागरण ने बताई।

कहानी बिज़नेस की

इस सफ़र से 3 सीख

  1. पैसे खर्च करने से पहले अपने पास मौजूद संसाधन, जैसे रसोई और समय, का इस्तेमाल करें।
  2. खुश ग्राहक आपका सबसे अच्छा प्रचार बनते हैं, क्योंकि पुराने मेहमानों ने ही बड़े आयोजनों के लिए उनसे खाना बनवाया।
  3. धैर्य रखें, क्योंकि उम्र कोई सीमा नहीं है जब आप अपने लक्ष्य की ओर लगातार काम करते रहें।

स्रोत

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