6 नवंबर 2026 देश की खबरें 1 मिनट में। साफ़, जांची-परखी, स्रोत के साथ। 👤 साइन इन मेरी फीड टूल्स English Instagram Facebook X
कहानी बिज़नेस की

मुंबई की एक माँ ने ऐसा मंच बनाया जो न्यूरोडाइवर्स कलाकारों की कला को उत्पादों में बदलता है

श्वेता रुनवाल ने बेटी धृति को चित्रों से बात करते देखा, तो टिकल योर आर्ट शुरू किया। यह सामाजिक उद्यम अब 25 से ज़्यादा न्यूरोडाइवर्स कलाकारों के काम को उत्पादों, रोज़गार और पहचान तक ले जाता है।

A cluttered home studio in Mumbai with paint jars, loose paper sheets and a window with soft morning light, seen from the doorway.
AI चित्रण

कई साल पहले एक छोटी बच्ची स्कूल से डायरी लेकर घर लौटी। उसके एक पन्ने पर दो स्टिक फिगर बने थे। उनमें से एक रो रहा था।

उसकी माँ श्वेता रुनवाल ने पूछा कि क्या हुआ है। बेटी धृति ने समझाने की कोशिश की कि उसकी सहेली दूसरे शहर जा रही है।

श्वेता के लिए यह पहला साफ़ संकेत था कि धृति कला के ज़रिए बात करना चाहती है।

एक नज़र में

  • धृति रुनवाल को डाउन सिंड्रोम है, और कला उसकी भावनाएं व्यक्त करने का ज़रिया बनी।
  • श्वेता रुनवाल ने मुंबई में सामाजिक उद्यम टिकल योर आर्ट शुरू किया।
  • यह संस्था 25 से ज़्यादा न्यूरोडाइवर्स कलाकारों के साथ काम करती है।
  • उनकी कलाकृतियां जीवनशैली उत्पादों, किताबों और कॉर्पोरेट गिफ्ट में बदलती हैं।

तो शुरुआत कहां से हुई?

धृति के जन्म के कुछ दिन बाद उसे डाउन सिंड्रोम की पहचान हुई। दो महीने की उम्र में डॉक्टरों ने दिल में एक छेद भी पाया और सर्जरी की सलाह दी।

श्वेता ने देखा कि लोग उनकी बेटी को पहले उसकी बीमारी से पहचानते थे।

सवाल उठते थे कि वह चल पाएगी या नहीं, बोल पाएगी या नहीं, और क्या उसका कोई करियर होगा।

इस सफ़र का सबसे कठिन हिस्सा कौन सा था?

A small clinic waiting room in India with worn wooden benches and a shadowed corridor, a parent's back visible at a distance.
AI चित्रण

श्वेता बताती हैं कि तब माता-पिता के लिए जानकारी पाने या दूसरे परिवारों से जुड़ने के रास्ते कम थे।

बातचीत अक्सर इस पर होती थी कि बच्चा क्या नहीं कर पाएगा।

उनके अपने माता-पिता का नज़रिया अलग था। उन्होंने कहा कि धृति को किसी और बच्चे की तरह ही पालो, और यही भरोसा श्वेता का सबसे बड़ा सहारा बना।

इस सफ़र की दिशा किस मोड़ पर बदली?

A quiet studio table with brushes, colour swatches and a half-finished painting under warm lamplight, hands partly visible from the side.
AI चित्रण

श्वेता ने आर्किटेक्चर की पढ़ाई की थी और लंदन में काम किया था, जहां उन्होंने देखा कि कला और डिज़ाइन विचार व्यक्त करने का कितना असरदार ज़रिया हो सकते हैं।

उन्होंने डाउन सिंड्रोम फेडरेशन ऑफ इंडिया के साथ स्वयंसेवा शुरू की और और परिवारों से मिलने लगीं।

उनके मन में एक नया सवाल आया। अगर शुरुआत इस बात से हो कि ये बच्चे क्या कर सकते हैं? इसी सवाल से टिकल योर आर्ट का विचार निकला।

आज यह कहानी कहां खड़ी है?

A bright workshop with stacked product boxes and framed artworks on shelves, a worker's back visible at a distance.
AI चित्रण

आज टिकल योर आर्ट डाउन सिंड्रोम और बौद्धिक अक्षमता वाले 25 से ज़्यादा कलाकारों के साथ काम करता है।

उनकी मूल कलाकृतियां जीवनशैली उत्पादों, किताबों, कॉर्पोरेट गिफ्ट और दूसरी चीज़ों में बदली जाती हैं।

श्वेता के लिए यह काम पहचान और स्वतंत्रता के बारे में है।

यह सफ़र दो आकृतियों वाली एक छोटी सी ड्रॉइंग से शुरू हुआ, और एक माँ के उसे ध्यान से देखने के फैसले से।

यह कहानी सबसे पहले द बेटर इंडिया ने बताई।

कहानी बिज़नेस की

इस सफ़र से 3 सीख

  1. व्यक्ति क्या कर सकता है, इससे शुरू करें, क्या नहीं कर सकता, इससे नहीं।
  2. सीमित शब्दों में भी लोग कैसे संवाद करते हैं, इस पर ध्यान दें।
  3. अपने निजी अनुभव को ऐसी सेवा में बदलें जो दूसरे परिवारों की मदद करे।

स्रोत

कहानी बिज़नेस कीस्टार्टअप

हम कैसे रिपोर्ट करते हैं। News Anek की हर खबर कम से कम दो भरोसेमंद स्रोतों से जांची जाती है, और हम उन स्रोतों के नाम देते हैं। कोई गलती दिखी? contact@newsanek.com पर लिखें, और हमारी सुधार नीति व संपादकीय नीति पढ़ें।