भारत और डेनमार्क ने समुद्री क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मज़बूत करने की बात दोहराई है। India Shipping News की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) में स्थित APM Terminals में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई। इसमें ग्रीन शिपिंग, समुद्री डीकार्बोनाइज़ेशन और वैश्विक समुद्री क्षेत्र के टिकाऊ विकास पर ख़ास ध्यान रहा।
एक नज़र में
- डायरेक्टर जनरल ऑफ मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन (DGMA) श्याम जगन्नाथन ने डेनमार्क के बिज़नेस और कॉम्पिटिटिवनेस मंत्री मार्टिन लिडेगार्ड से द्विपक्षीय बैठक की।
- चर्चा में वैकल्पिक समुद्री ईंधन, नाविकों का प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट भी शामिल रहे।
- शिपबिल्डिंग, समुद्री तकनीक, टिकाऊ शिप रीसाइक्लिंग और नियमों में सहयोग पर भी बात हुई।
- दोनों पक्षों ने मौजूदा साझेदारी को ठोस नतीजों में बदलने पर ज़ोर दिया।
बैठक में कौन-कौन शामिल था
डेनमार्क के प्रतिनिधिमंडल में भारत में डेनमार्क के राजदूत रासमुस अबिल्डगार्ड क्रिस्टेनसेन और डिप्टी पर्मानेंट सेक्रेटरी टीने नील्सन हर्ट्ज़ शामिल थे। इनके साथ प्रतिनिधिमंडल के वरिष्ठ अधिकारी तथा APM Terminals और Mærsk के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
भारत की ओर से चीफ सर्वेयर के. एम. राव, मुंबई के मर्केंटाइल मरीन डिपार्टमेंट (MMD) के प्रिंसिपल ऑफिसर कैप्टन एस. दारोकर, चीफ शिप सर्वेयर प्रदीप सुधाकर, डिप्टी डायरेक्टर जनरल (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) दीपेंद्र सिंह बिसेन और प्रवीण कुमार रॉय बैठक में शामिल हुए।
किन मुद्दों पर हुई बात
रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत कई प्राथमिक क्षेत्रों पर केंद्रित रही। इनमें ग्रीन शिपिंग, समुद्री डीकार्बोनाइज़ेशन, वैकल्पिक समुद्री ईंधन अपनाना, नाविकों की ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट, शिपबिल्डिंग और समुद्री तकनीक, टिकाऊ शिप रीसाइक्लिंग और नियामक सहयोग शामिल हैं। दोनों पक्षों ने देखा कि अपनी-अपनी विशेषज्ञता और तकनीकी ताक़त का इस्तेमाल करके समुद्री उद्योग को साफ़-सुथरा, ज़्यादा कुशल और मज़बूत बनाने की दिशा में कैसे तेज़ी से बढ़ा जा सकता है।
बैठक में इस बात पर ख़ास ज़ोर रहा कि व्यावहारिक पहल आगे बढ़ाई जाएं और तकनीकी सहयोग मज़बूत हो, ताकि दोनों देशों की मौजूदा साझेदारी ठोस नतीजे दे सके। वैकल्पिक ईंधन, समुद्री इनोवेशन और क्षमता निर्माण (capacity building) में सहयोग से शिपिंग उद्योग की बदलती ज़रूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद जताई गई।
नाविकों के लिए क्यों अहम
नाविकों के नज़रिये से सबसे अहम मुद्दा ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट है। जैसे-जैसे उद्योग वैकल्पिक ईंधन और नई तकनीकों की ओर बढ़ेगा, जहाज़ों पर काम करने वालों के लिए नए कौशल की ज़रूरत भी बढ़ेगी। स्रोत में ट्रेनिंग के किसी ख़ास कार्यक्रम या समय-सीमा का ज़िक्र नहीं है, लेकिन इस विषय का एजेंडा में शामिल होना अहम माना जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत और डेनमार्क के बीच समुद्री मामलों, क्लीन टेक्नोलॉजी और टिकाऊ विकास में पहले से मज़बूत सहयोग है। यह बैठक उसी साझेदारी को आगे बढ़ाने और वैश्विक समुद्री क्षेत्र की नई चुनौतियों व अवसरों से निपटने की प्रतिबद्धता को दोहराती है। आगे किन परियोजनाओं या समझौतों पर काम होगा, इसकी जानकारी फ़िलहाल स्रोत में नहीं दी गई है।