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अप्रैल 2024 की हीटवेव से भारत में 8,830 अतिरिक्त समय-पूर्व जन्म: रिपोर्ट

Zero Carbon Analytics के विश्लेषण के मुताबिक अप्रैल 2024 की हीटवेव भारत में करीब 8,830 अतिरिक्त प्रीटर्म जन्मों से जुड़ी थी।

अप्रैल 2024 की हीटवेव से भारत में 8,830 अतिरिक्त समय-पूर्व जन्म: रिपोर्ट
प्रतीकात्मक फोटो। फोटो: Sumita Roy Dutta / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

अप्रैल 2024 में भारत में पड़ी हीटवेव करीब 8,830 अतिरिक्त प्रीटर्म यानी समय से पहले हुए जन्मों से जुड़ी थी। यह अनुमान अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी शोध संस्था Zero Carbon Analytics के विश्लेषण में सामने आया है। Urban Acres की रिपोर्ट के मुताबिक यह नतीजा दिखाता है कि गर्मी सिर्फ बाहर काम करने वालों के लिए परेशानी नहीं है, बल्कि गर्भावस्था और नवजात की सुरक्षा पर भी असर डाल सकती है।

एक नज़र में

  • विश्लेषण के अनुसार इंसानी गतिविधियों से हुए जलवायु परिवर्तन ने इस हीटवेव की संभावना कम से कम 45 गुना बढ़ा दी।
  • भारत में अतिरिक्त प्रीटर्म जन्मों का करीब दो-तिहाई हिस्सा बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड से था।
  • भारत में प्रीटर्म जन्मों में बढ़ोतरी 3.6% रही, बांग्लादेश में 11.9% और फिलीपींस में 10%।
  • यह आबादी के स्तर का अनुमान है, किसी एक मामले का क्लिनिकल निदान नहीं।

आंकड़े क्या कहते हैं

भारत, बांग्लादेश और फिलीपींस को मिलाकर हीटवेव 10,600 अतिरिक्त प्रीटर्म जन्मों से जुड़ी पाई गई। इसमें जलवायु परिवर्तन से जुड़ा हिस्सा अलग से आंका गया है। अगर सामान्य अप्रैल की गर्मी का असर भी जोड़ा जाए, तो पूरी हीटवेव से करीब 16,150 ज्यादा प्रीटर्म जन्म हुए, यानी हाल के दशकों के सामान्य अप्रैल के मुकाबले इतने अधिक। जलवायु परिवर्तन वाला अनुमान कुल बोझ से छोटा है, लेकिन यह जोखिम के उस हिस्से को दिखाता है जो बदलते मौसम से जुड़ा है।

प्रीटर्म जन्म का मतलब है गर्भ के 37 हफ्ते पूरे होने से पहले बच्चे का पैदा होना। दुनिया भर में नवजात मौतों का यह सबसे बड़ा कारण है। समय से पहले जन्मे बच्चों में आगे चलकर स्वास्थ्य और विकास संबंधी दिक्कतों का खतरा भी ज्यादा रहता है।

स्वास्थ्य तंत्र के लिए क्या मायने

रिपोर्ट के मुताबिक जोखिम हर जगह एक जैसा नहीं है। चार राज्यों में अतिरिक्त मामलों का बड़ा हिस्सा केंद्रित होने से पता चलता है कि हीट-हेल्थ उपाय बनाते समय केवल राष्ट्रीय औसत देखना काफी नहीं। देशव्यापी तापमान अलर्ट उपयोगी हो सकता है, पर गर्मी का असर और उससे निपटने की क्षमता राज्यों और समुदायों में काफी अलग हो सकती है।

भारत में प्रतिशत बढ़ोतरी बांग्लादेश और फिलीपींस से कम है, लेकिन आबादी ज्यादा होने के कारण कुल संख्या बड़ी हो सकती है। इसलिए योजना बनाते समय दर और आबादी, दोनों को देखना जरूरी है।

सायन अस्पताल (BMC संचालित) के स्त्री रोग विभाग के प्रमुख डॉ. अरुण नायक के अनुसार अत्यधिक गर्मी से गर्भवती महिलाओं में डिहाइड्रेशन या तनाव हो सकता है। इससे कुछ हॉर्मोन निकलते हैं, जो समय से पहले प्रसव की आशंका बढ़ा सकते हैं।

रिपोर्ट यह भी कहती है कि महिलाएं घर, सार्वजनिक परिवहन, कार्यस्थल, अनौपचारिक बस्तियों या अस्पताल जाते समय गर्मी के संपर्क में आ सकती हैं। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि मौजूदा साक्ष्य यह साबित नहीं करते कि हर अतिरिक्त प्रीटर्म जन्म किसी एक गर्मी के संपर्क से ही हुआ। इसे योजना का संकेत माना जाना चाहिए। सरकारी एजेंसियों के लिए ऐसे आंकड़े इसलिए काम के हैं कि इनसे तय हो सकता है कि निगरानी, संचार और चिकित्सा तैयारी कहां मजबूत करनी है।


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