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टेक

भारत का 23 अरब डॉलर का सेमीकंडक्टर अभियान बड़ी बाधाओं का सामना कर रहा है

कुछ प्लांट अभी बन रहे हैं और कुछ में उत्पादन शुरू हो चुका है। लेकिन भारत की पहले की चिप परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ सकी थीं।

123Net Data Center (DC2)
प्रतीकात्मक फोटो: 123Net Data Center (DC2). Photo: 123net / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0

भारत ने सेमीकंडक्टर उद्योग खड़ा करने के लिए लगभग 23 अरब डॉलर अलग रखे हैं।

सरकार को उम्मीद है कि इससे कुशल नौकरियां बनेंगी और आपूर्ति श्रृंखला मज़बूत होगी।

इसके साथ ही विदेशी टेक कंपनियों के लिए चीन के अलावा एक और विकल्प बनाने की कोशिश है।

यह जानकारी Analytics Insight ने एक Wall Street Journal की रिपोर्ट के हवाले से दी है।

एक नज़र में

  • रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने लगभग एक दर्जन चिप परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है।
  • सबसे बड़ा प्रोजेक्ट गुजरात में 11 अरब डॉलर का वेफर प्लांट है, जिसका काम 2028 में शुरू होने की उम्मीद है।
  • भारत में पहले की चिप परियोजनाएं विफल रहीं, और कारोबारी बाधाएं अब भी बनी हुई हैं।

पहले की कोशिशें क्यों नहीं चल पाईं?

भारत ने 1950 के दशक में सार्वजनिक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र बनाना शुरू किया था। सेमीकंडक्टर से जुड़े प्रयास शुरुआती प्रगति के बाद धीमे पड़ गए।

बाद में निजी निवेश की योजनाएं भी ठोस रूप नहीं ले सकीं। 2006 में हैदराबाद के पास एक चिप परियोजना की घोषणा हुई थी।

इसमें एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज़ से 50 करोड़ डॉलर आने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

2014 में घोषित दो फैब्रिकेशन प्लांट भी आगे नहीं बढ़ सके।

भारत के सेमीकंडक्टर प्रयासों की प्रमुख घटनाएं
  1. 1950 का दशकसार्वजनिक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र बनाना शुरू हुआ; शुरुआती प्रगति के बाद सेमीकंडक्टर प्रयास धीमे पड़े
  2. 2006हैदराबाद के पास चिप परियोजना की घोषणा; इसमें 50 करोड़ डॉलर आने की उम्मीद थी, जो नहीं आए
  3. 2014घोषित दो फैब्रिकेशन प्लांट आगे नहीं बढ़ सके
  4. 2027असम के एक प्लांट से व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है

ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से

प्रणय कोटस्थाने और अभिराम मांची ने 2023 की अपनी किताब में इन नाकामियों को कारोबारी माहौल से जोड़ा।

उन्होंने अस्थिर नीतियां, टैक्स की अनिश्चितता, कमज़ोर इन्फ्रास्ट्रक्चर और व्यापार की बाधाओं को मुख्य कारण बताया।

अभी क्या बन रहा है, और कहां?

सबसे बड़ा प्रोजेक्ट गुजरात में वेफर फैब्रिकेशन प्लांट है। इसका निवेश 11 अरब डॉलर का है।

इसे टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की Powerchip Semiconductor Manufacturing Corp. विकसित कर रही हैं।

यह प्लांट 90 नैनोमीटर चिप बनाने की योजना रखता है। ये पुरानी पीढ़ी की चिप हैं, जो कार, फोन और पावर उपकरणों में इस्तेमाल होती हैं।

ये वे उन्नत प्रोसेसर नहीं हैं जो अमेरिका और चीन की टेक प्रतिस्पर्धा के केंद्र में हैं।

कुछ परियोजनाएं असेंबली और टेस्टिंग पर केंद्रित हैं। असम के एक प्लांट से 2027 में व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

गुजरात का एक और प्लांट उत्पादन शुरू कर चुका है। इन कामों में उन्नत चिप बनाने से ज़्यादा मज़दूरों की ज़रूरत होती है।

तो क्या भारत एक टिकाऊ उद्योग बना पाएगा?

टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और किताब Chip War के लेखक क्रिस मिलर का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां चीन के बाहर उत्पादन की जगह खोज रही हैं।

उन्होंने भारत के डिज़ाइन टैलेंट, सरकारी समर्थन और बड़े बाज़ार को फायदे बताया।

तमिलनाडु में मोबाइल फोन असेंबली भी एक शुरुआती आधार हो सकती है। मिलर के मुताबिक पहले कम जटिल काम से शुरुआत करना एक व्यावहारिक रास्ता हो सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिप्स को अपनी सरकार की प्राथमिकता बनाया है। उन्होंने Semicon India सम्मेलन के सभी पांच संस्करणों का उद्घाटन किया है।

राज्य सरकारों ने भी अपने प्रोत्साहन दिए हैं, लेकिन सवाल बना हुआ है। क्या ये प्रयास एक टिकाऊ उद्योग में बदल पाएंगे?

एग्ज़ाम कॉर्नर

UPSC जीएस पेपर 3 · विज्ञान और तकनीक: सेमीकंडक्टर निर्माण

क्या है खबर

भारत ने सेमीकंडक्टर के लिए लगभग 23 अरब डॉलर अलग रखे हैं और लगभग एक दर्जन परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है। यह जानकारी Wall Street Journal की रिपोर्ट के हवाले से Analytics Insight ने दी है।

पृष्ठभूमि

  • सेमीकंडक्टर वे चिप हैं जो कार, फोन और पावर उपकरणों में इस्तेमाल होती हैं। फैब्रिकेशन प्लांट इन्हें बनाते हैं, जबकि असेंबली और टेस्टिंग प्लांट इन्हें पैक करते हैं।
  • पहले की कोशिशें, जिनमें 2006 का हैदराबाद प्रोजेक्ट और 2014 की दो योजनाएं शामिल हैं, आकार नहीं ले सकीं।
  • 2023 की एक किताब ने इन नाकामियों को अस्थिर नीतियों, टैक्स की अनिश्चितता, कमज़ोर इन्फ्रास्ट्रक्चर और व्यापार की बाधाओं से जोड़ा।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • गुजरात के वेफर फैब्रिकेशन प्लांट को टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की Powerchip Semiconductor Manufacturing Corp. विकसित कर रही हैं।
  • गुजरात का प्लांट 90 नैनोमीटर चिप बनाने की योजना रखता है।
  • मोदी ने Semicon India सम्मेलन के सभी पांच संस्करणों का उद्घाटन किया है।

मेन्स के लिए सामग्री

  1. महत्व: सेमीकंडक्टर प्लांट कुशल नौकरियां बना सकते हैं और इलेक्ट्रॉनिक्स की आपूर्ति श्रृंखला मज़बूत कर सकते हैं।
  2. मुख्य मुद्दा: अस्थिर नीतियों, टैक्स की अनिश्चितता और कमज़ोर इन्फ्रास्ट्रक्चर से पहले की परियोजनाएं विफल हुईं।
  3. चुनौतियां: पुरानी पीढ़ी की चिप और मज़दूर-आधारित असेंबली उन्नत चिप प्रतिस्पर्धा के बराबर नहीं हो सकतीं।
  4. आगे का रास्ता: डिज़ाइन टैलेंट, बड़ा बाज़ार और मोबाइल असेंबली का अनुभव टिकाऊ आधार बनाने में मदद कर सकते हैं।

अभ्यास प्रश्न: भारत में बड़े सार्वजनिक प्रोत्साहनों के बावजूद टिकाऊ सेमीकंडक्टर उद्योग बनाने की चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न

Q1. गुजरात के 11 अरब डॉलर के वेफर फैब्रिकेशन प्लांट को कौन सी कंपनियां विकसित कर रही हैं?

  1. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और Powerchip Semiconductor Manufacturing Corp.
  2. Advanced Micro Devices और Tufts University
  3. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और Samsung
  4. Powerchip और Analog Devices
उत्तर देखें

उत्तर: A. लेख में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की Powerchip Semiconductor Manufacturing Corp. का नाम है।

Q2. गुजरात के वेफर फैब्रिकेशन प्लांट में किस नैनोमीटर की चिप बनाने की योजना है?

  1. 5 नैनोमीटर
  2. 28 नैनोमीटर
  3. 90 नैनोमीटर
  4. 180 नैनोमीटर
उत्तर देखें

उत्तर: C. लेख के मुताबिक प्लांट 90 नैनोमीटर चिप बनाने की योजना रखता है।

मुख्य शब्द

  • सेमीकंडक्टर: ऐसी सामग्री से बनी चिप जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नियंत्रित करती है।
  • वेफर फैब्रिकेशन: पतली सिलिकॉन की परतों पर फैक्ट्री में चिप बनाने की प्रक्रिया।
  • आपूर्ति श्रृंखला: उन कंपनियों का नेटवर्क जो पुर्ज़े बनाती हैं और अंतिम उत्पाद तक सामान पहुंचाती हैं।

परीक्षा की तैयारी के लिए और खबरें: UPSC Today

ये बातें इस खबर की रिपोर्ट से ली गई हैं। परीक्षा से पहले NCERT किताबों और PIB जैसे मानक स्रोतों से ज़रूर मिलाएं।


स्रोत

टेकUPSC Todayजीएस पेपर 3

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