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नेविगेशन सैटेलाइट मिशन सफल, ISRO चीफ नारायणन ने बताया आगे का काम

ISRO चेयरमैन वी नारायणन ने कहा कि 30 अक्टूबर को लॉन्च हुआ नेविगेशन सैटेलाइट अण्डाकार कक्षा में पहुंच गया है और ऑर्बिट बढ़ाने का काम जारी है।

चेन्नई में रविवार को ISRO के चेयरमैन वी नारायणन ने बताया कि भारत का नेविगेशन सैटेलाइट मिशन एक अहम पड़ाव तक पहुंच गया है। हाल ही में छोड़ा गया सैटेलाइट अण्डाकार कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो गया है और उसे ऊंची कक्षा में ले जाने का काम चल रहा है। नारायणन ने चेन्नई पहुंचने के बाद पत्रकारों से यह बात कही।

एक नज़र में

  • 30 अक्टूबर को लॉन्च हुआ सैटेलाइट पहले करीब 38,000 km ऊंचाई की अण्डाकार कक्षा में रखा गया।
  • शनिवार को सैटेलाइट के अपने इंजन से उसे 5,500 km और ऊपर उठाया गया।
  • Gaganyaan के लिए अब तक करीब 8,000 टेस्ट हो चुके हैं।
  • Chandrayaan-4 को 2028 में भेजने की योजना है।

सैटेलाइट मिशन की स्थिति

नारायणन के मुताबिक, सैटेलाइट को शुरुआत में करीब 38,000 km की ऊंचाई पर अण्डाकार कक्षा में रखा गया था। इसके बाद उसके अपने प्रोपल्शन सिस्टम की मदद से शनिवार को उसे 5,500 km और ऊपर ले जाया गया। रविवार को भी उसे और ऊंची कक्षा में पहुंचाने की प्रक्रिया जारी रही। उन्होंने इस मिशन को शानदार सफलता बताया।

उन्होंने कहा कि सैटेलाइट आधारित नेविगेशन तकनीक से लोकेशन, समय और दिशा का पता लगाया जाता है। पूरी नेविगेशन सेवा देने के लिए कम से कम चार सैटेलाइट की ज़रूरत होती है। उनके अनुसार इस तकनीक का इस्तेमाल सार्वजनिक सुरक्षा, हवाई अड्डों पर विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ, समुद्री नेविगेशन और कई दूसरे क्षेत्रों में हो सकता है।

सैटेलाइट की संख्या और निगरानी का सवाल

नारायणन ने बताया कि भारत के पास अभी 56 सैटेलाइट कक्षा में हैं, लेकिन भविष्य की सभी ज़रूरतों और अलग-अलग इस्तेमाल के लिए हज़ारों सैटेलाइट चाहिए होंगे। बच्चों की तस्करी पर नज़र रखने या लापता बच्चों की पहचान में सैटेलाइट की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि इतनी व्यापक निगरानी के लिए भी हज़ारों सैटेलाइट की ज़रूरत पड़ेगी।

Gaganyaan, Chandrayaan और नया लॉन्च सेंटर

मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम Gaganyaan के बारे में उन्होंने कहा कि काम अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है और अब तक करीब 8,000 टेस्ट हो चुके हैं। ISRO अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले बिना क्रू वाले मिशन भेजेगा। लॉन्च के पहले चरण की तैयारियां सही चल रही हैं।

Chandrayaan-4 और Chandrayaan-5 पर भी काम जारी है। Chandrayaan-4 को 2028 में किया जाना तय है। नारायणन ने यह भी बताया कि वैज्ञानिक शोध मिशनों से अब तक करीब 37 terabyte डेटा मिला है, जिसे आम लोगों के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध करा दिया गया है।

तमिलनाडु के थूथुकुडी ज़िले के कुलशेखरपट्टिनम में बन रहे नए रॉकेट लॉन्च सेंटर के बारे में उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य चल रहा है। यहां से पहला रॉकेट लॉन्च मार्च या अप्रैल 2027 में होने की उम्मीद है।


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