भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार रात श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से 2,250 किलो वज़न का नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 सफलतापूर्वक लॉन्च किया। Rediff.com की रिपोर्ट के मुताबिक, इस लॉन्च से भारत के अपने क्षेत्रीय नेविगेशन सिस्टम NavIC को नई जान मिली है।
एक नज़र में
- NVS-03 को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया, दो GSLV मिशनों के बीच सिर्फ 56 दिन का अंतर रहा।
- इस साल मार्च में IRNSS-1F की एक खराब atomic clock के कारण NavIC ठप पड़ गया था।
- ISRO के चेयरमैन के मुताबिक लॉन्च से जुड़े बजट का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा घरेलू कंपनियों को जाता है।
- NVS-03 में स्वदेशी atomic clock लगी है और नया L1 signal भी जोड़ा गया है।
NavIC के लिए क्यों अहम है यह लॉन्च
NavIC भारत का अपना स्वतंत्र नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है। इसका मकसद पूरे भारत और देश की सीमा से करीब 1,500 किलोमीटर आगे तक position, navigation और timing (PNT) सेवाएं देना है।
रिपोर्ट के अनुसार यह लॉन्च ऐसे समय हुआ जब सिस्टम संकट में था। मार्च में IRNSS-1F की atomic clock खराब होने से NavIC प्रभावित हो गया। फिलहाल सिर्फ IRNSS-1B, IRNSS-1L और NVS-01 काम कर रहे हैं, जबकि सिस्टम ठीक से चलाने के लिए कम से कम चार ऐसे सैटेलाइट चाहिए जिनमें atomic clock सही चल रही हो।
NVS-03 अगली पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट की तीसरी कड़ी है, जिसे IRNSS सीरीज़ की सेवाओं को जारी रखने के लिए बनाया गया है। इसमें स्वदेशी atomic clock के साथ बाहर से मंगाई गई atomic clock भी हैं। मौजूदा L5/S signals के अलावा इसमें L1 signal भी है। इसका कवरेज भारत की ज़मीन और भौगोलिक सीमा से 1,500 किलोमीटर तक के इलाके में रहेगा।
निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका
लॉन्च के बाद ISRO चेयरमैन डॉ वी नारायणन ने कहा कि लॉन्च से जुड़े बजट का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा देश की निजी और सरकारी कंपनियों को जाता है। इस पूरे ecosystem में करीब 400 से 500 कंपनियां, सप्लायर और स्टार्टअप शामिल हैं।
हैदराबाद की Ananth Technologies Ltd (ATL) ने इस मिशन में बड़ा योगदान दिया। GSLV-F18 रॉकेट के लिए कंपनी ने 46 पैकेज दिए, जिनमें telemetry, data acquisition, guidance और control सिस्टम तथा avionics से जुड़े काम शामिल हैं। NVS-03 के लिए कंपनी ने 9 सिस्टम बनाए। कंपनी के चेयरमैन सुब्बा राव पावुलुरी ने इसे भारत की वैज्ञानिक क्षमता और अंतरिक्ष उद्योग की सामूहिक ताकत का सबूत बताया।
Indian Space Association (ISpA) के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल ए के भट्ट (रिटायर्ड) ने कहा कि निजी उद्योग का योगदान उत्साहजनक है। उनके मुताबिक यह सहयोग और बढ़ना चाहिए, ताकि भारतीय कंपनियां सैटेलाइट निर्माण, नेविगेशन तकनीक, कंपोनेंट और उनसे जुड़े उपयोगों में काम कर सकें।
आगे क्या
भट्ट ने कहा कि अब सबको अगले कुछ दिनों में NVS-03 के अपनी अंतिम कक्षा में स्थापित होने का इंतज़ार है। उसके बाद ही NavIC की स्थिति में सुधार की तस्वीर साफ होगी।