झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने और मातृ-शिशु मृत्यु दर में सुधार लाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और टाटा स्टील फाउंडेशन के बीच 3 साल का करार हुआ है। प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते के तहत राज्य के 13 जिलों में रणनीतिक, तकनीकी और प्रबंधकीय सहयोग दिया जाएगा।
एक नज़र में
- NHM और टाटा स्टील फाउंडेशन के बीच 3 साल का समझौता हुआ।
- राज्य के 13 जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और प्रशासन बेहतर करने पर जोर रहेगा।
- फाउंडेशन तीन जिलों में अपनी पहल जारी रखेगा, जबकि 10 जिलों में स्वास्थ्य विभाग को सहयोग देगा।
- साझेदारी छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगी।
किन जिलों में क्या होगा
रिपोर्ट के अनुसार, टाटा स्टील फाउंडेशन पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला में अपनी पहल "मैटरनल एंड न्यूबॉर्न सर्वाइवल इनिशिएटिव प्लस" जारी रखेगा। यानी इन तीन जिलों में यह काम पहले की तरह आगे चलेगा।
इसी प्रोजेक्ट के जरिये दुमका, जामताड़ा, धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची, खूंटी, लोहरदगा, गुमला और सिमडेगा में स्वास्थ्य विभाग को सहयोग दिया जाएगा। इस तरह कुल 13 जिले इस करार के दायरे में आएंगे।
किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
समझौते के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, संस्थागत क्षमता और स्वास्थ्य प्रशासन को बेहतर बनाने की बात कही गई है। यह साझेदारी छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगी। रिपोर्ट में इनमें से इन क्षेत्रों का जिक्र है:
- स्वास्थ्य केंद्रों और समुदाय स्तर पर सेवा वितरण
- मानव संसाधन
- आपूर्ति प्रबंधन
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी
- स्वास्थ्य वित्त पोषण
आम लोगों के लिए क्या मायने
इस करार का मुख्य लक्ष्य मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाना बताया गया है। अगर स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं बेहतर होती हैं और समुदाय स्तर तक उनकी पहुंच बढ़ती है, तो गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की देखभाल में इसका फायदा मिल सकता है। इन 13 जिलों में रांची, धनबाद और बोकारो जैसे बड़े शहरी इलाके भी हैं और खूंटी, गुमला व सिमडेगा जैसे जिले भी, जहां सरकारी स्वास्थ्य तंत्र पर लोगों की निर्भरता अधिक रहती है।
समझौते की अन्य शर्तों, खर्च या अलग-अलग जिलों में काम की समय-सीमा के बारे में रिपोर्ट में अलग से जानकारी नहीं दी गई है। आगे इस साझेदारी के तहत जमीनी स्तर पर काम कैसे बढ़ता है, यह आने वाले समय में साफ होगा।