कर्नाटक में गन्ना किसानों ने अपना आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। जनता से रिश्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, दो दिन पहले मैसूरु, धारवाड़, बेलगावी और राज्य के कई अन्य स्थानों पर प्रदर्शन करने के बाद अब किसान मंगलवार को सभी जिला आयुक्त (डीसी) कार्यालयों का घेराव करेंगे। इसके बाद शुक्रवार को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में बड़ा धरना होगा।
एक नज़र में
- मंगलवार को राज्य भर में डीसी कार्यालयों का घेराव, शुक्रवार को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में धरना।
- किसान गन्ने के लिए राज्य सलाहित मूल्य (एसएपी) की मांग कर रहे हैं।
- केंद्र से 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर कम से कम 4,500 रुपये प्रति टन एफआरपी की मांग।
- सूखे को देखते हुए पूर्ण कृषि ऋण माफी की भी मांग उठी है।
किसान क्या मांग रहे हैं
यह फैसला गन्ना उत्पादक समन्वय समिति ने लिया है, जो राज्य के किसान संगठनों की एक छत्र संस्था है। कर्नाटक राज्य गन्ना उत्पादक संघ के राज्य अध्यक्ष कुरुबुर शांताकुमार ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह निर्णय सभी किसान समूहों की आम सहमति को दिखाता है।
किसानों की मुख्य मांग है कि राज्य सरकार गन्ने के लिए एसएपी घोषित करे। समिति के अनुसार पंजाब ने प्रति टन 4,480 रुपये, उत्तर प्रदेश ने 4,200 रुपये और तमिलनाडु ने 4,000 रुपये तय किए हैं। इसके साथ किसान उच्च उत्पादन लागत का हवाला देकर केंद्र से 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी दर पर कम से कम 4,500 रुपये प्रति टन की उचित और लाभकारी कीमत (एफआरपी) चाहते हैं।
अन्य मांगें और मिलों पर रुख
कीमत के अलावा किसानों ने कुछ और मांगें भी रखी हैं:
- तौल और चीनी रिकवरी के आंकड़ों में गड़बड़ी के खिलाफ सख्त और पारदर्शी कार्रवाई।
- राज्य में सूखे को देखते हुए पूर्ण कृषि ऋण माफी।
- पहले के आंदोलनों में किसानों पर दर्ज पुलिस मामले वापस लेना।
समिति ने साफ किया कि वह उत्तरी कर्नाटक की उन चीनी मिलों का विरोध नहीं कर रही, जिन्होंने पेराई के लिए 4,000 रुपये प्रति टन की घोषणा की है। किसान चाहें तो इन मिलों को गन्ना दे सकते हैं।
आगे क्या
समिति ने जिला स्तर के किसान समूहों से एकजुट होने और अपने इलाके में मजबूत विरोध की योजना बनाने की अपील की है। मंगलवार का घेराव और शुक्रवार का धरना आंदोलन का अगला चरण होगा। रिपोर्ट में इन मांगों पर सरकार की ओर से किसी प्रतिक्रिया का जिक्र नहीं है।