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1 नवंबर: लक्षद्वीप समेत 8 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस

1 नवंबर को लक्षद्वीप सहित कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस मनाया गया, जो भारत के राज्य पुनर्गठन के इतिहास की याद दिलाता है।

1 नवंबर: लक्षद्वीप समेत 8 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस
प्रतीकात्मक फोटो। फोटो: Original: Shafeeq Thamarassery Derivative work: Unpetitpr / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

1 नवंबर को देश के आठ राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस मनाया गया। इनमें केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप भी शामिल है। ईटीवी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक यह दिन भारत के संघीय ढांचे के विकास को समझने का मौका देता है। इससे पता चलता है कि भाषा, इतिहास और क्षेत्रीय आकांक्षाओं ने आजादी के बाद देश का राजनीतिक नक्शा कैसे बदला।

एक नज़र में

  • आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, पंजाब और तमिलनाडु का स्थापना दिवस 1 नवंबर को मनाया गया।
  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दिल्ली, लक्षद्वीप और पुडुचेरी भी इस सूची में हैं।
  • दक्षिण भारत के कई राज्यों की जड़ें पुराने मद्रास प्रेसीडेंसी से जुड़ी हैं।
  • तेलंगाना 2 जून 2014 को देश का 29वां राज्य बना।

लक्षद्वीप और बाकी क्षेत्रों का महत्व

रिपोर्ट के अनुसार ये राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भारत के क्षेत्रीय और संवैधानिक विकास का एक-एक अध्याय हैं। लक्षद्वीप का नाम इस सूची में केंद्र शासित प्रदेश के रूप में आता है। रिपोर्ट में इसके गठन का अलग ब्योरा नहीं दिया गया है।

मद्रास प्रेसीडेंसी से बने दक्षिणी राज्य

मद्रास प्रेसीडेंसी ब्रिटिश शासन में एक बड़ी प्रशासनिक इकाई थी। इसमें आज के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक के इलाके शामिल थे। ओडिशा और तेलंगाना के कुछ हिस्से भी इसमें आते थे।

आजादी के बाद तेलुगु भाषी जिलों को मद्रास राज्य से अलग किया गया। इसके बाद 1 अक्टूबर 1953 को आंध्र राज्य बना। 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम के बाद भाषा के आधार पर पुनर्गठन और तेज हुआ। उसी साल 1 नवंबर को आंध्र राज्य और हैदराबाद राज्य के तेलुगु भाषी तेलंगाना क्षेत्र को मिलाकर आंध्र प्रदेश बनाया गया। हैदराबाद इसकी राजधानी बनी।

कन्नड़ भाषी इलाकों को मिलाकर मैसूर राज्य बना, जिसका नाम 1973 में कर्नाटक कर दिया गया। केरल का गठन त्रावणकोर-कोचीन को मालाबार जिले और कासरगोड क्षेत्र के साथ जोड़कर हुआ। मद्रास राज्य तमिल भाषी मुख्य राज्य बना रहा और 1969 में उसका नाम तमिलनाडु हो गया।

तेलंगाना का गठन और विशेषज्ञों की राय

लंबे आंदोलन के बाद आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत तेलंगाना बना। हैदराबाद को 10 साल के लिए दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी रखा गया। यह अवधि जून 2024 में खत्म हुई। अब हैदराबाद पूरी तरह तेलंगाना की राजधानी है, जबकि आंध्र प्रदेश अमरावती के विकास पर ध्यान दे रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सत्य प्रकाश सिंह ने ईटीवी भारत से कहा कि अलग राज्य की मांगों को परखते समय जन-आकांक्षाओं, प्रशासनिक क्षमता, आर्थिक स्थिरता और पड़ोसी क्षेत्रों पर असर को ध्यान में रखना चाहिए। उनके मुताबिक लक्ष्य शासन को लोगों के करीब लाना होना चाहिए, ताकि नई असमानताएं न बनें।

प्रोफेसर देबाशीष चक्रवर्ती का कहना है कि सीमाएं तय करने का आधार केवल भाषा नहीं हो सकती। क्षेत्रीय आकांक्षाएं, प्रशासनिक कुशलता और न्यायसंगत विकास भी अलग राज्य की मांग को आकार देते हैं।


स्रोत

देशलक्षद्वीप

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