महाराष्ट्र सरकार ने सूखा प्रभावित इलाकों में मृदा और जल संरक्षण के कामों की निगरानी के लिए राज्य स्तर की उच्चाधिकार समिति बनाई है। इसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे। Free Press Journal की रिपोर्ट के मुताबिक मृदा एवं जल संरक्षण मंत्री संजय राठोड़ ने सोमवार को इस फैसले की घोषणा की। विभाग ने इसके लिए 2 नवंबर 2026 को सरकारी आदेश (GR) जारी किया।
एक नज़र में
- मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय उच्चाधिकार समिति बनी है।
- जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति भी गठित हुई है।
- Water Cup प्रतियोगिता को फिर शुरू किया जाएगा।
- NGO के कामों की निगरानी GIS, सैटेलाइट इमेज और ऑनलाइन डैशबोर्ड से होगी।
समितियों में कौन होगा
सभी उपमुख्यमंत्री उच्चाधिकार समिति के सह-अध्यक्ष होंगे। मृदा एवं जल संरक्षण, कृषि, ग्रामीण विकास और पंचायत राज, जल संसाधन और कमांड एरिया डेवलपमेंट, जलापूर्ति और स्वच्छता तथा रोज़गार गारंटी योजना विभागों के मंत्री इसके सदस्य होंगे। मृदा एवं जल संरक्षण विभाग के सचिव सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे।
यह समिति सूखे से राहत के लिए चल रही संरक्षण परियोजनाओं पर नज़र रखेगी और उनकी प्रगति की समीक्षा करेगी। साथ ही Water Cup के ज़रिए बन रहे जन-भागीदारी आंदोलन का भी आकलन करेगी।
कार्यकारी समिति में जल संसाधन, कृषि, वन, ग्रामीण विकास, वित्त, जलापूर्ति और स्वच्छता, रोज़गार गारंटी योजना और मृदा एवं जल संरक्षण विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव शामिल होंगे। यह समिति विभागों को ज़रूरी निर्देश देगी और उच्चाधिकार समिति के फैसलों का पालन सुनिश्चित करेगी।
फैसले की पृष्ठभूमि
रिपोर्ट के अनुसार 2026 में महाराष्ट्र में बारिश कम रही, जिसका असर खरीफ सीज़न पर पड़ा। जिन तालुकाओं में Trigger-1 लागू हुआ, वहां सूखा घोषित किया गया है और प्रभावित क्षेत्रों को कई राहत उपाय और रियायतें दी गई हैं। पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मृदा और जल संरक्षण के काम भी इन उपायों का हिस्सा हैं।
सरकार Paani Foundation के ज़रिए चलने वाली Water Cup प्रतियोगिता को दोबारा शुरू करेगी। इसके अलावा Paani Foundation और Chandra Foundation जैसी स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी से संरक्षण परियोजनाएं चलाने की भी योजना है।
पारदर्शिता और आगे की प्रक्रिया
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए NGO के ज़रिए हो रहे कामों की प्रगति पर Geographic Information System (GIS), सैटेलाइट इमेजरी, मोबाइल आधारित निगरानी प्रणाली और ऑनलाइन डैशबोर्ड से नज़र रखी जाएगी। मंत्री के अनुसार इसका मकसद प्रभावी निगरानी, तेज़ फैसले और तकनीक की मदद से नियमित समीक्षा है।
कार्यकारी समिति की बैठक कम से कम महीने में एक बार होगी, जिसमें कामकाज की समीक्षा होगी और आ रही दिक्कतों पर चर्चा की जाएगी। सरकारी आदेश राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।