मणिपुर के कांगपोकपी जिले में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा। एक जनजातीय संगठन के बंद के कारण बाजार और दुकानें बंद रहीं। संगठन का आरोप है कि दो युवकों की हत्या के मामले में राज्य सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। India.com की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि इंफाल की ओर जा रहे कई मालवाहक वाहन कांगपोकपी में नहीं घुस सके और पड़ोसी जिले सेनापति में रुके रहे।
एक नज़र में
- कांगपोकपी में मंगलवार को दूसरे दिन भी बाजार और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे।
- बंद का आह्वान कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (CoTU) ने किया है।
- इंफाल जा रहे कई मालवाहक वाहन सेनापति में फंसे रहे।
- जिले में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
बंद की वजह और मांग
रविवार सुबह सेनापति जिले के एक पहाड़ी इलाके में दो युवकों के क्षत-विक्षत शव मिले थे। दोनों कुछ दिन पहले लापता हो गए थे। शव मिलने के बाद CoTU ने रविवार से कांगपोकपी में 24 घंटे के बंद का ऐलान किया। सोमवार रात इसे 48 घंटे और बढ़ा दिया गया।
कुकी संगठन ने कहा कि बंद सरकार के "शर्मनाक अनिर्णय" और "अस्वीकार्य चुप्पी" के विरोध में बढ़ाया गया है। उसके अनुसार दो निर्दोष कुकी-ज़ो नागरिकों की हत्या के बाद न्याय के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। संगठन ने यह भी कहा कि कुकी-ज़ो लोग न्याय की जगह "खोखले आश्वासन और प्रशासनिक बहाने" स्वीकार नहीं करेंगे। उसने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।
सुरक्षा इंतजाम और पृष्ठभूमि
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए जिले में अतिरिक्त सुरक्षा बल लगाए गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर माल ढोने वाले वाहनों के रुकने से आवाजाही पर असर पड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार, मई 2023 में घाटी के मैतेई और पहाड़ी इलाकों के कुकी समुदाय के बीच शुरू हुए जातीय संघर्ष में अब तक कम से कम 306 लोगों की मौत हो चुकी है। 49 लोग अब भी लापता हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं। हाल के महीनों में कुकी और नागा समुदायों के बीच भी झड़पों की खबरें आई हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
राज्य में हिंसा की नई घटनाओं के बीच कांग्रेस ने सोमवार को भाजपा पर निशाना साधा। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेताओं के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में राहुल गांधी, के सी वेणुगोपाल, मणिपुर के प्रभारी सप्तगिरि उलाका, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री इबोबी सिंह तथा विधायक दल के नेता के. मेघचंद्र भी शामिल थे।
X पर किए गए पोस्ट में खड़गे ने आरोप लगाया कि भाजपा के "राजनीतिक अहंकार, लापरवाह उदासीनता और घोर अक्षमता" ने रणनीतिक रूप से अहम इस सीमावर्ती राज्य को लंबे संकट में धकेल दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने के बीच भाजपा नेतृत्व जवाबदेही से बचता रहा। खड़गे ने आने वाले राज्य चुनावों में भाजपा के "कुशासन" को खत्म करने की अपील की।