मणिपुर के फुंग्यार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के इच्छुक वुंगनाओशांग कसार ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के पास शिकायत दी है। उन्होंने 13वीं विधानसभा के चुनाव से पहले राज्य में चल रही सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं को तुरंत रोकने की मांग की है। Northeast Now की रिपोर्ट के मुताबिक, यह शिकायत इंफाल से भेजी गई है।
एक नज़र में
- कसार ने चुनाव से पहले राज्य में चल रही सरकारी भर्ती पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
- उनका आरोप है कि भाजपा की अगुवाई वाली सरकार ने कई विभागों में भर्ती की रफ्तार बढ़ा दी है।
- शिकायत में भर्ती के बदले पैसे लेने और पेपर लीक जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
- ये सभी बातें शिकायत में किए गए दावे हैं, इनकी पुष्टि रिपोर्ट में नहीं है।
शिकायत में क्या कहा गया
कसार का आरोप है कि राज्य सरकार ने शिक्षा, पुलिस, स्वास्थ्य, PWD, ग्रामीण विकास (RD) और सचिवालय जैसे विभागों में हजारों खाली पदों पर भर्ती तेज कर दी है। उनके मुताबिक लंबे समय से अटकी फाइलें चुनाव से कुछ महीने पहले असामान्य तेजी से निपटाई जा रही हैं। उन्होंने इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताया और कहा कि इसका मकसद मतदाताओं को प्रभावित करना है।
शिकायत में भ्रष्टाचार के आरोप भी हैं। इसके मुताबिक मंत्रियों और विधायकों से जुड़े बिचौलिए नौकरी के बदले उम्मीदवारों से पैसे ले रहे हैं। आरोप में सब-इंस्पेक्टर पद के लिए 15 से 25 लाख रुपये, क्लर्क स्तर के पदों के लिए 8 से 12 लाख रुपये और ग्रेड-IV नौकरियों के लिए 3 से 5 लाख रुपये की दरें बताई गई हैं। साथ ही प्रश्नपत्र लीक होने और इंटरव्यू के अंकों में हेरफेर की बात भी कही गई है।
कसार ने इन कथित तरीकों को चुनावी रिश्वत और अनुचित प्रभाव बताया है। उनका दावा है कि यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123 का उल्लंघन है।
क्या मांगें रखी गईं
चल रही भर्ती पर रोक के अलावा कसार ने जून 2026 से राज्य सरकार की सभी भर्तियों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। शिकायत में मुख्य सचिव को निर्देश देने की भी बात है। इसके साथ प्रभावित हो सकने वाले उम्मीदवारों के लिए एक गोपनीय हेल्पलाइन शुरू करने की मांग की गई है।
नौकरी चाहने वालों के लिए क्यों अहम
यह शिकायत कसार के पहले दिए गए एक ज्ञापन के बाद आई है, जो उन्होंने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को सौंपा था। उसमें उन्होंने पुरानी भर्ती परीक्षाओं के नतीजे लंबित रहने और बेरोजगार युवाओं की अनिश्चितता का मुद्दा उठाया था। उनका कहना है कि नतीजों में देरी से उम्मीदवारों में निराशा है और भर्ती व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि पुरानी परीक्षाएं पूरी किए और नतीजे घोषित किए बिना नई भर्ती प्रक्रिया क्यों शुरू की जा रही है।
राज्यपाल को दिए ज्ञापन में उन्होंने आग्रह किया कि राज्य सरकार से पूरी स्थिति रिपोर्ट मांगी जाए। इसमें लंबित परीक्षाओं का ब्योरा और भर्ती में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उपाय शामिल हों।
रिपोर्ट के अनुसार, अब ये आरोप चुनाव आयोग के सामने रखे गए हैं। यह साफ किया गया है कि ये शिकायत में किए गए दावे ही हैं। आयोग या राज्य सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया रिपोर्ट में नहीं दी गई है।