भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के बीच कांगपोकपी और नोनी जिलों में दो अलग-अलग घटनाओं में 5 लोगों की मौत हो गई। शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। रिपोर्ट 2 नवंबर की है।
एक नज़र में
- कांगपोकपी और नोनी जिलों में दो अलग घटनाओं में कुल 5 लोगों की मौत हुई।
- कांगपोकपी में दो कुकी पुरुषों के शव मिलने के बाद झड़प हुई, जबकि नोनी में तीन कुकी पुरुष मारे गए।
- पुलिस ने हत्याओं के जिम्मेदार लोगों का पता लगाने के लिए बड़ा तलाशी अभियान शुरू किया है।
- राज्य सरकार के अनुसार मई 2023 से अब तक कम से कम 306 लोगों की जान जा चुकी है।
दोनों घटनाओं में क्या हुआ
रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को कांगपोकपी में दो कुकी पुरुषों के शव बरामद होने के बाद हालात बिगड़ गए। ये दोनों लोग 28 अक्टूबर से तापहोउ कुकी गांव से लापता थे। शव मिलने की खबर के बाद भीड़ नाराज हो गई और झड़प शुरू हो गई।
भीड़ को हटाने के लिए सरकारी बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। बताया गया है कि इस टकराव में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए।
इससे एक दिन पहले, शनिवार को नोनी जिले के केकरू नागा गांव में तीन कुकी पुरुषों की मौत हो गई। बताया गया कि दो सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी हुई थी, जिसमें ये लोग मारे गए।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, इन हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों को पकड़ने के लिए व्यापक सर्च और कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है। रिपोर्ट में किसी की गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दी गई है।
हिंसा की पृष्ठभूमि
मणिपुर में 3 मई 2023 से तनाव बना हुआ है। उस दिन आदिवासी समूहों के एक प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा भड़की थी। यह प्रदर्शन गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में था। यह दर्जा सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों के लिए है और इससे शिक्षा तथा सरकारी नौकरियों में आरक्षण मिलता है।
हिंसा के बाद केंद्र सरकार ने पिछले साल फरवरी में राज्य में सीधा शासन लागू किया था, जो लगभग एक साल चला। इसे इस साल फरवरी में हटा लिया गया।
मणिपुर की स्थानीय सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा में कम से कम 306 लोग मारे गए हैं और 49 लोग लापता बताए गए हैं। ताजा घटनाएं दिखाती हैं कि राज्य में हालात अब भी संवेदनशील बने हुए हैं।