प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लिए स्वच्छ ऊर्जा का नया लक्ष्य रखा है: अगले 10 से 11 साल में गैर-जीवाश्म (non-fossil) स्रोतों से करीब 500 गीगावाट (GW) बिजली क्षमता जोड़ना। उन्होंने 2 नवंबर 2026 को भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो में इसकी घोषणा की और इसे सीधे पश्चिम एशिया की जंग और तेल के झटकों से जोड़ा।
एक नज़र में
- PM मोदी चाहते हैं कि अगले 10-11 साल में करीब 500 GW गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता जोड़ी जाए।
- यह 2030 तक 500 GW के मौजूदा लक्ष्य के अलावा है, जो उनके मुताबिक सही रास्ते पर है।
- भारत की गैर-जीवाश्म क्षमता 300 GW पार कर चुकी है।
- मोदी ने स्वच्छ ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा से जोड़ा।
PM ने आखिर कहा क्या?
मोदी ने कहा कि भारत अगले करीब एक दशक में लगभग 500 GW नई गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता जोड़ेगा। गैर-जीवाश्म यानी ऐसी बिजली जो कोयला, तेल या गैस जलाकर नहीं बनती, मुख्य रूप से सोलर, पवन, जलविद्युत और परमाणु। उन्होंने यह भी कहा कि इस दशक के अंत तक रिन्यूएबल सेक्टर में ₹20 लाख करोड़ से ज़्यादा के निवेश के मौके बनेंगे।
क्या पहले से 500 GW का लक्ष्य नहीं था?
था, और यहीं थोड़ी उलझन होती है। भारत का 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य पहले से है, और PM के मुताबिक वह सही रास्ते पर है। नया 500 GW उसके ऊपर है, यानी 2030 के बाद के सालों के लिए दूसरा बड़ा धक्का।
आज भारत कहां खड़ा है
PM के मुताबिक देश की स्थापित गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता 300 GW पार कर चुकी है, कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा करीब 308 GW है। अब देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता का आधे से ज़्यादा हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से है। भारत ने पेरिस जलवायु समझौते के तहत यह पड़ाव 2030 की समय-सीमा से पांच साल पहले पार कर लिया।
क्षमता और असली बिजली में फर्क
एक बात याद रखें: स्थापित क्षमता और असल में बनी बिजली एक चीज़ नहीं है। सोलर पैनल रात में काम नहीं करते और हवा हमेशा नहीं चलती, इसलिए एक गीगावाट सोलर साल भर में एक गीगावाट कोयले से काफी कम बिजली बनाता है। देश में असल में इस्तेमाल होने वाली ज़्यादातर बिजली अब भी कोयले से आती है। बड़ी बैटरियां और पंप्ड हाइड्रो जैसे स्टोरेज इस फर्क को कम करने की कुंजी हैं।
पश्चिम एशिया का ज़िक्र क्यों
भारत अपना ज़्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए उस इलाके का हर झटका हमारे पेट्रोल-डीज़ल के दाम, महंगाई और रुपये पर असर डालता है। मोदी ने कहा, "अगर हम भविष्य में जीवाश्म ईंधन पर बहुत ज़्यादा निर्भर रहे, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था बार-बार बाधित होती रहेगी।" उनका तर्क सीधा है: भारत में बनी धूप और हवा की बिजली को कोई समुद्री रास्ते पर नहीं रोक सकता।
आपके लिए इसका मतलब
- रोज़गार: 500 GW बनाने के लिए लाखों सोलर पैनल, हज़ारों पवन चक्कियां, नई ट्रांसमिशन लाइनें और बड़े बैटरी प्लांट चाहिए। इससे निर्माण, इंस्टॉलेशन और रखरखाव में नौकरियां आएंगी, कई छोटे शहरों और गांवों में।
- बिल और छत: सोलर अब नई बिजली के सबसे सस्ते स्रोतों में है। घर की छत पर सोलर के लिए PM सूर्य घर योजना में सब्सिडी पहले से मिल रही है।
- साफ हवा: कोयले की जगह धूप से बनी हर यूनिट का मतलब है बिजलीघरों से कम धुआं।
मुश्किल हिस्सा
लक्ष्य घोषित करना आसान है, पूरा करना मुश्किल। सस्ता स्टोरेज, मज़बूत ग्रिड, किसानों को उजाड़े बिना ज़मीन, और बिजली कंपनियों की अच्छी माली हालत, इनमें से कोई एक भी कमज़ोर पड़ा तो पूरी योजना धीमी हो सकती है। फिर भी भारत पहले भी बड़े स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य पूरे कर चुका है।
सवाल-जवाब
गैर-जीवाश्म बिजली में क्या-क्या आता है?
ऐसे स्रोतों की बिजली जो कोयला, तेल या गैस नहीं जलाते, मुख्य रूप से सोलर, पवन, जलविद्युत और परमाणु।
एक परिवार को इससे क्या फायदा?
छत पर सोलर लगाकर। PM सूर्य घर योजना में घर पर सोलर पैनल लगाने के लिए सब्सिडी मिलती है।