ओडिशा के पूर्व जेल महानिदेशक (DG Prisons) सुशांत कुमार नाथ ने उड़ीसा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दाखिल की है। Deccan Chronicle की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला एक पूर्व महिला जेलर की शिकायत पर दर्ज यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। नाथ के साथ उनके कथित सहयोगी कुलदीप राठ ने भी गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की है।
एक नज़र में
- सुशांत कुमार नाथ और कुलदीप राठ ने हाईकोर्ट में संयुक्त रूप से अग्रिम जमानत की अर्जी दी है।
- मामला चौद्वार थाना केस नंबर 713/2026 है, जो कटक अर्बन पुलिस डिस्ट्रिक्ट ने दर्ज किया।
- आरोप फिलहाल पुलिस जांच के दायरे में हैं।
- नाथ को हाल ही में DG (Prisons) पद से हटाकर गृह विभाग में OSD बनाया गया है।
क्या हैं आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, नाथ 1993 बैच के IPS अधिकारी हैं। FIR में शिकायतकर्ता पूर्व जेलर ने कहा है कि जुलाई 2025 में राठ उनसे नाथ की ओर से मिले थे। उनका आरोप है कि अगस्त और सितंबर में राठ ने मैसेज भेजकर उन्हें कटक के दो होटलों में वरिष्ठ IPS अधिकारी के साथ डिनर पर आने का न्योता दिया।
शिकायत के मुताबिक, महिला ने हर बार यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। उन्होंने यह भी कहा कि राठ ने बताया कि नाथ होटलों में उनसे अकेले में मिलना चाहते हैं। महिला ने इसे यौन मंशा वाला अवांछित प्रस्ताव माना। ये सभी बातें FIR में शिकायतकर्ता के आरोप के रूप में दर्ज हैं और अभी जांच का विषय हैं।
पुलिस कार्रवाई और कानूनी स्थिति
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराएं 35(2), 351(2) और 3(5) लगाई हैं। पुलिस ने मामले के पंजीकरण और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पर लगे आरोपों की जानकारी राज्य के गृह विभाग को भी दी है।
अग्रिम जमानत याचिका का ब्योरा और दोनों याचिकाकर्ताओं की दलीलें रिपोर्ट के समय सामने नहीं आई थीं। नाथ और राठ से आरोपों पर प्रतिक्रिया के लिए संपर्क नहीं हो सका।
प्रशासनिक फेरबदल
इसी बीच राज्य सरकार ने 1 नवंबर को नौ वरिष्ठ IPS और ओडिशा पुलिस सेवा (OPS) अधिकारियों का तबादला किया और उन्हें पुलिस प्रशासन में नई जिम्मेदारियां दीं। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, हाल ही में DG (Prisons) के पद से हटाए गए नाथ को गृह विभाग में Officer on Special Duty (OSD) के रूप में तैनात किया गया है।
आगे क्या
अब नजर इस पर रहेगी कि हाईकोर्ट अग्रिम जमानत की अर्जी पर कब और क्या फैसला देता है। तब तक पुलिस की जांच जारी रहेगी। किसी भी आरोप पर अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालती प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।