राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग की बार-बार आ रही शिकायतों को लेकर डॉक्टरों के संगठन United Doctors Front (UDF) ने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की है। Medical Dialogues की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने मुख्यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (DME) के कमिश्नर और राजस्थान के DGP को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि अक्टूबर में कुल 12 मेडिकल कॉलेजों से रैगिंग के मामले सामने आए।
एक नज़र में
- UDF के मुताबिक अक्टूबर में राजस्थान के 12 मेडिकल कॉलेजों से रैगिंग की शिकायतें आईं।
- संगठन ने स्वतंत्र, राज्यव्यापी और समयबद्ध जांच की मांग की है।
- पत्र मुख्यमंत्री, DME कमिश्नर और DGP को भेजा गया है।
- NMC की एंटी-रैगिंग सेल ने भी कई संस्थानों से Action Taken Report मांगी है।
किन कॉलेजों का जिक्र
UDF ने जिन संस्थानों की शिकायतों या उनसे जुड़ी नियामक कार्रवाई का ज़िक्र किया है, उनमें Government Medical College कोटा, डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज जोधपुर, भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज, Government Medical College चित्तौड़गढ़, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज बीकानेर, ESIC मेडिकल कॉलेज जयपुर, महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज जयपुर और JIET मेडिकल कॉलेज जोधपुर शामिल हैं। इसके अलावा दौसा, सवाई माधोपुर, पाली और बाड़मेर के मेडिकल कॉलेजों का भी नाम है।
संगठन के अनुसार, अलग-अलग संस्थानों से आई शिकायतों में देर रात हॉस्टल में जबरन जमावड़ा, ज़बरदस्ती परिचय लेना, अपमानजनक गतिविधियां, गाली-गलौज, डराना-धमकाना, पढ़ाई में बदले की कार्रवाई की धमकी और सामाजिक बहिष्कार जैसे आरोप शामिल हैं।
UDF की चिंता और मांगें
प्रतिवेदन में UDF ने कहा कि सरकारी और निजी, दोनों तरह के संस्थानों से कम समय में इतनी शिकायतें आना मौजूदा एंटी-रैगिंग व्यवस्था, संस्थानों की निगरानी और छात्रों की सुरक्षा पर सवाल उठाता है। संगठन का कहना है कि कानूनी और नियामक ढांचा होने के बावजूद ऐसी शिकायतों का दोहराव यह दिखाता है कि केवल अलग-अलग घटनाओं को नहीं, बल्कि संस्थागत और प्रशासनिक चूक को भी देखा जाना चाहिए, यदि कोई रही हो।
UDF ने मुख्यमंत्री से अक्टूबर में सामने आई सभी रैगिंग शिकायतों की स्वतंत्र, राज्यव्यापी और समयबद्ध जांच के निर्देश देने की मांग की है। संगठन के अनुसार यह जांच इस बात पर निर्भर नहीं होनी चाहिए कि किसी मामले में NMC का नोटिस जारी हुआ है या नहीं। संगठन ने संस्थान प्रमुखों की जवाबदेही और एक समन्वित एंटी-रैगिंग निगरानी व्यवस्था की भी मांग की है। DME कमिश्नर और DGP को प्रतिवेदन इसलिए भेजा गया है, ताकि प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर मिलकर कार्रवाई हो सके।
NMC की भूमिका और आगे क्या
UDF के मुताबिक, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की एंटी-रैगिंग सेल ने कई संस्थानों की शिकायतों का संज्ञान लिया है। कुछ मामलों में 24 घंटे के भीतर जवाब सहित Action Taken Report मांगी गई है। Medical Dialogues ने पहले अपनी रिपोर्ट में बताया था कि NMC ने GMC कोटा और बाड़मेर से रिपोर्ट मांगी थी और आरोपी MBBS छात्रों को निष्कासित किया गया था।
UDF ने यह भी बताया कि उसने 19 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री और संबंधित राज्य अधिकारियों को पहले ही एक प्रतिवेदन दिया था। उसके बाद और शिकायतें व नियामक कार्रवाइयां सामने आईं, जिससे संगठन के अनुसार राज्य स्तर पर व्यापक और समन्वित जवाब की ज़रूरत और बढ़ गई है। सरकार की ओर से इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया आई, इसकी जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है।