सुप्रीम कोर्ट ने असम के डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क के नीचे से हाइड्रोकार्बन निकालने की ऑयल इंडिया लिमिटेड की नई याचिका पर केंद्र सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा असम सरकार से जवाब मांगा है। Newsband की 3 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने एक्सटेंडेड रीच ड्रिलिंग (ERD) के जरिए यह काम करने का प्रस्ताव रखा था, जिसे केंद्र ने नामंजूर कर दिया था।
एक नज़र में
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और असम सरकार को नोटिस जारी किया है।
- मामला तिनसुकिया जिले में 0.069 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की अनुमति से जुड़ा है।
- ऑयल इंडिया का कहना है कि ड्रिलिंग पार्क के बाहर से होगी और पारिस्थितिकी को नुकसान नहीं होगा।
- मामले पर 17 नवंबर के बाद विचार किया जाएगा।
क्या है मामला
विवाद पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें बाघजान पेट्रोलियम माइनिंग लीज क्षेत्र से ERD ऑपरेशन के लिए जमीन के गैर-वन उपयोग की अनुमति नहीं दी गई। ऑयल इंडिया ने तिनसुकिया जिले में 0.069 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की मंजूरी मांगी थी। सरकारी क्षेत्र की इस कंपनी ने इनकार के फैसले को चुनौती दी है।
ERD तकनीक की खासियत यह है कि इसमें किसी संरक्षित क्षेत्र की सीमा के भीतर सीधे ड्रिलिंग किए बिना उसके नीचे मौजूद हाइड्रोकार्बन निकाले जा सकते हैं। कंपनी का तर्क है कि काम पार्क के बाहर से होगा, इसलिए उसके पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान नहीं पहुंचेगा। साथ ही, कंपनी के मुताबिक इससे देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी।
अदालत में अब तक की कार्यवाही
2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ऑयल इंडिया को पहले दायर एक अंतरिम आवेदन वापस लेने और इसी मुद्दे पर नई याचिका दाखिल करने की अनुमति दी थी। उस समय अदालत ने प्रस्तावित परियोजना के पर्यावरणीय या कानूनी पहलुओं पर कोई फैसला नहीं किया था।
अब चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी मोहना की पीठ ने केंद्र और असम सरकार को नोटिस जारी किया है। मामले पर 17 नवंबर के बाद सुनवाई होगी।
क्यों अहम है यह मामला
रिपोर्ट के अनुसार यह केस देश में हाइड्रोकार्बन उत्पादन बढ़ाने की जरूरत और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क की सुरक्षा के बीच संतुलन की परीक्षा होगा। केंद्र और असम सरकार के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगा कि अदालत इस मामले को किस दिशा में ले जाती है।