अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने सोमवार को प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) को लेकर उठ रही आशंकाओं पर एक पत्र जारी किया। Outlook India की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस दावे को गलत बताया कि लोगों को जबरन उनके घरों से हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जन-परामर्श के बिना कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।
एक नज़र में
- मुख्यमंत्री ने कहा कि बांध पर फैसला हो चुका है और जमीन बिना सहमति के ली जाएगी, ये बातें सच नहीं हैं।
- प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट सिर्फ शुरुआती आकलन है, अंतिम फैसला नहीं।
- खांडू ने चीन के बांध का हवाला देते हुए SUMP की संभावित भूमिका को वैज्ञानिक तौर पर परखने की बात कही।
- उन्होंने हिंसा, रास्ता रोकने और हमलों से विवाद न सुलझने की बात कही।
पत्र में क्या कहा गया
खांडू ने लिखा कि कुछ लोग और समूह SUMP को लेकर गलत जानकारी फैला रहे हैं। उनके मुताबिक दावा किया जा रहा है कि बांध पर फैसला हो चुका है, परिवारों को घर छोड़ना पड़ेगा और जमीन बिना सहमति के ली जाएगी। उन्होंने कहा, "इनमें से कुछ भी सच नहीं है।"
मुख्यमंत्री ने माना कि इस जानकारी से लोगों, खासकर आदी समुदाय में चिंता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि लोगों को परियोजना के रणनीतिक महत्व और संभावित चिंताओं के बारे में सही जानकारी मिलनी चाहिए। राज्य सरकार संवाद, पारदर्शिता और स्थानीय समुदायों की आशंकाएं दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।
चीन के बांध का हवाला
खांडू के अनुसार चीन ने 19 जुलाई 2025 को यारलुंग सांगपो नदी पर बांध का निर्माण शुरू किया। यह भारतीय सीमा से करीब 40 किलोमीटर दूर है और भारत से सलाह नहीं ली गई। उनका कहना है कि इससे सियांग घाटी में अचानक बहुत ज्यादा पानी आने का खतरा हो सकता है, जिसकी पहले से खास चेतावनी न मिले। सर्दियों के सूखे महीनों में पानी की कमी भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि आने सियांग का करीब 65 प्रतिशत पानी चीन से आता है।
इसी वजह से उन्होंने कहा कि SUMP को वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से जांचा जाना चाहिए। देखा जाए कि क्या यह मौसमी उतार-चढ़ाव को संभालने और सियांग व ब्रह्मपुत्र में पारिस्थितिक प्रवाह बनाए रखने में मदद कर सकता है।
विरोध और आगे की राह
रिपोर्ट के मुताबिक आदी समुदाय के कुछ वर्ग 11,200 मेगावाट की इस प्रस्तावित परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उन्हें गांवों के डूबने, विस्थापन, पुश्तैनी जमीन के नुकसान और पर्यावरणीय क्षति का डर है।
खांडू ने स्पष्ट किया कि प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट केवल बुनियादी व्यवहार्यता तय करने और आगे की तकनीकी जांच का तथ्यात्मक आधार देने के लिए है। उन्होंने दोहराया कि विस्तृत जन-परामर्श के बिना न राज्य सरकार और न केंद्र सरकार आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा, "संवाद के लिए भरोसा और आपसी समझ जरूरी है। हम संवाद, सहमति और सकारात्मक रास्ता खोजने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हिंसा, रास्ता रोकने और हमलों वाले प्रदर्शनों से विवाद हल नहीं होगा। उन्होंने कानून हाथ में लेने वालों को भी चेतावनी दी, हालांकि उपलब्ध पाठ में यह बयान आगे अधूरा है।