तमिलनाडु के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त हाई व हायर सेकेंडरी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे कक्षा 6 से 12 के छात्रों से प्रश्नपत्र फीस या कोई भी अन्य अनधिकृत शुल्क न लें। यह निर्देश मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के अंतरिम आदेश के बाद जारी किया गया है। The New Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जानकारी चेन्नई से सामने आई है।
एक नज़र में
- कक्षा 6 से 12 के छात्रों से प्रश्नपत्र फीस या अन्य अनधिकृत शुल्क लेने पर रोक।
- मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने 23 अक्टूबर को अंतरिम आदेश दिया।
- स्कूल शिक्षा निदेशक ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को आदेश का सख्ती से पालन कराने को कहा।
- RTI से मिली जानकारी के अनुसार 2025-26 में कई जिलों में करोड़ों रुपये जुटाए गए।
सर्कुलर में क्या कहा गया
स्कूल शिक्षा निदेशक ने एक सर्कुलर जारी कर सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से कहा है कि वे हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों तक पहुंचाएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि आदेश का पूरी तरह पालन हो।
मामला कैसे सामने आया
रिपोर्ट के अनुसार, यह मुद्दा तब उठा जब शिक्षकों ने चिंता जताई कि स्कूल परीक्षा के प्रश्नपत्र छपवाने का खर्च निकालने के लिए छात्रों से पैसे ले रहे हैं। शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा मंत्री A Rajmohan को ज्ञापन भी सौंपा और इस व्यवस्था को खत्म करने की मांग की।
तमिलनाडु हायर सेकेंडरी स्कूल ग्रेजुएट टीचर्स एसोसिएशन ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि कई जिलों के स्कूलों ने 2025-26 में इस मद में बड़ी रकम वसूली। एसोसिएशन के अनुसार नमक्कल में 1.27 करोड़ रुपये, कन्याकुमारी में 1.36 करोड़ रुपये और पुदुक्कोट्टई में 1.30 करोड़ रुपये जमा किए गए।
इसके बाद एसोसिएशन के सदस्यों ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ का दरवाजा खटखटाया और ऐसी फीस वसूली को चुनौती दी। 23 अक्टूबर को अदालत ने अंतरिम आदेश पारित कर स्कूलों को यह शुल्क लेने से रोक दिया।
अभिभावकों और छात्रों के लिए क्या मायने
सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के परिवारों पर परीक्षा के नाम पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ अब इस आदेश के तहत नहीं लिया जा सकेगा। यदि किसी स्कूल में ऐसी वसूली होती है, तो अभिभावक इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दे सकते हैं। सर्कुलर में अधिकारियों को आदेश के सख्त पालन की जिम्मेदारी दी गई है।
रिपोर्ट में अंतरिम आदेश के आगे की सुनवाई या अंतिम फैसले को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है।