त्रिपुरा के सेपाहीजाला जिले में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास आशाबाड़ी में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों पर हमले के आरोप में 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 3 महिलाएं भी हैं। आरोप है कि सोमवार को भीड़ ने डंडों से जवानों पर हमला किया, जिसमें कंपनी कमांडर समेत 3 जवान घायल हो गए।
एक नज़र में
- कलमचौड़ा थाना क्षेत्र के आशाबाड़ी में BSF जवानों पर भीड़ ने डंडों से हमला किया।
- कंपनी कमांडर समेत 3 जवान घायल हुए और उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया।
- पुलिस के मुताबिक अब तक 9 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, बाकी की तलाश जारी है।
- मुख्यमंत्री माणिक साहा ने हमले की निंदा की, जबकि विपक्ष ने तस्करी पर सरकार को घेरा।
घटना कैसे हुई
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, BSF जवानों ने आशाबाड़ी के पास भारतीय और बांग्लादेशी तस्करों को सीमा पार से अवैध कारोबार करते देखा। जवान मौके पर पहुंचे और एक भारतीय तस्कर को पकड़ लिया। बांग्लादेशी तस्कर सीमा की बाड़ के दूसरी ओर से भाग गए। बाद में वह भारतीय तस्कर भी निकल भागा और गांव लौटकर कथित तौर पर कहने लगा कि BSF ने उसकी पिटाई की है।
इसके बाद बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष मौके पर जमा हो गए। आरोप है कि उन्होंने BSF की गाड़ी को घेर लिया और जवानों पर डंडों से हमला कर दिया। झड़प में हमलावरों में से एक व्यक्ति भी घायल हुआ। आरोप यह भी है कि भीड़ ने एक जवान की राइफल छीनने की कोशिश की और BSF की गाड़ी को नुकसान पहुंचाया। सुरक्षा बलों और आम वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए पेड़ काटकर सड़क जाम करने की कोशिश की गई।
पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया
BSF और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात पर काबू पाया, हालांकि इलाके में तनाव बना रहा। पुलिस के मुताबिक अब तक 9 आरोपी पकड़े गए हैं। बाकी आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए सोमवार रात से तलाशी अभियान चल रहा है।
गृह विभाग संभालने वाले मुख्यमंत्री माणिक साहा ने X पर पोस्ट करके हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने पहले बताया था कि बॉक्सानगर के आशाबाड़ी में हुए हमले में 8 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। साहा ने लिखा कि सभी दोषियों को कानून के अनुसार सख्त सजा दिलाई जाएगी और सुरक्षा बलों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने इसे अस्वीकार्य बताया और संबंधित अधिकारियों को तेज और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा बलों को पूरा सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ वाम नेता जितेंद्र चौधरी ने भी हमले की निंदा की। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार पर सीमा पार अवैध तस्करी रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। मीडिया से बातचीत में चौधरी ने दावा किया कि सत्तारूढ़ दल के कुछ कार्यकर्ता इस अवैध कारोबार में शामिल हैं और प्रशासन सब जानकर भी चुप है। उनके मुताबिक इसी वजह से इलाके में तस्करी जारी है। इन आरोपों पर सरकार की ओर से प्रतिक्रिया का ज़िक्र रिपोर्ट में नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक सेपाहीजाला जिले में पहले भी सीमा पार के तस्करों से जुड़ी जानलेवा घटनाएं हो चुकी हैं।