देहरादून से मिली जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने "विकसित उत्तराखंड विजन-2047" का रोडमैप तैयार किया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार इसमें राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार, ऊर्जा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी, तकनीक और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए बड़े लक्ष्य रखे गए हैं।
एक नज़र में
- राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 28 लाख करोड़ और प्रति व्यक्ति आय 20 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
- बेरोजगारी दर 5.7 प्रतिशत से घटाकर 3.5 प्रतिशत करने की योजना है।
- 2047 तक स्थापित ऊर्जा क्षमता लगभग 22 हजार मेगावाट और वन आच्छादन 46.6 प्रतिशत करने का लक्ष्य है।
- पर्यटन, कृषि और कनेक्टिविटी के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय हुए हैं।
रोडमैप में क्या-क्या शामिल है
उत्तराखंड को एक आदर्श हिमालयी राज्य बनाने के लिए रोडमैप में छह प्रमुख सेक्टर तय किए गए हैं। सरकार ने बेरोजगारी दर को 5.7 प्रतिशत से घटाकर 3.5 प्रतिशत करने और बहुआयामी गरीबी को 0.61 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा है। कृषि, पर्यटन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कौशल विकास, कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण को खास महत्व दिया गया है।
ऊर्जा के मोर्चे पर वर्ष 2047 तक राज्य की स्थापित क्षमता को करीब 22 हजार मेगावाट तक बढ़ाने की बात कही गई है। इसके साथ ही वन आच्छादन को 46.6 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा गया है।
नियोजन सचिव ने बताए क्षेत्रवार लक्ष्य
नियोजन सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि कृषि क्षेत्र में मोटे अनाजों की उत्पादकता को 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके अलावा 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सगंध फसलों की खेती की जाएगी। पर्यटन में विदेशी पर्यटकों की संख्या को दो गुना करने और 12 लाख रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रदेश में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सड़क, रेल, टनल और हवाई संपर्क के विस्तार पर ध्यान दिया गया है। रोडमैप में 13 हेली एंबुलेंस और चार फ्लाइंग स्कूल स्थापित करने की बात भी शामिल है।
समय-सीमा और समीक्षा की व्यवस्था
विजन में वर्ष 2030, 2035, 2040, 2047 और 2050 के लिए अलग-अलग लक्ष्य तय किए गए हैं। इन्हीं के आधार पर विभाग अपनी कार्ययोजनाएं तैयार करेंगे। साथ ही प्रगति की नियमित समीक्षा की व्यवस्था पर जोर दिया गया है, ताकि पता चलता रहे कि लक्ष्य किस रफ्तार से पूरे हो रहे हैं।
आम लोगों के लिए इस रोडमैप का महत्व इसलिए है कि इसमें रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं, यातायात और आय जैसे सीधे जीवन से जुड़े विषय शामिल हैं। अब देखना होगा कि विभागीय कार्ययोजनाएं कैसी बनती हैं और समीक्षा के दौरान लक्ष्यों की प्रगति कैसी रहती है।