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कर्नाटक के एथेनॉल दावे पर तेल कंपनियों ने जांच के तरीके पर सवाल उठाए

कर्नाटक सरकार का कहना है कि कुछ पेट्रोल नमूनों में एथेनॉल तय सीमा से ज़्यादा है। IOCL, BPCL और HPCL ने कहा कि जांच तय नियमों से नहीं हुई। कंपनियों ने संयुक्त और पारदर्शी जांच की मांग की है।

Shankar Nagar Petrol Pump, Nagpur 2
प्रतीकात्मक फोटो: Shankar Nagar Petrol Pump, Nagpur 2. Photo: Slyronit / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

कर्नाटक सरकार का कहना है कि राज्य में बिक रहे कुछ पेट्रोल में तय सीमा से ज़्यादा एथेनॉल है।

सरकार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जांच के नतीजे जारी किए। सबसे ज़्यादा मात्रा 31.2 प्रतिशत बताई गई है, जबकि सीमा 20 प्रतिशत है।

तीन सरकारी तेल कंपनियों ने इन नतीजों को खारिज कर दिया है।

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, यानी IOCL, भारत पेट्रोलियम, यानी BPCL, और हिंदुस्तान पेट्रोलियम, यानी HPCL, ने शुक्रवार को संयुक्त बयान जारी किया।

उनका कहना है कि जांच तय प्रक्रिया से नहीं हुई।

कार्टोक ने यह संयुक्त बयान की खबर दी है। द साउथ फर्स्ट और डेक्कन हेराल्ड ने भी कंपनियों का पक्ष छापा है।

एक नज़र में

  • कर्नाटक के कई इलाकों के नमूनों में एथेनॉल 20 प्रतिशत की सीमा से ऊपर बताया गया है।
  • कंपनियों का कहना है कि राज्य ने नमूने लेने के तय नियम नहीं माने।
  • कंपनियों के मुताबिक़ 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 893 नमूने तय सीमा में थे।
  • उन्होंने राज्य सरकार के साथ संयुक्त और पारदर्शी जांच की मांग की है।

राज्य सरकार आखिर क्या दावा कर रही है?

राज्य के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री रिज़वान अरशद ने आरोप लगाया है।

उनके मुताबिक़ राज्य के कई हिस्सों के पेट्रोल में एथेनॉल तय सीमा से काफ़ी ज़्यादा था।

नमूने बेंगलुरु, कोलार, चिक्कबल्लापुर, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलुरु और तुमकुरु से लिए गए थे।

एक IOCL नमूने में सबसे ज़्यादा 31.2 प्रतिशत दर्ज होने की बात कही गई है। राज्य ने ऐसे पेट्रोल बेचने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की मांग की है।

तेल कंपनियां जांच को गलत क्यों बता रही हैं?

कंपनियां 2005 के कंट्रोल ऑर्डर और 2024 के मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइन्स की तरफ़ इशारा करती हैं।

इन नियमों के तहत किसी आउटलेट से एक-एक लीटर के छह नमूने लेने होते हैं।

दो नमूने डीलर को दिए जाते हैं। दो तेल कंपनी या विभाग के पास रखे जाते हैं। बाकी दो एक तय प्रयोगशाला को भेजे जाते हैं।

नमूनों के लेबल पर दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर होने चाहिए।

एथेनॉल जांच: नमूना लेने की तय प्रक्रिया
  1. 1
    छह नमूने लेंएक आउटलेट से एक-एक लीटर के छह नमूने लिए जाते हैं।
  2. 2
    दो डीलर को देंदो नमूने डीलर को दिए जाते हैं।
  3. 3
    दो कंपनी के पास रखेंदो नमूने तेल कंपनी या विभाग के पास रखे जाते हैं।
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    दो लैब को भेजेंबाकी दो नमूने एक तय प्रयोगशाला को भेजे जाते हैं।
  5. 5
    लेबल पर संयुक्त हस्ताक्षरनमूनों के लेबल पर दोनों पक्षों के संयुक्त हस्ताक्षर होने चाहिए।

ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से

कंपनियों का कहना है कि कर्नाटक ने अक्टूबर 2026 में यह प्रक्रिया नहीं अपनाई। उनके प्रतिनिधि नमूने लेते समय मौजूद नहीं थे।

उन्हें रिटेंशन नमूने, आउटलेट की जानकारी और लैब रिपोर्ट भी नहीं मिली।

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक़ राज्य के प्रमाण पत्रों में जांच का मानक, घोल बनाने का तरीका और संदर्भ सामग्री साफ़ नहीं बताई गई है।

कंपनियों का दावा है कि उनका E20 पेट्रोल भारतीय मानक ब्यूरो के IS 17021 मानक पर खरा है।

तो इसका असर पेट्रोल खरीदारों पर क्या होगा?

E20 मिश्रण केंद्र सरकार के नियमों के तहत तय है। अब कर्नाटक के लोग एक ही ईंधन पर दो बिलकुल अलग दावे सुन रहे हैं।

कंपनियों ने ग्राहकों से सिर्फ़ आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने को कहा है।

उन्होंने तथ्य तय करने के लिए राज्य सरकार के साथ संयुक्त जांच का प्रस्ताव रखा है।

स्रोतों में यह नहीं बताया गया है कि यह जांच कब होगी या होगी भी या नहीं।

समझिए

पहले क्या हुआ

  • अक्टूबर 2026 में कर्नाटक ने कई ज़िलों से लिए गए पेट्रोल नमूनों की जांच की।
  • प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य ने 31.2 प्रतिशत तक एथेनॉल वाले नतीजे जारी किए।
  • राज्य ने ऐसे पेट्रोल बेचने वाली तेल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

यह क्यों अहम है

E20 मिश्रण केंद्र सरकार के नियमों के तहत तय है, इसलिए यह विवाद कर्नाटक के पेट्रोल खरीदारों पर असर डालता है।

आगे क्या

  • तेल कंपनियों ने राज्य सरकार के साथ संयुक्त और पारदर्शी जांच की मांग की है। स्रोतों में इसकी तारीख नहीं दी गई है।

स्रोत

देशकर्नाटकसमझिए

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