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दिल्ली-एनसीआर में GRAP-3 लागू, हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी की ओर

वायु गुणवत्ता आयोग ने यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया है। निर्माण, खनन और पुराने वाहनों पर रोक लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर चिंता जताई है।

Government offices, Goa, India
प्रतीकात्मक फोटो: Government offices, Goa, India. Photo: Fredericknoronha / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

दिवाली से ठीक पहले दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी की ओर खिसक रही है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान का तीसरा चरण, यानी GRAP-3, लागू कर दिया है।

आयोग ने यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यह फैसला शुक्रवार को लिया गया, जो दिवाली से दो दिन पहले था।

जागरण की रिपोर्ट में फैसले की तारीख 6 नवंबर बताई गई है।

एक नज़र में

  • बढ़ते प्रदूषण के बीच दिल्ली-एनसीआर में GRAP-3 लागू है।
  • निर्माण, खनन और पत्थर क्रशर पर सख्त रोक लगाई गई है।
  • दिल्ली और आसपास के कुछ जिलों में पुराने पेट्रोल और डीज़ल वाहनों पर पाबंदी है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने वाहनों के धुएं को प्रदूषण का बड़ा कारण बताया है।

तो GRAP-3 अभी क्यों लगाना पड़ा?

आयोग के मुताबिक शुक्रवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 382 रहा, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। शाम 7 बजे यह थोड़ा सुधरकर 376 हो गया।

लेकिन राजधानी के कम से कम 26 निगरानी केंद्रों पर स्तर 400 से ऊपर दर्ज हुआ। यह गंभीर श्रेणी है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक शहर सिर्फ 16 दिनों में पहले चरण से तीसरे चरण तक पहुंच गया।

दिल्ली-एनसीआर के लोगों पर इसका क्या असर होगा?

पूरे एनसीआर में ज़रूरी न होने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के काम रोके जाएंगे। कुछ ज़रूरी बुनियादी ढांचे और जनहित के प्रोजेक्ट को छूट मिली है।

पत्थर क्रशर बंद होंगे और खनन रोका जाएगा। जो ईंट भट्टे और हॉट-मिक्स प्लांट नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें चलने नहीं दिया जाएगा।

दिल्ली और गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाज़ियाबाद व नोएडा जैसे जिलों में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीज़ल चार पहिया वाहनों पर पाबंदी लगेगी।

एबीपी न्यूज़ के मुताबिक 50 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा जाएगा।

स्कूलों के बारे में सूत्रों में अंतर है। एबीपी न्यूज़ और जागरण के मुताबिक पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई हाइब्रिड मोड में हो सकती है।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार राज्य इन्हें ऑनलाइन मोड में बदलने पर विचार कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण पर क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का एक बड़ा कारण वाहनों का धुआं है।

अदालत ने सड़कों पर "बंपर-टू-बंपर" ट्रैफिक की चिंता जताई।

अदालत ने तुरंत, मध्यम और लंबी अवधि के उपाय करने की बात कही।

उसने यह भी चेताया कि सिर्फ पाबंदियों से काम नहीं चलेगा, क्योंकि आदेश बढ़ने पर उल्लंघन भी बढ़ सकते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस ने यह सुनवाई वायु प्रदूषण के नियामक ढांचे से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले में बताई है। मामले की सुनवाई अभी जारी है।


स्रोत

देशदिल्ली

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