पश्चिम बंगाल अगले कुछ महीनों में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश लाना चाहता है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 5 नवंबर को कोलकाता में नई नीति लॉन्च करते समय यह बात कही।

इस नीति का नाम पश्चिम बंगाल निवेश प्रोत्साहन नीति, 2026 है। यह जानकारी इंडियन मास्टरमाइंड्स की रिपोर्ट में दी गई है।
एक नज़र में
- राज्य का लक्ष्य लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश लाना है।
- नीति में वित्तीय मदद, तेज़ मंज़ूरी और बेहतर ज़मीन की सुविधा है।
- पुरानी नीतियों के लगभग 50,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन अब भी लंबित हैं।
- नए प्रोत्साहनों के लिए 5,000 करोड़ रुपये का अलग फंड बनाया गया है।
निवेशकों को नई नीति से क्या मिलेगा?
नीति के तहत पात्र औद्योगिक निवेश को वित्तीय मदद दी जाएगी।
प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और चुने हुए सेक्टरों में काम करने वाले व्यवसायों को ज़्यादा प्रोत्साहन मिलेगा।
सरकार का कहना है कि इससे उद्योग तेज़ी से बढ़ेंगे और रोज़गार बनेगा। मंज़ूरी प्रक्रिया भी आसान और तय समय सीमा में करने की बात कही गई है।
यह नीति 9 मई 2026 को या उसके बाद किए गए निवेश पर लागू होगी। इसी दिन राज्य में भाजपा सरकार ने कार्यभार संभाला था।
सरकार उद्योगों के लिए ज़मीन कैसे जुटाएगी?
अधिकारी के मुताबिक ज़मीन सीधी खरीद, भूमि पूलिंग, मौजूदा औद्योगिक पार्क और खाली औद्योगिक plots से मिल सकती है।
उन्होंने ज़बरदस्ती ज़मीन अधिग्रहण से इनकार किया। उन्होंने कहा कि सरकार ज़मीन मालिकों से सीधे बात करेगी।
राज्य ज़मीन खरीद में मदद के लिए HUDCO, NABARD और एशियाई विकास बैंक से वित्तीय सहायता पर विचार कर रहा है।
अधिकारी ने यह भी बताया कि सरकार 33 व्यावसायिक समूहों के लिए ज़मीन की व्यवस्था करा चुकी है।
पुराना बकाया क्यों चिंता की बात है?
नए निवेश के प्रयास के साथ राज्य पर लगभग 50,000 करोड़ रुपये का बकाया है। यह पिछली नीतियों में किए गए प्रोत्साहनों का पैसा है।
अधिकारी ने कहा कि राज्य अभी यह रकम नहीं चुका सकता। उन्होंने राज्य पर लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के कर्ज़ का हवाला दिया।
ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से
उन्होंने कहा कि वित्तीय स्थिति सुधरने पर बकाया चुकाया जाएगा। गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु को मज़बूत राज्य वित्त के उदाहरण के तौर पर बताया गया।
समझिए
पहले क्या हुआ
- भाजपा सरकार ने 9 मई 2026 को पश्चिम बंगाल में कार्यभार संभाला।
- पहले की नीतियों में उद्योगों को प्रोत्साहन देने का वादा किया गया था, और अब राज्य पर लगभग 50,000 करोड़ रुपये का बकाया है।
- राज्य पर लगभग 8 लाख करोड़ रुपये का कर्ज़ है, जिसे अधिकारी ने बकाया न चुका पाने की वजह बताया।
यह क्यों अहम है
राज्य कारखाने और रोज़गार लाना चाहता है, लेकिन उद्योगों से किए पुराने वादे अभी पूरे नहीं हुए हैं। निवेशक और कामगार दोनों पर इसका असर पड़ेगा।