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सरकारी योजना

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ: यह क्या है, परिवारों को क्या मिलता है और कैसे काम करता है

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ बेटियों को बचाने और पढ़ाने का राष्ट्रीय अभियान है। यह ज़्यादातर जागरूकता, जिला स्तर की कार्रवाई और कल्याण सेवाओं से काम करता है, हर परिवार को सीधे नकद नहीं देता। जानिए यह क्या कवर करता है और शुरुआत कहां से करें।

Computer education girls Gujarat
प्रतीकात्मक फोटो: Computer education girls Gujarat. Photo: Yann / Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0

यहां पूरी योजना एक जगह है: क्या मिलता है, कौन पात्र है, आवेदन कैसे करें, और क्या जांचें।

योजना एक नज़र में
योजनाबेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (BBBP)
मंत्रालयमहिला एवं बाल विकास मंत्रालय, साथ में स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
फायदाजागरूकता, बेटियों की शिक्षा और स्वास्थ्य सहायता, बेहतर कल्याण सेवाएं; हर परिवार के लिए तय नकद राशि नहीं
किसके लिएभारत के सभी जिलों की बेटियां और उनके परिवार
कैसे पहुंचता हैजिला प्रशासन, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाओं और सामुदायिक कार्यक्रमों के ज़रिए
कहां जाएंwcd.gov.in, अपने जिले का महिला एवं बाल विकास कार्यालय, या नज़दीकी आंगनवाड़ी या स्कूल
आवेदन शुल्कमुफ्त

एक नज़र में

  • यह एक अभियान और बेटियों के लिए कल्याण कार्यक्रम है, कोई एक नकद योजना नहीं।
  • इसकी शुरुआत 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।
  • यह बाल लिंगानुपात, बेटियों के जीवन, सुरक्षा और शिक्षा पर काम करता है।
  • अपने जिले में उपलब्ध सेवाओं के लिए स्थानीय कार्यालय से पूछें।

तो बेटी या परिवार को असल में क्या मिलता है?

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मुख्य रूप से एक अभियान है, हर परिवार को तय नकद भुगतान नहीं।

इसका फायदा बेटियों के लिए बेहतर कल्याण सेवाओं के ज़रिए मिलता है। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य और आपके जिले में सुरक्षा शामिल है।

स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और आंगनवाड़ी इनमें से कई सेवाएं देते हैं। सटीक सहायता आपके राज्य और जिले पर निर्भर करती है।

नवीनतम सुविधाओं और संबंधित योजनाओं के किसी नकद लाभ के लिए wcd.gov.in देखें। राशि और नियम बदल सकते हैं, इसलिए वहीं पुष्टि करें।

यह किसके लिए है, और कौन सी शर्त जांचें?

यह योजना भारत भर की बेटियों के लिए है। यह किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है।

इसने उन जिलों पर ध्यान दिया जहां बाल लिंगानुपात कम था, अब यह सभी जिलों में है।

अभियान के लिए कोई आय सीमा नहीं है। आपके क्षेत्र की खास सेवाओं के अपने नियम हो सकते हैं।

यह अभियान शुरू क्यों किया गया?

भारत में बाल लिंगानुपात तेज़ी से गिरा। 2011 की जनगणना में 0 से 6 साल की उम्र में 1,000 लड़कों पर 919 लड़कियां थीं।

लिंग के आधार पर गर्भपात और गहरा लैंगिक भेदभाव इसके बड़े कारण थे। दहेज के दबाव को भी अक्सर दोष दिया गया।

इसकी शुरुआत पहले 100 लैंगिक रूप से संवेदनशील जिलों में हुई। बाद में यह सभी जिलों तक फैला।

कौन से कागज़ तैयार रखें?

बेटी के स्कूल दाखिले या स्वास्थ्य सेवा के लिए उसका जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड रखें।

माता-पिता का आधार कार्ड और एक मोबाइल नंबर रखें। किसी भुगतान में शामिल हो तो बैंक विवरण भी रखें।

आपका स्थानीय कार्यालय और कागज़ मांग सकता है, इसलिए जाने से पहले फोन करके पूछ लें।

इस अभियान के फायदे कैसे लें?

योजना और उसके मौजूदा कार्यक्रम पढ़ने के लिए wcd.gov.in पर जाएं।

आप अपने जिले के महिला एवं बाल विकास कार्यालय भी जा सकते हैं। बेटियों की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में पूछें।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्कूल के शिक्षक भी सही सेवा तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं।

क्या ऑफलाइन आवेदन के तरीके हैं?

हां। ज़्यादातर सहायता ऑफलाइन मिलती है, जिला कार्यालय, आंगनवाड़ी, स्कूल या स्वास्थ्य केंद्र के ज़रिए।

अपने कागज़ लेकर खुद जाएं और बताएं कि आपको क्या चाहिए। स्टाफ बता सकता है कि आपके मामले में कौन सी सेवा लागू होती है।

अगर सेवा आप तक नहीं पहुंच रही तो क्या करें?

सबसे पहले जिले के महिला एवं बाल विकास कार्यालय से बेटियों के लिए उपलब्ध सेवाओं के बारे में पूछें।

शिकायत हो तो wcd.gov.in पर आधिकारिक पोर्टल की शिकायत प्रणाली से दर्ज करें।

बेटी के दाखिले या किसी लाभ की मंज़ूरी के लिए पैसे मांगने वालों से सावधान रहें। सरकारी सेवाएं मुफ्त होनी चाहिए।

कुछ आखिरी सुझाव?

आपके जमा किए हर कागज़ की कॉपी रखें, और तारीख व कार्यालय का नाम लिख लें।

इस अभियान के नाम पर नकद का वादा करने वाले एजेंटों या बिचौलियों पर भरोसा न करें।

कोई कदम उठाने से पहले wcd.gov.in पर नवीनतम जानकारी ज़रूर पक्की करें।

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