शनिवार सुबह दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित बड़ा शहर रही। यह जानकारी स्विस वायु गुणवत्ता निगरानी समूह IQAir ने दी।
BW Businessworld ने यह रिपोर्ट दी है।
यह स्थिति दिवाली से पहले हवा बिगड़ने के बीच सामने आई है। दिवाली रविवार को है।
सुबह 10:35 बजे IQAir ने दिल्ली का US Air Quality Index (AQI) 581 दर्ज किया।
लेकिन इसका पैमाना भारत के आधिकारिक AQI से अलग है, इसलिए दोनों संख्याओं की सीधी तुलना नहीं हो सकती।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने सुबह 10 बजे दिल्ली का AQI 363 दर्ज किया। यह "बहुत खराब" श्रेणी है।
ग्राफिक: News Anek, इसी खबर के तथ्यों से
स्थानीय मीडिया ने आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से बताया कि शुक्रवार की हवा दिवाली से पहले आठ साल में सबसे खराब रही।
एक नज़र में
- शनिवार सुबह IQAir ने दिल्ली को दुनिया का सबसे प्रदूषित बड़ा शहर बताया।
- CPCB के आंकड़ों में दिल्ली का AQI 363 है, जो "बहुत खराब" श्रेणी है।
- शुक्रवार से दिल्ली-NCR में GRAP का तीसरा चरण लागू है।
- पाँचवीं कक्षा तक के स्कूल हाइब्रिड मोड में चल रहे हैं।
GRAP का तीसरा चरण क्या है और इसका मतलब क्या है?
कमीशन फ़ॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने शुक्रवार, 6 नवंबर को ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का तीसरा चरण लागू किया।
यह फ़ैसला तुरंत प्रभाव से लागू हुआ।
यह फ़ैसला प्रदूषण के स्तर और मौसम के पूर्वानुमान की समीक्षा के बाद लिया गया।
ये पूर्वानुमान भारत मौसम विज्ञान विभाग और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान से लिए गए।
पूरे इलाके में गैर-ज़रूरी निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक है।
दिल्ली और आसपास के ज़िलों में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीज़ल वाली चार पहिया गाड़ियों पर भी पाबंदी है।
इनमें गुरुग्राम, फ़रीदाबाद, गाज़ियाबाद और गौतम बुद्ध नगर शामिल हैं।
लोगों से सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने, बेवजह यात्रा से बचने और बाहर कम समय बिताने को कहा गया है।
स्कूल और दफ़्तर अपना तरीका क्यों बदल रहे हैं?
अधिकारियों ने पाँचवीं कक्षा तक की पढ़ाई हाइब्रिड मोड में करने को कहा है। बच्चे स्कूल जाकर या ऑनलाइन, दोनों तरह से जुड़ सकते हैं।
मकसद बच्चों का बाहर की प्रदूषित हवा के संपर्क में आना कम करना है।
सरकार ने जहाँ संभव हो, कर्मचारियों को घर से काम करने की सलाह भी दी है।
एक पहले के आदेश में 5 से 20 नवंबर तक दफ़्तरों में 50 प्रतिशत उपस्थिति की अनुमति दी गई थी।
पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने शुक्रवार को चेताया कि हवा की रफ़्तार कम होने से प्रदूषण और बढ़ सकता है।
उन्होंने लोगों से पाबंदियों में सहयोग की अपील की।
सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या पर क्या कहा?
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-NCR में प्रदूषण का एक बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआँ है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अगुवाई वाली पीठ ने सड़कों पर बम्पर-टू-बम्पर ट्रैफ़िक पर चिंता जताई।
पीठ ने यह भी पूछा कि बार-बार लगने वाली पाबंदियाँ कितनी कारगर हैं। उसने कहा कि और आदेश जारी करने से मूल कारण शायद हल न हो।
पीठ ने जनता में जागरूकता और व्यवहार में बदलाव की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
समझिए
पहले क्या हुआ
- इससे पहले एक निवारक आदेश में सरकारी और निजी दफ़्तरों को 5 से 20 नवंबर तक 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ चलाने की अनुमति दी गई थी।
- शुक्रवार, 6 नवंबर को CAQM ने दिल्ली-NCR में GRAP के तीसरे चरण को तुरंत लागू किया।
- उसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा पाबंदियाँ कितनी असरदार हैं, इस पर सवाल उठाए।
यह क्यों अहम है
हवा बिगड़ने से दिल्ली-NCR में स्कूलों, दफ़्तरों और रोज़ की आवाजाही पर सीधा असर पड़ता है।
आगे क्या
- रिपोर्ट में नहीं बताया गया है कि GRAP के तीसरे चरण की पाबंदियाँ कब खत्म होंगी।